-Friday World-16 May 2026
नई दिल्ली/अबू धाबी, 16 मई 2026: मध्य पूर्व के उथल-पुथल भरे माहौल में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, पेट्रोलियम भंडारण और बुनियादी ढांचे पर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले गई, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुई।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ऐतिहासिक फ्रेमवर्क
प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (एमबीजेड) की मुलाकात में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि **स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप** का फ्रेमवर्क समझौता रहा। इस समझौते के तहत दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकी, नवाचार, प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सुरक्षित संचार और सूचना आदान-प्रदान को गहराई देने पर सहमत हुए।
यह साझेदारी भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और यूएई की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन यूएई’ पहल को जोड़ती है। दोनों देश संयुक्त रूप से ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, रडार और साइबर सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि दोनों देशों की रक्षा निर्यात क्षमता को भी बढ़ावा देगा।
ऊर्जा सुरक्षा में ऐतिहासिक मजबूती
ईरान संकट के कारण हार्मुज की खाड़ी में उत्पन्न अनिश्चितता के बीच ऊर्जा समझौते विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व पर समझौते पर हस्ताक्षर किए। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (ISPRL) में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल भंडारित करेगी। आपात स्थिति में भारत को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति मिलेगी।
इसके अलावा, लंबी अवधि के लिए **एलपीजी (रसोई गैस)** आपूर्ति समझौता भी हुआ, जो आम भारतीय परिवारों की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर रखने में मदद करेगा। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ये समझौते द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा देंगे।
हार्मुज से परे तेल निर्यात: यूएई की रणनीतिक चाल
यूएई इस समय हार्मुज की खाड़ी से परे तेल निर्यात क्षमता को दोगुना करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद के निर्देश पर ADNOC फुजैरा पोर्ट तक दूसरी वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन का निर्माण तेज कर रहा है। 2027 तक यह परियोजना पूरी होने पर यूएई की हार्मुज-बाईपास निर्यात क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
यह विकास भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत यूएई से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। फुजैरा पोर्ट भारतीय महासागर की तरफ स्थित है, जिससे आपूर्ति मार्ग छोटे और सुरक्षित हो जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि हार्मुज को खुला, सुरक्षित और मुक्त रखना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
$5 बिलियन निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट
यूएई ने भारत में **5 अरब डॉलर** (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, आरबीएल बैंक, समान कैपिटल और अन्य क्षेत्रों में होगा। इसके अलावा, गुजरात के वडिनार में **शिप रिपेयर क्लस्टर** स्थापित करने पर भी समझौता हुआ, जो भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
क्षेत्रीय संदर्भ: ईरान संकट और अवसर
यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव चरम पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों की निंदा की और कहा, “भारत यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।” उन्होंने यूएई में रह रहे 35 लाख भारतीय समुदाय की सुरक्षा की सराहना भी की।
यूएई ने हाल ही में ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया है, जो स्वतंत्र ऊर्जा नीति की ओर उसके झुकाव को दर्शाता है। भारत और यूएई दोनों ही स्थिरता, संवाद और आर्थिक विकास पर जोर दे रहे हैं।
दोनों देशों के बीच संबंधों का स्वर्णिम इतिहास
भारत और यूएई के संबंध सदियों पुराने हैं। 2010 के बाद से ये संबंध Comprehensive Strategic Partnership में बदल गए। द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 85 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। यूएई भारत का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड निवेशक है, जबकि भारत यूएई का प्रमुख निर्यात गंतव्य।
रक्षा, ऊर्जा और अर्थव्यवस्था – त्रिकोणीय मजबूती
ये नए समझौते तीन प्रमुख स्तंभों पर टिके हैं:
1. रक्षा: संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
2. ऊर्जा: दीर्घकालिक आपूर्ति और भंडारण सुरक्षा।
3. आर्थिक*l: निवेश, बुनियादी ढांचा और व्यापार विस्तार।
भारत के लिए लाभ
- ऊर्जा सुरक्षा में मजबूती, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति।
- रोजगार सृजन और तकनीकी विकास।
- विविध आपूर्ति स्रोतों से निर्भरता कम होना।
यूएई के लिए लाभ
- भारत जैसे विशाल बाजार में स्थिर निर्यात।
- रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नया सहयोगी।
- क्षेत्रीय सुरक्षा में साझेदार।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में दोनों देशों का व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर जाएगा। ब्रिक्स, आई2यू2 जैसे मंचों पर भी सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश अफ्रीका और एशिया में संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं।
विश्वसनीय साझेदारी की मिसाल
प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ने साबित कर दिया कि चुनौतियों के समय में भी बुद्धिमत्तापूर्ण कूटनीति अवसर पैदा कर सकती है। रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में हुए ये समझौते न केवल दोनों देशों के हितों की रक्षा करेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि का संदेश देंगे।
भारत-यूएई साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक, सुरक्षा और भावनात्मक स्तर पर गहरी हो चुकी है। यह साझेदारी 21वीं सदी की सबसे सफल मॉडलों में से एक बनकर उभर रही है – जहां विविध संस्कृतियां, साझा हित और भविष्य की दूरदृष्टि एक साथ चलती हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-16 May 2026