-Friday World-12May 2026
दुनिया के सबसे महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम में से एक THAAD को अजेय माना जाता था। खाड़ी देशों ने अमेरिका पर भरोसा करके अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन जब ईरान ने बदला लिया तो यह ‘सोने की ढाल’ कागजी घोड़े साबित हुई। 2026 के मध्य-पूर्व युद्ध ने अमेरिकी हथियारों की सच्चाई उजागर कर दी। अब खाड़ी देश महंगे सबक सीख रहे हैं।
THAAD क्या है और क्यों बेचा गया ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’?
Terminal High Altitude Area Defense (THAAD) अमेरिका की अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। इसका मुख्य काम ऊंची उड़ान वाले बैलिस्टिक मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर या ऊपरी हिस्से में ही नष्ट करना है। 1990 के दशक में विकसित यह सिस्टम 2008 से ऑपरेशनल है। इसमें AN/TPY-2 रडार जैसी उन्नत तकनीक शामिल है, जो हजारों किलोमीटर दूर से खतरे का पता लगाती है।
ईरान के बढ़ते मिसाइल और ड्रोन खतरे से घबराए खाड़ी देशों को अमेरिका ने THAAD और Patriot PAC-3 को “सोने की ढाल” बताकर बेचा। इनकी मदद से बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और विमानों से बचाव का वादा किया गया। खाड़ी देशों ने भरोसा किया और भारी-भरकम सौदे किए।
142 बिलियन डॉलर का ऐतिहासिक सौदा
मई 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सऊदी अरब यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 142 बिलियन डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपये) का सबसे बड़ा हथियार सौदा हुआ। इसमें THAAD बैटरियां, Patriot PAC-3 अपग्रेड, एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलें, ड्रोन और अन्य उपकरण शामिल थे।
सऊदी अरब के अलावा UAE, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान और जॉर्डन जैसे देशों ने भी अमेरिकी डिफेंस सिस्टम खरीदे। दक्षिण कोरिया और रोमानिया में भी THAAD तैनात है। कुल मिलाकर खाड़ी देशों ने सुरक्षा के नाम पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर दिए।
फरवरी-मार्च 2026: ईरान का जोरदार जवाबी हमला
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों में खाड़ी देशों के एयरस्पेस और बेस का इस्तेमाल हुआ। ईरान ने तुरंत बदला लिया। उसने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 1000 ड्रोन खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर दागे।
ईरान के हमलों में 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 1000 ड्रोन शामिल थे। कुछ मिसाइलें और ड्रोन शहरों, एयरपोर्ट, ऊर्जा सुविधाओं और नागरिक ठिकानों पर भी गिरे। THAAD और Patriot सिस्टम इस भारी हमले के सामने पूरी तरह बेअसर साबित हुए।
THAAD का फेलियर: रडार जल गए, सिस्टम ध्वस्त
सैटेलाइट इमेजेस से साफ दिखा कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर THAAD का AN/TPY-2 रडार पूरी तरह जल गया। जॉर्डन और UAE में भी रडार साइट्स को नुकसान पहुंचा। Patriot सिस्टम सस्ते ईरानी ड्रोनों के स्वार्म अटैक के सामने लाचार रही।
अमेरिकी सिस्टम महंगे इंटरसेप्टर (एक-एक करोड़ डॉलर से ज्यादा) पर निर्भर थे, जबकि ईरान सस्ते ड्रोन और मिसाइलों (हजारों डॉलर में) का इस्तेमाल कर रहा था। एक अमेरिकी अधिकारी ने स्वीकार किया कि ईरान हर महीने 100 से ज्यादा मिसाइल बना सकता है, जबकि अमेरिका इतने समय में सिर्फ 6-7 इंटरसेप्टर तैयार कर पाता है। यह लागत का असंतुलन THAAD की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुआ।
दक्षिण कोरिया का ‘बलिदान’
खाड़ी में THAAD की नाकामी देखकर पेंटागन ने दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD सिस्टम के पार्ट्स मध्य-पूर्व भेजने शुरू कर दिए। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने इसका विरोध किया, लेकिन अमेरिका ने अपनी जरूरत को प्राथमिकता दी। नतीजा — उत्तर कोरिया के खतरे के सामने दक्षिण कोरिया कमजोर पड़ गया।
खाड़ी देशों को मिला महंगा सबक
इस युद्ध ने साबित कर दिया कि सिर्फ महंगे हथियार खरीदने से सुरक्षा नहीं मिलती। जरूरत है सही रणनीति, पर्याप्त स्टॉक, लेयर्ड डिफेंस और क्षेत्रीय सहयोग की। ईरान की असममित युद्धनीति (सस्ते हथियारों से महंगे सिस्टम को थकाना) ने अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की चमक फीकी कर दी।
खाड़ी देश अब सोच रहे हैं — क्या अमेरिकी ‘ढाल’ वाकई इतनी मजबूत है जितना दावा किया गया था? या यह सिर्फ व्यापार का हिस्सा था?
THAAD vs ईरानी हमले: तकनीकी विश्लेषण
THAAD मुख्य रूप से हाई-ऑल्टीट्यूड बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिजाइन है। यह ड्रोन स्वार्म या लो-ऑल्टीट्यूड क्रूज मिसाइलों को प्रभावी ढंग से रोक नहीं पाता। Patriot PAC-3 नीची और मध्यम ऊंचाई पर काम करता है, लेकिन बड़ी संख्या में आने वाले सस्ते टारगेट्स के सामने उसका स्टॉक जल्दी खत्म हो जाता है।
ईरान ने स्मार्ट तरीके से रडार और सेंसर को टारगेट किया। AN/TPY-2 रडार जैसे हाई-वैल्यू एसेट्स को नष्ट करने से पूरे नेटवर्क की क्षमता घट गई। एक रडार का नुकसान पूरे क्षेत्र की निगरानी प्रभावित करता है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य के सबक
यह फियास्को सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं। यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्र जहां अमेरिकी डिफेंस सिस्टम तैनात हैं, वहां भी सवाल उठ रहे हैं। क्या महंगे सिस्टम वॉल्यूम अटैक्स (बड़ी संख्या वाले हमले) का सामना कर सकते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की रक्षा रणनीति में:
- सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित इंटरसेप्टर/लेजर सिस्टम की जरूरत
- बेहतर इंटेलिजेंस और प्री-एम्प्टिव क्षमता
- क्षेत्रीय सहयोग और डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन
- साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचाव
अमेरिका-ईरान संघर्ष ने दिखाया कि युद्ध अब सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, लागत-प्रभावशीलता और रणनीतिक धैर्य का भी है।
निष्कर्ष: महंगे सपनों का अंत
142 बिलियन डॉलर खर्च करने के बावजूद खाड़ी देशों को पूरा सुरक्षा कवच नहीं मिल सका। THAAD की नाकामी ने अमेरिकी हथियार उद्योग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। अब खाड़ी देश नई रणनीति बना रहे हैं — शायद कम निर्भरता, ज्यादा आत्मनिर्भरता और संतुलित विदेश नीति की ओर।
यह घटना इतिहास में दर्ज हो गई है — जब सोने की ढाल भी सस्ते तीरों के सामने बेअसर हो गई।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-12May 2026