- Friday World 29 May2026
29 मई 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कैबिनेट मीटिंग के दौरान एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया। उन्होंने ओमान को चेतावनी देते हुए कहा — “ओमान वैसा ही व्यवहार करे जैसा बाकी देश करते हैं, वरना हमें उन्हें उड़ा देना होगा।”
यह धमकी ईरान के साथ हॉर्मुज स्ट्रेट में टोल वसूली की कथित योजना के बीच आई है। ट्रंप का कहना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और इसे कोई भी नियंत्रित नहीं कर सकता।
पूरा मामला क्या है?
2026 के शुरू में ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया। दुनिया के करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान शांति समझौते की शर्त रख रहा है कि उसे स्ट्रेट में जहाजों से टोल वसूलने की अनुमति दी जाए।
ओमान इस पूरे मामले में अहम भूमिका में है क्योंकि स्ट्रेट की सबसे संकरी जगह पर इसका क्षेत्रीय जलक्षेत्र आता है। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार कोई भी देश अपने तट से 12 समुद्री मील तक क्षेत्रीय जल का दावा कर सकता है। हॉर्मुज स्ट्रेट की सबसे窄 जगह सिर्फ 21 मील चौड़ी है। यानी ओमान और ईरान मिलकर इस रणनीतिक जलमार्ग पर प्रभावी नियंत्रण रख सकते हैं।
ट्रंप ने साफ कहा: “हॉर्मुज स्ट्रेट सबके लिए खुला रहेगा। कोई इसे कंट्रोल नहीं करने जा रहा। ओमान को समझना चाहिए।”
अमेरिका-ओमान संबंधों का लंबा इतिहास
यह धमकी इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि ओमान अमेरिका का पुराना सहयोगी है। दोनों देशों के संबंध 1790 से चले आ रहे हैं। 1833 में दोनों के बीच “Treaty of Amity and Commerce” हुआ था — जो अमेरिका और किसी अरब गल्फ देश के बीच पहला द्विपक्षीय समझौता था।
ओमान ने अतीत में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। लेकिन हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार ओमान और ईरान के बीच टोल वसूली को लेकर गुप्त बातचीत चल रही है, जिससे ट्रंप बेहद नाराज हैं।
सात लाख भारतीयों पर मंडराता खतरा
ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय लोग रहते हैं। ये सब वहां बस रहे हैं और भारत देश की अर्थव्यवस्था, निर्माण, स्वास्थ्य और कारोबार क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं।
अगर अमेरिका-ओमान संबंध बिगड़ते हैं या कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो इन भारतीयों की जान-माल को खतरा हो सकता है। भारत सरकार पहले से ही अपने नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय ने ओमान में रह रहे भारतीयों से सतर्क रहने की सलाह दी है।
हॉर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत
- दुनिया का 20% तेल इसी स्ट्रेट से गुजरता है
- रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल, LNG और अन्य सामान यहां से ट्रांसपोर्ट होता है
- अगर स्ट्रेट बंद रहा तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं
- ईरान इसे अपनी “रणनीतिक ताकत” मानता है
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कोई भी देश अकेले या संयुक्त रूप से इस जलमार्ग पर टोल नहीं वसूल सकता। अमेरिका खुद इसे “फ्री नेविगेशन” सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
ईरान ने ट्रंप के बयान की कड़ी निंदा की है और ओमान के साथ एकजुटता जताई। ओमान की सरकार अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बच रही है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि मस्कट में हड़कंप मचा हुआ है।
खाड़ी के अन्य देश (सऊदी, UAE, कुवैत) चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन गुप्त रूप से अमेरिका के साथ समन्वय कर रहे हैं। चीन और रूस ने ट्रंप की “धमकी भरी भाषा” की आलोचना की है।
भारत के लिए यह स्थिति दोतरफा चुनौती है — एक तरफ ईरान के साथ पुराने संबंध, दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी। विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत शांति और समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है।
क्या हो सकता है आगे?
1. कूटनीतिक प्रयास: ओमान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर सकता है।
2. सैन्य तनाव: अमेरिका अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा सकता है।
3. आर्थिक प्रभाव: तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों पर बोझ।
4. भारतीय समुदाय: बड़े पैमाने पर वापसी या सुरक्षा उपाय।
ट्रंप का यह बयान उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा लगता है, लेकिन इसमें एक पुराने सहयोगी को धमकाने का जोखिम भी शामिल है।
शांति की उम्मीद अभी दूर
हॉर्मुज स्ट्रेट पर यह नया विवाद दिखाता है कि 2026 का ईरान युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है — सिर्फ रूप बदल रहा है। ट्रंप की आक्रामक शैली क्षेत्र को और अस्थिर कर सकती है।
दुनिया को उम्मीद है कि कूटनीति जीतेगी और इस संकरे जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज शांति से अपना सफर जारी रख सकेंगे। क्योंकि हॉर्मुज की अस्थिरता न सिर्फ मध्य पूर्व, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर सकती है।
भारत को इस संकट में संतुलित भूमिका निभानी होगी — अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 29 May2026