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“परमाणु बम की दहलीज पर ईरान: 90% यूरेनियम संवर्धन की धमकी, अमेरिका-इजराइल को चेतावनी, शांति ‘लाइफ सपोर्ट’ पर”
दुबई/तेहरान, 13 मई 2026 – ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक युद्धविराम अब नाम मात्र का रह गया है। गम्भीर तनाव के बीच ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता **इब्राहिम रेजाई** ने मंगलवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ईरान पर फिर से हमला हुआ तो देश यूरेनियम को 90% शुद्धता (weapons-grade) तक संवर्धित कर सकता है। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
यह धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” और “कचरा” बताते हुए युद्धविराम को “लाइफ सपोर्ट” पर बता दिया है। क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परमाणु प्रसार की दृष्टि से यह घटनाक्रम अत्यंत गंभीर है।
ईरान की धमकी का पूरा विवरण
ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“यदि फिर से हमला होता है, तो ईरान 90% संवर्धन का विकल्प चुन सकता है। हम संसद में इसकी समीक्षा करेंगे।
यह बयान ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ के ultimatum के ठीक बाद आया। गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के 14-पॉइंट प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी: “जितना अधिक विलंब करेंगे, अमेरिकी टैक्सपेयर्स को उतनी ही बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।” गालिबाफ ने आगे कहा कि ईरानी सशस्त्र बल किसी भी आक्रामकता का “जवाबदेह और आश्चर्यजनक” जवाब देने के लिए तैयार हैं।
पृष्ठभूमि: फरवरी 2026 का युद्ध और युद्धविराम
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र — फोर्डो, नतांज और इस्फahan — बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। अमेरिका का दावा था कि इन हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम वर्षों पीछे चला गया है।
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से अस्थायी युद्धविराम हुआ, जो अब भी नाममात्र कायम है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौवहन बाधित होने, ब्लॉकेड और शांति वार्ता के असफल होने से तनाव बढ़ गया है। ईरान 60% संवर्धित लगभग 400-440 किलोग्राम यूरेनियम रखता है, जिसे आगे संवर्धित करके हथियार-ग्रेड स्तर पर पहुंचाया जा सकता है।
400 किलोग्राम यूरेनियम का रहस्य
हमलों से पहले ईरान के पास 60% शुद्धता वाला करीब 400 किलोग्राम यूरेनियम था। अमेरिका-इजराइल का दावा है कि कई साइटें पूरी तरह नष्ट हो गईं, लेकिन IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) और विशेषज्ञों के अनुसार इस स्टॉकपाइल का सटीक पता नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि हमलों से पहले इसे सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर लिया गया था, जबकि कुछ का मानना है कि यह क्षतिग्रस्त साइटों में दबा हुआ है।
जब तक यह HEU (Highly Enriched Uranium) स्टॉक मौजूद है, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। अमेरिका की मांग है कि ईरान यह स्टॉक देश के बाहर भेज दे और स्थानीय स्तर पर संवर्धन पूरी तरह बंद कर दे। ईरान इसे अपनी संप्रभुता का मुद्दा बताते हुए अस्वीकार कर रहा है।
अमेरिका की अडिग मांग और ईरान का रुख
ट्रंप प्रशासन ईरान से बिना शर्त समर्पण जैसी मांग कर रहा है — परमाणु कार्यक्रम का पूर्ण विघटन, मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण, क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुटों (हिजबुल्लाह, हमास आदि) से समर्थन बंद करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना।
ईरान का रुख है कि पहले ब्लॉकेड हटाया जाए, युद्ध क्षति का मुआवजा दिया जाए और उसके संवर्धन के अधिकार को मान्यता दी जाए। ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन बार-बार हमलों के बाद वह किसी भी विकल्प के लिए तैयार है।
वैश्विक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
- तेल की कीमतें: होर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कीमतें बढ़ीं और मुद्रास्फीति का खतरा पैदा हुआ।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को “अस्तित्वगत खतरा” बताया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू स्टॉकपाइल को पूरी तरह हटाने पर जोर दे रहे हैं।
- यूरोप और अन्य: कई यूरोपीय देश युद्धविराम को मजबूत करने और डिप्लोमेसी पर जोर दे रहे हैं। चीन और रूस ईरान के समर्थन में हैं।
- परमाणु प्रसार का खतरा: यदि ईरान 90% संवर्धन शुरू करता है तो सऊदी अरब, टर्की और मिस्र जैसे देश भी परमाणु हथियार कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में हथियारों की दौड़ तेज हो जाएगी।
विशेषज्ञ विश्लेषण
परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार, 60% से 90% तक पहुंचने में ईरान को तकनीकी रूप से ज्यादा समय नहीं लगेगा, खासकर यदि उसके पास पर्याप्त सेंट्रीफ्यूज बचे हैं। हालांकि, हमलों से सेंट्रीफ्यूज और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। फिर भी, ईरान की underground सुविधाएं और गुप्त क्षमताएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।
IAEA प्रमुख रफael ग्रॉसी ने कहा है कि साइटों तक पहुंच बिना ईरानी सहयोग के मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस स्टॉकपाइल को ट्रैक करने और स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है।
आगे का रास्ता: युद्ध या डिप्लोमेसी?
वर्तमान में पाकिस्तान, चीन और अन्य मध्यस्थ देश वार्ता चला रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरी खाई है। ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम “बहुत कमजोर” है और यदि ईरान समझौता नहीं करता तो “विनाशकारी” जवाब दिया जा सकता है।
ईरान की संसद और सशस्त्र बल अब 90% संवर्धन जैसे कदमों पर विचार कर रहे हैं, जो पूरे क्षेत्र को परमाणु युद्ध की आग में झोंक सकता है।
ईरान की यह धमकी महज शब्द नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव है। दुनिया के सबसे अस्थिर क्षेत्र में एक छोटी सी चिंगारी पूरे ग्लोब को प्रभावित कर सकती है। होर्मुज खुला रहे, तेल की आपूर्ति बनी रहे और परमाणु हथियार न फैलें — यह सभी के लिए चुनौती है।
यदि डिप्लोमेसी कामयाब हुई तो शांति संभव है, अन्यथा 2026 का यह संघर्ष इतिहास की सबसे खतरनाक जंगों में से एक बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि समय कम है और दांव बहुत बड़ा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-12May 2026