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Thursday, 14 May 2026

रूस से ऑयल खरीदी मे ओर ज्यादा छूट बढाए वाशिंगटन से विश्व गुरु भारत की अपील!!

रूस से ऑयल खरीदी मे ओर ज्यादा छूट बढाए वाशिंगटन से विश्व गुरु भारत की अपील!!
-Friday World-14 May 2026
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, ईरान संकट और हॉर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के बीच भारत ने अमेरिका से एक महत्वपूर्ण अपील की है। भारत सरकार ने वॉशिंगटन से रूस से तेल खरीद के लिए दी गई छूट (वेवर) को 16 मई 2026 के बाद बढ़ाने की मांग की है। यह छूट समाप्त होने वाली है और इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा आम जनता की जेब पर पड़ सकता है। 

विश्व की सबसे बड़ी आबादी (लगभग 150 करोड़) वाले और खुद को ‘विश्व गुरु’ कहने वाले भारत के लिए यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौती भी है।

 संकट की पृष्ठभूमि: हॉर्मुज का खतरा और वैश्विक तेल बाजार

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान-इजराइल संबंधित तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का करीब 20-25% तेल परिवहन करता है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85-90% आयात करता है, जिसमें मध्य पूर्व से आने वाला हिस्सा बहुत बड़ा है। किसी भी व्यवधान से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।

ऐसे में रूसी तेल भारत के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हो रहा है। रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड तेल घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर दबाव बनाया था, लेकिन ईरान संकट ने स्थिति बदल दी। अमेरिका ने खुद मार्च 2026 में अस्थायी वेवर जारी किया, जिसे बाद में मई 2026 तक बढ़ाया गया। अब भारत इसकी आगे बढ़ोतरी चाहता है।

 भारत की अपील: 150 करोड़ जनता और अर्थव्यवस्था का हवाला

भारत ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि तेल बाजार में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर पड़ेगा। पेट्रोलियम मंत्री और विदेश मंत्रालय के स्तर पर यह बात उठाई गई है। भारत तर्क दे रहा है कि वैश्विक आपूर्ति संकट के समय रूसी तेल की निरंतर उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। 

भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही मई में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल खरीद रही हैं। Kpler डेटा के अनुसार, मई में एक समय पर दैनिक 23 लाख बैरल की आयात हुआ, जबकि पूरे महीने का औसत 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। यह मार्च के रिकॉर्ड (2.25 मिलियन bpd) के करीब है, जब रूसी तेल का हिस्सा कुल आयात का 50% तक पहुंच गया था।

 रूस की गारंटी: लावरोव का आश्वासन

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत को पूरा भरोसा दिलाया है। लावरोव ने कहा कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों का पूरा ध्यान रखेगा। हाइड्रोकार्बन, गैस, तेल की आपूर्ति निरंतर बनी रहेगी। कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स में सहयोग भी जारी रहेगा।

लावरोव ने स्पष्ट कहा, “भारत के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। हम अनुचित प्रतिस्पर्धा को हमारे समझौतों को प्रभावित नहीं होने देंगे।” यह आश्वासन भारत-रूस की ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ को रेखांकित करता है।

आंकड़ों की भाषा: रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

- मई 2026: रिकॉर्ड आयात, 19-23 लाख बैरल/दिन।

- मार्च 2026: 2.25 मिलियन bpd, कुल आयात का 50%।

- रूस ने भारत को सस्ता तेल देकर रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ाने और घरेलू कीमतें नियंत्रित रखने में मदद की है।

- 2024 में भारत ने रूस से कुल 67 बिलियन डॉलर का आयात किया, जिसमें ज्यादातर ऊर्जा से संबंधित था।

रूस अब भारत का टॉप ऑयल सप्लायर है, जबकि मध्य पूर्व से आयात प्रभावित होने से रूसी हिस्सा बढ़ा है।

 क्यों है यह भारत के लिए महत्वपूर्ण?

1. ऊर्जा सुरक्षा: 90% आयात पर निर्भर भारत को वैकल्पिक स्रोत चाहिए। रूसी तेल विश्वसनीय और सस्ता है।

2. महंगाई नियंत्रण: तेल कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें प्रभावित होती हैं। आम आदमी पर बोझ बढ़ता है।

3. आर्थिक विकास: सस्ता ऊर्जा स्रोत उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाता है। Atmanirbhar भारत और विकास लक्ष्यों के लिए जरूरी।

4. कूटनीतिक स्वायत्तता: भारत बहुपक्षीय नीति अपनाता है। रूस, अमेरिका, मध्य पूर्व – सभी के साथ संतुलन बनाए रखना।

5. BRICS और बहुपक्षीयता: BRICS में भारत-रूस सहयोग नई विश्व व्यवस्था का हिस्सा है।

चुनौतियां और भविष्य की दिशा

अमेरिका की ओर से वेवर न बढ़ाए जाने पर भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल कम कर सकती हैं, जिससे महंगे विकल्पों पर निर्भरता बढ़ेगी। हालांकि, भारत विविधीकरण की रणनीति पर काम कर रहा है – अमेरिका, ब्राजील, अफ्रीका आदि से आयात बढ़ाना।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज पूरी तरह प्रभावित हुआ तो वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। भारत के लिए यह आयात बिल में हजारों करोड़ का अतिरिक्त बोझ होगा।

: संप्रभु निर्णय और राष्ट्रीय हित

भारत की यह अपील सिर्फ तेल की छूट की नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों और 150 करोड़ नागरिकों के हितों की रक्षा की है। रूस जैसा विश्वसनीय साथी होने से भारत की स्थिति मजबूत है। 

भारत को चाहिए कि वह दीर्घकालिक रणनीति बनाए – घरेलू उत्पादन बढ़ाना (ओएनजीसी, रिलायंस आदि), नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा, और रणनीतिक भंडारण क्षमता मजबूत करना। 

विश्व गुरु भारत संकट के समय अपनी आवाज बुलंद रख रहा है। रूस से सस्ता तेल न सिर्फ आर्थिक जरूरत है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास की नींव भी। 16 मई के बाद क्या फैसला होता है, यह न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति को भी प्रभावित करेगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-14 May 2026