-Friday World 17 Jun 2026
G7 समिट पर इजरायल-नेतन्याहू पर खुली नाराजगी, लेबनान युद्ध को बताया 'माइनर फ्रंट' – क्या बदल रहा है मध्य पूर्व का समीकरण?
दोहा/पेरिस (2026): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान एक ऐसा बयान दिया है जो पूरे मध्य पूर्व में भूचाल ला सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा
– "अगर इजरायल बाकी सभी को मारे बिना यह काम नहीं कर सकता, तो यह काम सीरिया के हवाले कर देना चाहिए।" मतलब साफ हे आतंकवादी जोलानी इजराइल की पैदावार हे
ट्रंप ने लेबनान में चल रहे इजरायली अभियान को "बहुत लंबा और बहुत घातक" बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई में "अपार्टमेंट बिल्डिंग्स" गिरा रहा है, जिसमें आम नागरिकों की भारी संख्या में मौत हो रही है।
ट्रंप के शब्दों में:
"मैंने इजरायल को सुझाव दिया कि सीरिया को हिज्बुल्लाह का मुकाबला करने दो। क्योंकि ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि वे इसे बेहतर तरीके से करेंगे।"
यह बयान G7 समिट (एवियन-ले-बैंस, फ्रांस) के दौरान दिया गया, जहां ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे चेतावनी दी कि उन्हें लेबनान के मामले में "अधिक जिम्मेदार" होना चाहिए।
लेबनान संघर्ष और ट्रंप की नाराजगी
2024 के अंत से चला आ रहा इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्ध 2026 में भी जारी है। इजरायली सेनाएं दक्षिण लेबनान में बफर जोन बनाए हुए हैं, जबकि हिज्बुल्लाह लगातार प्रतिरोध कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक व्यापक समझौते (MoU/शांति ढांचा) की तैयारी कर रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय स्थिरता और लेबनान शामिल है।
ट्रंप का मानना है कि लेबनान का मोर्चा "माइनर फ्रंट" है, लेकिन इजरायल की कार्रवाई अमेरिका-ईरान डील को खतरे में डाल रही है। उन्होंने हाल के बेरूत हमलों की आलोचना की, जहां आवासीय इमारतों पर हमले में नागरिक मारे गए। ट्रंप ने कहा, "Too many people are being killed... You don’t have to knock down an apartment house every time."
ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ (Ahmed al-Sharaa, पूर्व अबू मोहम्मद अल-जुलानी, HTS नेता) की तारीफ करते हुए कहा कि वे हिज्बुल्लाह को "पसंद नहीं करते" और "बहुत सक्षम" हैं। उन्होंने दावा किया कि अल-शरआ अमेरिका के साथ अच्छे संबंध रखते हैं और "everything that I’ve asked for" किया है।
क्यों सीरिया? रणनीतिक बदलाव या डिप्लोमैटिक दांव?
सीरिया लंबे समय से हिज्बुल्लाह और ईरान का सहयोगी रहा है, लेकिन असद शासन के पतन (2024) के बाद HTS के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन हुआ। 2025 से अल-शरआ अंतरिम राष्ट्रपति हैं और उन्होंने खुद को मॉडरेट दिखाने की कोशिश की है। ट्रंप का यह सुझाव कई सवाल खड़े करता है:
- सैन्य क्षमता: क्या सीरिया की सेना और HTS हिज्बुल्लाह के मजबूत मिलिशिया नेटवर्क को नियंत्रित या पराजित कर पाएगा? सीरिया अभी भी आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर है।
- लेबनान की संप्रभुता: लेबनान पहले ही सीरियाई हस्तक्षेप (1970-2000 के दशक) से जूझ चुका है। इस प्रस्ताव से वहां भय और आक्रोश फैल सकता है।
- इजरायल की प्रतिक्रिया: इजरायल सीरिया को हमेशा से खतरा मानता रहा है (गोलान हाइट्स विवाद)। नेतन्याहू सरकार इस सुझाव को "बेहद खतरनाक" और "धोखा" बता रही है। कई इजरायली नेता कह रहे हैं कि यह हिज्बुल्लाह को बल देगा।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका सीरिया के साथ समन्वय में हिज्बुल्लाह का मुकाबला कर सकता है, अगर इजरायल "नियंत्रित" नहीं हो पाया। उनका फोकस "America First" और बड़े डील (ईरान, कतर फंडिंग) पर है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- इजरायल: बयान को "धोखा", "अनुचित" और "खतरनाक" बताया जा रहा है। कई नेता कह रहे हैं कि ट्रंप की टिप्पणी हिज्बुल्लाह को मजबूती देगी और इजरायल की सुरक्षा को कमजोर करेगी। फिर भी ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू के साथ उनका "great relationship" है, लेकिन "Bibi has to be more responsible"।
- लेबनान: नागरिक समाज में दहशत। लोग पुराने सीरियाई कब्जे और हस्तक्षेप को याद कर रहे हैं। लेबनानी सरकार और हिज्बुल्लाह दोनों इसे अस्वीकार्य मान रहे हैं।
- सीरिया/अल-शरआ: अल-शरआ ने अभी स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन ट्रंप की तारीफ उनके लिए अंतरराष्ट्रीय वैधता बढ़ा सकती है।
- ईरान और अन्य: ईरान ने इजरायल को चेतावनी दी है। खाड़ी देश (खासकर कतर) ट्रंप के ईरान डील को समर्थन दे रहे हैं।
क्या बदल रहा है मध्य पूर्व का समीकरण?
ट्रंप का यह बयान रणनीतिक शिफ्ट का संकेत है:
- इजरायल को अंध समर्थन की बजाय "रिजल्ट्स" और "कम कॉस्ट" पर जोर।
- पुराने दुश्मन (HTS/अल-शरआ) को मुख्यधारा में लाकर ईरान प्रॉक्सी (हिज्बुल्लाह) को कमजोर करना।
- ईरान डील को प्राथमिकता — लेबनान का "अधिक घातक" अभियान इसे बर्बाद न करे।
यह जोखिम भरा दांव है। हिज्बुल्लाह-ईरान अक्ष अभी भी मजबूत है, इजरायल की रेड लाइन्स (सीरिया पर हमले) बरकरार हैं, और लेबनान में अस्थिरता बढ़ सकती है। स्थिति तेजी से बदल रही है — आगे की डेवलपमेंट्स (ईरान MoU, इजरायल-सीरिया टेंशन) पर नजर रखनी होगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 17 Jun 2026