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Wednesday, 13 May 2026

उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों का शांतिपूर्ण विद्रोह: सोने पर बढ़े शुल्क और पीएम की अपील के खिलाफ मोमबत्ती मार्च सोना नहीं, रोजगार बचाओ” – देवभूमि में ज्वेलर्स का एकजुट आक्रोश

उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों का शांतिपूर्ण विद्रोह: सोने पर बढ़े शुल्क और पीएम की अपील के खिलाफ मोमबत्ती मार्च सोना नहीं, रोजगार बचाओ” – देवभूमि में ज्वेलर्स का एकजुट आक्रोश
-Friday World-14 May 2016
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरा पर, जहां आस्था और परंपरा सदियों से सोने-चांदी से जुड़ी रही है, वहां सर्राफा व्यापारियों ने एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध का आह्वान किया है। बढ़े हुए आयात शुल्क और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल सोना न खरीदें” वाली अपील के खिलाफ 14 मई को प्रदेशभर में मोमबत्ती जलाकर सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा। राजधानी देहरादून के प्रसिद्ध धामावाला सर्राफा बाजार में शाम 7 बजे व्यापारी एकत्र होकर इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करेंगे।

यह प्रदर्शन न केवल व्यापारियों की पीड़ा को बयां करेगा, बल्कि पूरे ज्वेलरी उद्योग की आर्थिक हकीकत को राष्ट्रीय पटल पर लाएगा। आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं – इसके कारण, प्रभाव, व्यापारियों की मांगें और भविष्य की संभावनाएं।

 पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ा सोने पर शुल्क और क्यों आई अपील?

हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसके साथ ही 5% एग्रीकल्चर इंफ्रा एंड डेवलपमेंट सेस भी लगाया गया, जिससे कुल प्रभावी शुल्क 18% के आसपास पहुंच गया। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी की हालिया अपील के ठीक बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने नागरिकों से अपील की थी कि शादियों, त्योहारों या अन्य अवसरों पर एक साल के लिए सोने की खरीदारी टाल दें।

इस अपील का मुख्य कारण वैश्विक परिस्थितियां बताई जा रही हैं – पश्चिम एशिया (ईरान संबंधी) संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपए पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जरूरत। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश है। वित्तीय वर्ष 2026 में सोने के आयात ने रिकॉर्ड $72 बिलियन का आंकड़ा छू लिया। सरकार का मानना है कि गैर-जरूरी सोने के आयात को कम करके विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है, जो जरूरी आयात (कच्चा तेल, उर्वरक आदि) के लिए इस्तेमाल हो।

लेकिन इस नीति का असर जमीनी स्तर पर सर्राफा व्यापारियों और लाखों जुड़े कामगारों पर पड़ रहा है।

 उत्तराखंड में सर्राफा उद्योग की अहमियत

उत्तराखंड में सर्राफा व्यापार सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल, रुड़की और कोटद्वार जैसे शहरों में सैकड़ों सर्राफा दुकानें हैं। हजारों कारीगर, डिजाइनर, विक्रेता और सप्लाई चेन से जुड़े लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं।

- रोजगार: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार।
- महिलाओं की भागीदारी: ज्वेलरी खरीदारी मुख्य रूप से महिलाओं से जुड़ी है, लेकिन बिक्री, डिजाइन और हैंडक्राफ्ट में भी बड़ी संख्या में महिलाएं सक्रिय हैं।
- पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व: चारधाम यात्रा, कावड़ यात्रा, विवाह सीजन और त्योहारों में सोने-चांदी की मांग बढ़ती है।

व्यापारियों का कहना है कि अचानक शुल्क वृद्धि और अपील से मांग में 30-50% तक की गिरावट आ सकती है। शादी का सीजन करीब है। अगर लोग सोना टाल देंगे तो न केवल दुकानदारों का नुकसान होगा, बल्कि कारीगरों की मजदूरी भी प्रभावित होगी। कई छोटे व्यापारी लॉकडाउन जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं।

 व्यापारियों की चिंताएं और मांगें

उत्तराखंड सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार की चिंताओं का सम्मान करते हैं, लेकिन समाधान मांगते हैं:

