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Friday, 15 May 2026

खाड़ी सहयोग परिषद की एकजुटता की परीक्षा: यूएई के संयुक्त हमले के आह्वान को ठुकराते हुए सऊदी अरब और अन्य देशों ने शांति का रास्ता चुना

खाड़ी सहयोग परिषद की एकजुटता की परीक्षा: यूएई के संयुक्त हमले के आह्वान को ठुकराते हुए सऊदी अरब और अन्य देशों ने शांति का रास्ता चुना
-Friday World-16 May 2026
मध्य पूर्व के जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान के हमलों के जवाब में फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के देशों को संयुक्त सैन्य कार्रवाई के लिए एकजुट करने का प्रयास किया, लेकिन सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) सदस्यों ने इसे ठुकरा दिया। इसके बजाय उन्होंने तनाव कम करने, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का विकल्प चुना। यह घटनाक्रम न केवल GCC देशों के बीच आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध की आशंका को भी कम करता है।

यह फैसला अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ अभियान के बीच आया है, जब क्षेत्र पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में था। Bloomberg की रिपोर्ट के हवाले से पता चलता है कि यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) ने पड़ोसी नेताओं से संपर्क साधा, लेकिन रियाद और दोहा ने इसे बढ़ावा देने वाली नीति माना और अलग रणनीति अपनाई।

पृष्ठभूमि: ईरान के साथ बढ़ते तनाव

2026 की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी के बाद क्षेत्रीय गतिविधियां तेज हो गईं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें यूएई, सऊदी अरब, कतर और अन्य शामिल थे। इन हमलों में ऊर्जा सुविधाएं, हवाई अड्डे और नागरिक बुनियादी ढांचा प्रभावित हुए।

यूएई ने इन हमलों को “आतंकवादी” करार दिया और क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वित जवाबी कार्रवाई की अपील की। यूएई का मानना था कि सामूहिक deterrence ईरान को आगे के हमलों से रोकेगा। हालांकि, खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया एकरूप नहीं रही।

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि वह अपनी रक्षा और deterrence पर ध्यान केंद्रित रखेगा, लेकिन अमेरिका-इजरायल अभियान से अलग रहेगा। रियाद ने यूएई की स्थिति को “escalatory” माना। कतर और अन्य देशों ने भी शांति और संवाद पर जोर दिया। GCC देशों ने संयुक्त बयानों में ईरान की निंदा की, लेकिन बड़े युद्ध में कूदने से परहेज किया।

क्यों ठुकराया संयुक्त हमला? रणनीतिक और आर्थिक कारण

खाड़ी देशों के इस फैसले के कई गहरे कारण हैं:

1. आर्थिक स्थिरता की प्राथमिकता: खाड़ी अर्थव्यवस्थाएं तेल और गैस पर निर्भर हैं। पूर्ण युद्ध की स्थिति में हार्मुज की खाड़ी बंद हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्त-व्यस्त हो जाएगा। सऊदी अरब जैसे देश Vision 2030 जैसे विकास कार्यक्रम चला रहे हैं, जो युद्ध से प्रभावित होंगे।

2. क्षेत्रीय स्थिरता: GCC देश ईरान के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रखते हैं, लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध से बचना चाहते हैं। ओमान और कतर जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभाते रहे हैं।

3. आंतरिक मतभेद: यूएई की आक्रामक नीति सऊदी अरब से अलग है। दोनों देशों के बीच ओपेक+ जैसे मुद्दों पर पहले से तनाव है। सऊदी अरब बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहता है और एकतरफा escalation से बचना चाहता है।

4. कूटनीतिक विकल्प: खाड़ी देश BRICS, चीन और अन्य शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। पूर्ण युद्ध अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ा सकता है, जो सभी को पसंद नहीं।

GCC की एकजुटता vs विविधता

यह घटना GCC की एकजुटता की परीक्षा है। 1981 में स्थापित GCC का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और आर्थिक सहयोग है, लेकिन ईरान मुद्दे पर मतभेद उभर आए हैं। 

- यूएए : अधिक आक्रामक, इजरायल और अमेरिका के करीब।

- सऊदी अरब: सतर्क, deterrence पर फोकस।

- कतर: संवाद और मध्यस्थता का समर्थक।

- ओमान और कुवैत: तटस्थता और शांति के पक्षधर।

फिर भी, GCC देशों ने ईरान के हमलों की संयुक्त निंदा की और आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित रखा है। यह दिखाता है कि मतभेद होते हुए भी वे एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

इस फैसले का क्षेत्र पर गहरा असर पड़ेगा:

- ईरान के लिए राहत: संयुक्त हमले न होने से ईरान को सांस मिली, हालांकि वह अलग-अलग हमलों का सामना कर रहा है।

- अमेरिका-इजरायल: उनके अभियान में खाड़ी समर्थन सीमित रहा, जिससे उनकी रणनीति प्रभावित हुई।

- वैश्विक अर्थव्यवस्था: तेल की कीमतें स्थिर रहीं, जो विश्व बाजार के लिए अच्छा संकेत है।

- चीन और रूस: ये देश खाड़ी देशों की कूटनीति का समर्थन कर सकते हैं, क्योंकि वे स्थिरता चाहते हैं।

भविष्य की संभावनाए.

यह घटनाक्रम दिखाता है कि खाड़ी देश परिपक्व कूटनीति अपना रहे हैं। वे ईरान के साथ संवाद के रास्ते खुले रखना चाहते हैं, जबकि अपनी सुरक्षा मजबूत कर रहे हैं। भविष्य में GCC की भूमिका मध्यस्थ की हो सकती है।

हालांकि, अगर ईरान के हमले जारी रहे तो स्थिति बदल सकती है। सऊदी अरब जैसे देशों ने चेतावनी दी है कि उनकी संयम की सीमा है।

शांति की जीत

खाड़ी देशों द्वारा यूएई के संयुक्त हमले के आह्वान को ठुकराना क्षेत्रीय बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। उन्होंने युद्ध की आग को और भड़काने के बजाय बातचीत और de-escalation का रास्ता चुना। यह फैसला न केवल लाखों जानों को बचाएगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को भी सुरक्षित रखेगा।

मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शांति स्थापित करना आसान नहीं, लेकिन GCC देशों का यह कदम उम्मीद की किरण है। भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग बढ़े, ताकि विवाद संवाद के माध्यम से सुलझाए जा सकें।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-16 May 2026