-Friday World-May 3,2026
नई दिल्ली/ 3 मई 2026
28 फरवरी 2026 से मिडिल ईस्ट में जो आग लगी है, उसने अब समंदर तक को लीलना शुरू कर दिया है। एक तरफ अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच छिड़ी जंग से होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही बारूद के ढेर पर बैठा है। इसी बीच अदन की खाड़ी से आई एक खबर ने दुनिया की धड़कनें और बढ़ा दी हैं। यमन के तट के पास समुद्री लुटेरों ने ‘यूरेका’ नाम के एक ऑयल टैंकर को हाईजैक कर लिया है और उसे सोमालिया की तरफ ले जा रहे हैं। जंग और लूट के इस डबल अटैक ने ग्लोबल ऑयल सप्लाई को अब तक के सबसे बड़े संकट में धकेल दिया है।
क्या है पूरी घटना? कैसे दिया लुटेरों ने वारदात को अंजाम
यमन के शबवा प्रांत के पास से गुजर रहे ‘यूरेका’ टैंकर पर बीती रात अचानक हमला हुआ। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक 8 से 10 हथियारबंद हमलावर तेज रफ्तार स्पीड बोट से आए। उन्होंने ग्रैपलिंग हुक और सीढ़ियों की मदद से चलती हुई शिप पर चढ़ाई कर दी। कुछ ही मिनटों में ब्रिज पर कब्जा कर लिया गया और 22 क्रू मेंबर्स को बंधक बना लिया गया।
‘यूरेका’ टोगो देश के झंडे के साथ रजिस्टर्ड है। शिपिंग रिकॉर्ड बताते हैं कि इसे आखिरी बार मार्च के आखिर में यूएई के फुजैराह पोर्ट पर देखा गया था। वहां से निकलने के बाद इसका अगला डेस्टिनेशन क्या था, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन अदन की खाड़ी लाल सागर और अरब सागर को जोड़ने वाला सबसे व्यस्त रास्ता है। यहां से रोज 60 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल यूरोप और एशिया जाता है।
यमन कोस्ट गार्ड ने क्या बताया? सोमालिया क्यों ले जा रहे हैं जहाज
यमन कोस्ट गार्ड ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि टैंकर की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। सैटेलाइट और मैरीटाइम सर्विलांस से उस पर लगातार नजर रखी जा रही है। अभी की जानकारी के मुताबिक लुटेरे उसे सोमालिया के पूर्वी तट, खासकर पंटलैंड इलाके की तरफ ले जा रहे हैं।
सोमालिया का तट समुद्री डकैती के लिए दुनिया भर में बदनाम रहा है। 2011 में यहां हालात इतने खराब थे कि हर महीने 4 से 5 जहाज हाईजैक हो रहे थे। बाद में भारत, अमेरिका, चीन और यूरोपियन यूनियन की नौसेनाओं ने ‘ऑपरेशन अटलांटा’ चलाया। इसके बाद 2019 तक पाइरेसी की घटनाएं न के बराबर हो गई थीं। मगर ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने के बाद पिछले 8 हफ्तों में हालात फिर बिगड़े हैं। EU नेवल फोर्स NAVFOR के डेटा के अनुसार, सिर्फ अप्रैल में ही अदन की खाड़ी में 3 बड़े हाईजैक की कोशिशें हुईं।
क्या जंग और लूट में कोई कनेक्शन है? एक्सपर्ट की राय
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘यूरेका’ का हाईजैक ईरान-अमेरिका जंग का हिस्सा है? अभी तक कोई सीधा सबूत नहीं मिला है। समुद्री सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन वी.के. सिंह कहते हैं, “यह मौके का फायदा उठाने का केस ज्यादा लगता है। होर्मुज और लाल सागर में अमेरिका-ब्रिटेन के युद्धपोत ईरान को घेरने में लगे हैं। अदन की खाड़ी में गश्त कम हो गई है। सोमालिया के लुटेरे इसी गैप का फायदा उठा रहे हैं।”
दूसरा पहलू इकोनॉमी का है। जंग के कारण कच्चे तेल के दाम 130 डॉलर प्रति बैरल पार कर गए हैं। ब्लैक मार्केट में एक फुल टैंकर की कीमत 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ‘यूरेका’ में कितना तेल है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन माना जा रहा है कि उसमें 1.2 लाख बैरल क्रूड हो सकता है। इतनी बड़ी रकम लुटेरों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं।