1. शुल्क में समीक्षा: अस्थायी बढ़ोतरी को जल्द समाप्त किया जाए।

2. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को मजबूत करना: घरों में पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बेहतर योजनाएं।

3. स्थानीय कारीगरों को संरक्षण: आयात पर निर्भरता कम कर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।

4. राहत पैकेज: छोटे व्यापारियों के लिए लोन, सब्सिडी या टैक्स में छूट।

5. जागरूकता: अपील के बजाय वैकल्पिक निवेश (म्यूचुअल फंड, गोल्ड ETF आदि) को बढ़ावा।

14 मई का प्रदर्शन इन्हीं मांगों को लेकर है। मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना व्यापारियों की परिपक्वता दर्शाता है। वे हिंसा या बंद का रास्ता नहीं चुन रहे, बल्कि संवाद चाहते हैं।

राष्ट्रीय परिदृश्य: अन्य राज्यों में भी विरोध

उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत कई जगहों पर ज्वेलर्स पहले ही प्रदर्शन कर चुके हैं। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि मांग कम होने से पूरे उद्योग पर असर पड़ेगा। ज्वेलरी शेयरों में गिरावट देखी गई – टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स आदि कंपनियों के शेयर प्रभावित हुए।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अपील का उल्टा असर भी हुआ। कई लोग कीमत बढ़ने से पहले सोना खरीद रहे हैं, जिससे शॉर्ट टर्म में मांग बढ़ी है। लेकिन लंबे समय में नुकसान तय है।

 सोने का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

भारत में सोना सिर्फ धातु नहीं, बल्कि भावनाओं का प्रतीक है। विवाह में “कन्यादान” के साथ सोना, त्योहारों पर गिफ्टिंग, निवेश के रूप में सुरक्षा – ये सब गहरे जुड़े हैं। अचानक रोक या महंगा करना लाखों परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।

दूसरी ओर, आर्थिक तर्क भी मजबूत है। भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार को संभालना जरूरी है। सवाल यह है – क्या मांग दबाने के बजाय सप्लाई साइड सुधार (रिकवरी, रिसाइक्लिंग, घरेलू खनन) बेहतर विकल्प नहीं हो सकता?

 उत्तराखंड सरकार की भूमिका

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार से व्यापारियों को उम्मीद है कि वे केंद्र के साथ बातचीत करेंगे। उत्तराखंड पर्यटन और छोटे उद्योगों पर निर्भर राज्य है। यहां ज्वेलरी सेक्टर को मजबूत रखना रोजगार सृजन के लिए जरूरी है।

 आगे का रास्ता: संतुलित समाधान की जरूरत

- व्यापारियों के लिए: डिजिटल मार्केटिंग, नए डिजाइन, सिल्वर और डायमंड ज्वेलरी पर फोकस, गोल्ड ETF को प्रमोट करना।
- सरकार के लिए: नीति में लचीलापन, स्कीम्स को प्रभावी बनाना, कारीगरों का कौशल विकास।
- उपभोक्ताओं के लिए: जिम्मेदार खरीदारी – जरूरत के अनुसार, रिसाइकल्ड गोल्ड चुनना।

14 मई का मोमबत्ती प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम है। देवभूमि के शांत स्वभाव वाले व्यापारी उम्मीद करते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी।

निष्कर्ष: अर्थव्यवस्था और आस्था का सामंजस्य

सोना भारत की आत्मा है। इसे बचाने की अपील सही हो सकती है, लेकिन अचानक और बिना तैयारी के लागू करने से छोटे उद्योग प्रभावित होते हैं। उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारी विकास की राह पर चलते हुए भी अपनी परंपराओं और रोजगार की रक्षा चाहते हैं।

14 मई को धामावाला बाजार में जलने वाली मोमबत्तियां न सिर्फ अंधेरे को दूर करेंगी, बल्कि नीति निर्माताओं को सोचने पर मजबूर करेंगी। “सोना नहीं, रोजगार बचाओ” का नारा पूरे देश के ज्वेलर्स की आवाज बन रहा है।

देवभूमि की इस मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिले, यही कामना है। आर्थिक मजबूती और सांस्कृतिक गरिमा – दोनों साथ चलें, तभी भारत सही मायने में विकसित होगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-14 May 2016