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Sunday, 10 May 2026

कerala Congress में CM पद की जंग: भारी जीत के बावजूद आग बबूला! राहुल गाँधी नाराज, तीन दिग्गज ‘अटल’

कerala Congress में CM पद की जंग: भारी जीत के बावजूद आग बबूला! राहुल गाँधी नाराज, तीन दिग्गज ‘अटल’-Friday World-10 May 2026

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हुए एक सप्ताह बीत गया, लेकिन केरल में अभी भी मुख्य मंत्री का चेहरा तय नहीं हो सका है। कांग्रेस-led UDF ने दस साल बाद सत्ता में वापसी की है, भारी-भरकम बहुमत हासिल किया है, फिर भी पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी ने पूरे विजय समारोह की चमक फीकी कर दी है। तीन दिग्गज नेता — वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्नीथला— CM पद के लिए जिद पर अड़े हुए हैं। हाईकमान की मेराथन बैठक के बावजूद कोई हल नहीं निकला। राहुल गांधी इस खुली जंग से भड़क उठे हैं।

 UDF की ऐतिहासिक जीत और CM पद का संकट

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। कांग्रेस अकेले 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। LDF बुरी तरह हार गया। यह जीत कांग्रेस के लिए पूरे देश में राहत की खबर थी, लेकिन जीत के जश्न से पहले ही पार्टी में CM पद को लेकर घमासान शुरू हो गया।

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर शनिवार को तीन घंटे से ज्यादा चली अहम बैठक में तीनों दावेदारों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के अनुसार, तीनों नेता अपने-अपने दावे पर अडिग रहे। हाईकमान को बस इतनी राहत मिली कि तीनों ने अपने समर्थकों को सड़क पर प्रदर्शन न करने और फ्लेक्स-बैनर हटाने की अपील करने पर सहमति जताई।

 तीन दावेदार, तीन दावे — कौन बनेगा CM?

1. वी.डी. सतीशन (V.D. Satheesan)
वर्तमान विपक्ष के नेता। पिछले पाँच साल से कांग्रेस का चेहरा रहे सतीशन को कार्यकर्ताओं और UDF सहयोगी दलों का खास समर्थन हासिल है। उन्होंने विपक्ष में रहते हुए Pinarayi Vijayan सरकार पर जमकर हमले किए। सतीशन का कहना है कि जनता का मूड और सहयोगी दलों का समर्थन उन्हें CM पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनाता है। उन्होंने हाईकमान को साफ चेतावनी दी है कि अगर उन्हें CM नहीं बनाया गया तो कोई भी पद स्वीकार नहीं करेंगे।

2. के.सी. वेणुगोपाल (K.C. Venugopal)
AICC महासचिव और केंद्र में कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा। वेणुगोपाल दावा करते हैं कि CLP (Congress Legislative Party) में उनके पास 63 में से 40 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है। हाईकमान से उनके करीबी संबंध उन्हें मजबूत स्थिति में रखते हैं। कार्यकर्ता स्तर पर उनकी लोकप्रियता सतीशन जितनी नहीं मानी जाती, लेकिन संगठनात्मक ताकत उनके पक्ष में है।

3. रमेश चेन्नीथला (Ramesh Chennithala)
वरिष्ठ नेता और पूर्व विपक्ष के नेता। चेन्नीथला वरिष्ठता का हवाला देते हुए CM पद का दावा पेश कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी में लंबे समय तक सेवा की है। हालांकि, हाल के वर्षों में उनकी सक्रियता थोड़ी कम रही, लेकिन उनका अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।

 राहुल गांधी का गुस्सा: “जीत की चमक फीकी पड़ गई”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने तीनों नेताओं से साफ कहा कि भारी जनादेश मिलने के बावजूद खुलेआम जंग छेड़ना और दबाव बनाना पार्टी की छवि के लिए घातक है। राहुल ने कहा कि UDF की शानदार जीत की चमक इस आंतरिक कलह से धुंधली पड़ रही है।

राहुल गांधी चाहते हैं कि केरल में स्थिर और मजबूत सरकार बने, जिसमें गुटबाजी की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने हाईकमान से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द फैसला लिया जाए ताकि नई सरकार का गठन बिना देरी के हो सके।

 आंतरिक गुटबाजी की पुरानी बीमारी

केरल कांग्रेस में गुटबाजी नई नहीं है। IKK, AICC और विभिन्न क्षेत्रीय गुट लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। इस बार चुनावी जीत के बाद यह गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। पूरे राज्य में फ्लेक्स बोर्ड लगे, पोस्टर चिपकाए गए और सोशल मीडिया पर समर्थक एक-दूसरे पर हमले कर रहे थे।

हाईकमान ने तीनों नेताओं से अपील की कि वे अपने समर्थकों को नियंत्रित करें। सतीशन ने अपने कार्यकर्ताओं से राज्यभर के बैनर हटाने को कहा। लेकिन यह शांति अस्थायी लग रही है। अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो फिर से तनाव बढ़ सकता है।

 केरल की राजनीति पर असर

यह संकट सिर्फ CM पद तक सीमित नहीं है। केरल में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद विकास कार्यों, उद्योग नीति, स्वास्थ्य, शिक्षा और खासकर सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। अगर आंतरिक कलह जारी रही तो सरकार की छवि पहले ही खराब हो सकती है।

विपक्ष में LDF और BJP पहले से ही कांग्रेस की इस गुटबाजी को लेकर हमलावर हैं। Pinarayi Vijayan गुट का कहना है कि कांग्रेस सत्ता संभालने लायक नहीं है।

 आगे क्या?

कांग्रेस हाईकमान अब केरल भेजे गए पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। CLP की बैठक, विधायकों की राय और सहयोगी दलों से बातचीत के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। संभावना है कि अगले कुछ दिनों में कोई एक नाम घोषित कर दिया जाए।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हाईकमान वेणुगोपाल या सतीशन में से किसी एक को चुन सकता है। चेन्नीथला को किसी अहम पद (जैसे उप-मुख्यमंत्री या महत्वपूर्ण मंत्रालय) देकर संतुलित किया जा सकता है।

निष्कर्ष: जीत को बर्बाद न होने दें

केरल कांग्रेस के लिए यह वक्त परीक्षा का है। दस साल बाद सत्ता हासिल करने का यह मौका पार्टी को एकजुट होकर इस्तेमाल करना चाहिए। तीनों दिग्गज नेताओं से अपेक्षा है कि वे पार्टी हित को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर रखें।

राहुल गांधी और हाईकमान की कोशिश होगी कि केरल में कांग्रेस की सरकार मजबूत बने और 2026 की इस ऐतिहासिक जीत को आने वाले वर्षों तक याद रखा जाए।

अभी सवाल यही है — क्या केरल कांग्रेस अपनी पुरानी बीमारी पर काबू पा पाएगी या फिर गुटबाजी की भेंट चढ़ जाएगी? समय ही बताएगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-10 May 2026