Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Tuesday, 12 May 2026

ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान पर दोबारा बड़े हमले की तैयारी? संघर्ष विराम 'लाइफ सपोर्ट' पर, CNN ने खोला राज।

ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान पर दोबारा बड़े हमले की तैयारी? संघर्ष विराम 'लाइफ सपोर्ट' पर, CNN ने खोला राज।-Friday World-12May 2026

वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नवीनतम शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” और “बेवकूफी भरा” बताते हुए खारिज कर दिया है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अब ट्रंप प्रशासन ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। एक महीने पुराना संघर्ष विराम फिलहाल “लाइफ सपोर्ट” पर टिका हुआ है और किसी भी वक्त टूट सकता है।

यह घटनाक्रम मध्य पूर्व को फिर से अस्थिरता की आग में झोंक सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ेगा।

 CNN रिपोर्ट का पूरा खुलासा
सीएनएन ने उच्चस्तरीय सूत्रों के हवाले से खबर दी कि ट्रंप ने ईरान के जवाब को “गरbage” (कचरा) करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से भेजा गया प्रस्ताव अमेरिकी मांगों — खासकर परमाणु कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय स्थिरता — को बिल्कुल पूरा नहीं करता। 

ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी: “संघर्ष विराम फिलहाल जीवन रेखा (lifeline) पर लटका है… यह बेहद कमजोर है।” सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस में हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पेंटागन के कुछ अधिकारी अधिक आक्रामक रुख अपनाने की वकालत कर रहे हैं। इन विकल्पों में ईरान की सैन्य सुविधाओं, परमाणु स्थलों और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े ठिकानों पर नए हमले शामिल हैं।

ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह “खेल” खेल रहा है और अमेरिका के साथ 50 साल से ऐसा कर रहा है। अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।

पृष्ठभूमि: कैसे पहुंचा मामला इस मोड़ पर
अप्रैल 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू हुआ था, जिसमें इजराइल भी शामिल था। होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमले, मिसाइलों की बौछार और आर्थिक नुकसान के बाद दोनों पक्षों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में संघर्ष विराम की घोषणा की। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद वार्ता शुरू हुई।

लेकिन मई 2026 में बातचीत ठप हो गई। ईरान ने अमेरिकी 14-पॉइंट प्रस्ताव का जवाब दिया, जिसमें संप्रभुता, प्रतिबंध हटाने और मुआवजे की मांगें शामिल थीं। ट्रंप ने इसे “टोटली अनएक्सेप्टेबल” बताते हुए फौरन खारिज कर दिया।

CNN के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब दो रास्तों पर विचार कर रहा है:
- कूटनीतिक दबाव बढ़ाना (चीन और अन्य देशों के जरिए)।
- सैन्य विकल्पों को फिर से सक्रिय करना।

 ट्रंप की रणनीति: “मैक्सिमम प्रेशर” 2.0
ट्रंप ने पहले भी “मैक्सिमम प्रेशर” नीति अपनाई थी। उनके अनुसार, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देने का संकल्प अटल है। उन्होंने कहा, “ईरान परमाणु बम नहीं बना सकता… और यह नहीं बनेगा।”

पेंटागन के अंदर कुछ अधिकारी मानते हैं कि सीजफायर के दौरान ईरान ने अपने अंडरग्राउंड मिसाइल बेस और सैन्य सुविधाएं मजबूत की हैं। इसलिए अब “डिसाइसिव एक्शन” की जरूरत है। वहीं, कुछ सलाहकार कूटनीति पर जोर दे रहे हैं क्योंकि नया युद्ध महंगा और राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है।

 क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
तेल बाजार पर असर: होर्मुज स्ट्रेट (दुनिया के 20% तेल का रास्ता) फिर से अशांत होने की आशंका है। इससे कच्चे तेल की कीमतें $100-120 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। भारत जैसे आयातक देशों पर भारी बोझ पड़ेगा।

भारत के लिए चुनौती: भारत रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन मध्य पूर्व अस्थिरता से सप्लाई चेन प्रभावित होगी। रुपये पर दबाव, मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार पर असर संभव है।

पाकिस्तान की भूमिका: हाल ही में CBS रिपोर्ट में नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमानों का जिक्र हुआ, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया। यह दिखाता है कि क्षेत्रीय देश मध्यस्थता के साथ-साथ अपनी सुरक्षा भी देख रहे हैं।

ईरान की स्थिति: ईरान की अर्थव्यवस्था युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुई है — लाखों नौकरियां चली गईं, मुद्रास्फीति बढ़ी। लेकिन तेहरान ने साफ कहा है कि वह संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

 विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि यह “चिकन गेम” (दूसरे के झुकने का इंतजार) का नया दौर है। ट्रंप घरेलू राजनीति में भी मजबूत दिखना चाहते हैं, जबकि ईरान आंतरिक दबाव और क्षेत्रीय सहयोगियों (रूस, चीन) के भरोसे है।

कुछ विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि नया युद्ध पूरे मध्य पूर्व को जला सकता है — लेबनान, यमन, इराक सब प्रभावित होंगे। दूसरी तरफ, कुछ का मानना है कि ट्रंप का यह रुख ईरान को बेहतर समझौते के लिए मजबूर करेगा।

 संभावित परिदृश्य
1. कूटनीतिक सफलता:चीन या अन्य देशों की मध्यस्थता से नया समझौता।

2. सीमित हमले: ईरान की चुनिंदा सैन्य सुविधाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक्स।

3. पूर्ण संघर्ष: बड़े पैमाने पर युद्ध, जो वैश्विक मंदी का कारण बन सकता है।

ट्रंप ने कहा है कि वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

निष्कर्ष: शांति या आग?
ट्रंप का ईरान पर दोबारा हमले का विचार गंभीर है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। CNN रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि संघर्ष विराम टूटने के कगार पर है। दुनिया अब ट्रंप के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

क्या कूटनीति जीतेगी या बंदूकें बोलेंगी? मध्य पूर्व की किस्मत इन दिनों व्हाइट हाउस के फैसलों पर टिकी हुई है। भारत समेत पूरी दुनिया को उम्मीद है कि तनाव कम होगा और क्षेत्र में स्थायी शांति कायम होगी, क्योंकि युद्ध किसी का भी भला नहीं करता।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-12May 2026