दुनिया पर कितना बड़ा असर? तेल हुआ और महंगा
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। जंग के कारण शिपिंग कंपनियों का इंश्योरेंस प्रीमियम 5 गुना बढ़ चुका है। कई कंपनियों ने अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा रास्ता लेना शुरू कर दिया था। इससे किराया और डिलीवरी टाइम दोनों बढ़ गए।
अब अदन की खाड़ी में भी लुटेरों का खतरा बढ़ने से वह रास्ता भी असुरक्षित हो गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगर अगले 15 दिन में हालात नहीं सुधरे तो क्रूड 150 डॉलर पार कर जाएगा। भारत के लिए यह दोहरी मार है। हम अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाते हैं। पेट्रोल-डीजल 10 से 15 रुपये लीटर तक महंगे हो सकते हैं। इससे महंगाई की दर 8% के पार जा सकती है।
क्रू मेंबर्स का क्या होगा? कैसे छुड़ाया जाएगा जहाज
‘यूरेका’ पर 22 क्रू मेंबर्स हैं। इनमें 6 भारतीय, 9 फिलिपिनो, 4 यूक्रेनी और 3 टोगो के नागरिक शामिल हैं। सोमालिया के लुटेरे आमतौर पर फिरौती के लिए बंधक बनाते हैं। 2011 में ‘MV आइजनबर्ग’ के क्रू को 3 साल बाद 50 लाख डॉलर लेकर छोड़ा गया था।
यमन सरकार ने कहा है कि वह ओमान, सऊदी अरब और EU नेवी के साथ मिलकर ऑपरेशन चला रही है। लेकिन सोमालिया के पंटलैंड में कोई मजबूत सरकार नहीं है। वहां लोकल कबीलों और लुटेरों का राज चलता है। ऐसे में कमांडो ऑपरेशन बहुत रिस्की होता है। ज्यादातर मामलों में नेगोशिएशन और फिरौती देकर ही मामला सुलझता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षित रिहाई के लिए यमन और टोगो सरकार से संपर्क किया है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS चेन्नई और INS कोलकाता को अदन की खाड़ी में भेजा गया है।
क्या 2011 वाला दौर लौट रहा है? आगे क्या होगा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इमरजेंसी बैठक बुलाई है। लेकिन मुश्किल यह है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अभी ईरान-अमेरिका जंग में उलझी हैं। जब तक जंग चलती रहेगी, अदन की खाड़ी में पूरी ताकत से गश्त मुमकिन नहीं।
समुद्री मामलों के एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर अगले 30 दिन में 2 से 3 और हाईजैक हुए, तो शिपिंग कंपनियां इस रूट को ‘नो-गो जोन’ घोषित कर देंगी। इसका मतलब है कि अफ्रीका का चक्कर ही एकमात्र रास्ता बचेगा। इससे यूरोप-एशिया का माल भाड़ा 40% तक बढ़ जाएगा।
2011 में दुनिया ने मिलकर पाइरेसी को हराया था। मगर उस वक्त कोई बड़ा युद्ध नहीं चल रहा था। इस बार चुनौती डबल है। एक तरफ मिसाइलें चल रही हैं, दूसरी तरफ समंदर में लुटेरे तलवारें चमका रहे हैं। अगर इंटरनेशनल कम्युनिटी ने तुरंत एक जॉइंट टास्क फोर्स नहीं बनाई, तो तेल संकट तीसरे विश्व युद्ध से पहले ही दुनिया की कमर तोड़ देगा।
भारत के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी
1. तेल आयात: भारत का 60% से ज्यादा कच्चा तेल होर्मुज और अदन की खाड़ी के रास्ते आता है।
2. क्रू की सुरक्षा: मर्चेंट नेवी में 2.4 लाख से ज्यादा भारतीय हैं। यह रूट उनके लिए सबसे खतरनाक बन गया है।
3. *महंगाई*: तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खेती, और FMCG सब पर असर पड़ेगा।
4. रणनीतिक दबाव: चीन इस मौके का फायदा उठाकर हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ‘यूरेका’ पर है। क्या क्रू मेंबर्स सही सलामत लौटेंगे? क्या यह घटना अकेली है या 2011 जैसे दौर की शुरुआत? जवाब आने वाले कुछ दिन तय करेंगे। लेकिन इतना तय है कि ईरान-अमेरिका की जंग अब सिर्फ मिसाइलों की नहीं रही। समंदर का पानी भी अब खून से लाल होने लगा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-May 3,2026