Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Tuesday, 12 May 2026

इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज किए: कफर दूनिन में नरसंहार, पानी की सप्लाई बंद, गोलानी ब्रिगेड के 8 सैनिक घायल

इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज किए: कफर दूनिन में नरसंहार, पानी की सप्लाई बंद, गोलानी ब्रिगेड के 8 सैनिक घायल-Friday World-12May 2026
बेरूत/तेल अवीव। मंगलवार सुबह इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियानों को और तेज कर दिया। इस अभियान की शुरुआत कफर दूनिन गांव में एक घातक हमले से हुई, जिसमें कम से कम चार लोग मारे गए। इसके अलावा इजरायली सैनिकों ने दैरे मिमास के पास घुसपैठ कर मुख्य जल पंपिंग स्टेशन को उड़ा दिया, जिससे पूरे इलाके में पीने के पानी की आपूर्ति ठप हो गई। इजरायली मीडिया चैनल 14 ने स्वीकार किया कि गोलानी ब्रिगेड के आठ सैनिक ज़ौतर अल-शरकिया क्षेत्र में लेबनानी प्रतिरोध के साथ झड़प में घायल हुए।

यह घटनाक्रम अमेरिका-ब्रोकरेड संघर्ष विराम के उल्लंघन का नया उदाहरण है और क्षेत्र में तनाव को नया मोड़ दे रहा है।

 घटना का विस्तृत विवरण
लेबनानी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आज तड़के इजरायली बलों ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर हमले तेज कर दिए। सबसे पहले कफर दूनिन (Bint Jbeil जिले) में एक आवासीय इलाके पर हमला हुआ, जिसमें चार नागरिकों की मौत हो गई। कुछ रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या छह बताई जा रही है।

इसके कुछ घंटों बाद इजरायली सैनिकों की एक यूनिट ने दैरे मिमास (Deir Mimas) गांव के पास घुसपैठ की। यह गांव लितानी नदी के किनारे स्थित है। सैनिकों ने रात के अंधेरे में मुख्य सोलर-पावर्ड जल पंपिंग स्टेशन को विस्फोटकों से उड़ा दिया। यह स्टेशन पूरे समुदाय को पीने का पानी सप्लाई करता था। विस्फोट से स्टेशन पूरी तरह तबाह हो गया और आसपास के इलाके में पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई।

लेबनानी अधिकारियों ने इसे “नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमला” बताया। इससे हजारों लोगों को पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, खासकर गर्मियों के मौसम में।

 गोलानी ब्रिगेड पर हमला
इजरायली पक्ष से आई रिपोर्ट में भी नुकसान स्वीकार किया गया। हिब्रू चैनल 14 ने बताया कि गोलानी ब्रिगेड (IDF की elite इन्फैंट्री यूनिट) के आठ सैनिक ज़ौतर अल-शरकिया (Zoutar al-Sharqiya) के बाहरी इलाके में नदी के पास लेबनानी प्रतिरोध (Hezbollah) के साथ तीन अलग-अलग झड़पों में घायल हो गए।

यह घटना दर्शाती है कि लेबनानी प्रतिरोध अभी भी सक्रिय है और इजरायली घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। गोलानी ब्रिगेड को इजरायल की सबसे अनुभवी और आक्रामक यूनिटों में से एक माना जाता है, जो पहले गाजा और अब लेबनान में प्रमुख भूमिका निभा रही है।

पृष्ठभूमि: संघर्ष विराम का नाजुक संतुलन
अप्रैल 2026 में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और Hezbollah के बीच संघर्ष विराम हुआ था। लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। इजरायल का कहना है कि वह Hezbollah की सैन्य मौजूदगी और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है, जबकि लेबनान इसे “नागरिक इलाकों पर अत्याचार” बता रहा है।

दैरे मिमास और कफर दूनिन जैसे गांव लितानी नदी के पास स्थित हैं, जो इजरायल के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इजरायल लितानी नदी तक “बफर जोन” बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि लेबनान अपनी संप्रभुता की रक्षा पर जोर दे रहा है।

मानवीय संकट गहराता जा रहा है
- पानी का संकट: दैरे मिमास में पानी की सप्लाई बंद होने से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोग बोतलबंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- नागरिक मौतें: कफर दूनिन हमले में मारे गए लोग आम नागरिक बताए जा रहे हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
- **घरों का नुकसान**: इजरायली अभियान में कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन इन हमलों की निंदा कर रहे हैं और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।

दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं
लेबनान/Hezbollah पक्ष:
- Hezbollah नेता ने चेतावनी दी है कि इजरायली घुसपैठ को “नर्क” बना दिया जाएगा।
- लेबनानी सरकार ने UN Security Council में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की है।
- स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और मदद की अपील कर रहे हैं।

इजरायल पक्ष:
- IDF का कहना है कि अभियान Hezbollah के ठिकानों और हथियारों के खिलाफ है।
- वे दावा करते हैं कि लेबनानी प्रतिरोध पहले हमला कर रहा है।
- गोलानी ब्रिगेड के घायल सैनिकों का इलाज चल रहा है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
यह ताजा escalation अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप प्रशासन की नीतियों से जुड़ा दिखता है। दक्षिणी लेबनान में अस्थिरता पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर सकती है:

- तेल कीमतें बढ़ने की आशंका।

- शरणार्थी संकट फिर से उभर सकता है।

- भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष संयम नहीं बरतेंगे तो पूर्ण युद्ध छिड़ सकता है, जो 2023-2024 के युद्ध से भी ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ
दक्षिणी लेबनान लंबे समय से इजरायल-Hezbollah संघर्ष का केंद्र रहा है। 2006 के युद्ध, 2024-25 के हालिया टकराव और अब 2026 का यह दौर — हर बार नागरिकों की सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। पानी, बिजली और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे पर हमले युद्ध के नियमों का उल्लंघन माने जाते हैं।

 निष्कर्ष: शांति की उम्मीद या नया युद्ध?
आज की घटनाएं दिखाती हैं कि संघर्ष विराम बेहद नाजुक है। कफर दूनिन में नरसंहार, दैरे मिमास में पानी की सप्लाई बंद करना और गोलानी ब्रिगेड का सामना — ये सभी घटनाएं क्षेत्र को फिर से हिंसा की आग में धकेल रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका, UN और प्रमुख देशों को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। लेबनानी नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित की जाएं। दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाकर स्थायी समाधान ढूंढना होगा।

मध्य पूर्व पहले ही कई मोर्चों पर तनावपूर्ण है। दक्षिणी लेबनान में शांति कायम होना पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है। दुनिया अब देख रही है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति शांत होती है या और बिगड़ती है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-12May 2026