-Friday World-May 5,2026
तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के जरिए IRGC का सख्त संदेश: अमीरात अगर गलत कदम उठाया तो पूरे देश के हित ईरानी मिसाइलों के निशाने पर
मध्यपूर्व का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र के हवाले से UAE को स्पष्ट चेतावनी जारी की है। सूत्र ने कहा कि अगर संयुक्त अरब अमीरात “इज़राइल का खिलौना” बनकर कोई गलत कदम उठाता है, तो ईरान पूरे अमीराती हितों को निशाना बनाएगा और UAE को “ज़ायोनी शासन का हिस्सा” मान लिया जाएगा।
यह चेतावनी महज शब्दों की आड़ नहीं है। यह ईरान की बढ़ती आक्रामकता और क्षेत्रीय समीकरणों में हो रहे बदलाव का सीधा संकेत है।
चेतावनी का पूरा बयान
तस्नीम को दिए गए बयान में IRGC सूत्र ने कहा, “अमीरातियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक धमकी नहीं दी गई है। लेकिन अगर वे इज़राइल का खिलौना बन जाते हैं और कोई गलत कदम उठाते हैं, तो उन्हें ऐसा सबक मिलेगा जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे।”
सूत्र ने आगे चेतावनी दी, “अगर UAE कोई गलत कदम उठाता है, तो उसके सभी हित ईरान के टारगेट बन जाएंगे। अमीराती सुविधाओं का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं रहेगा। UAE जानता है कि वह एक बहुत ही नाजुक शीशे के घर में बैठा है, और असुरक्षा उसके लिए पूरी तरह ज़हर है। अगर वह 40-दिन की लड़ाई की गलती दोहराना चाहता है, तो हम पूरी तरह से संयम छोड़ देंगे और इस ज़ायोनी घोंसले को ज़ायोनी शासन का हिस्सा मानेंगे।”
पृष्ठभूमि: क्यों UAE पर नजर?
संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल के बीच 2020 के अब्राहम समझौते के बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। व्यापार, प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग बढ़ा है। ईरान इसे अपने खिलाफ प्रत्यक्ष खतरा मानता है।
UAE ने हाल के वर्षों में इज़राइल के साथ खुलकर सहयोग किया है, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) के खिलाफ। ईरान का मानना है कि UAE अब इज़राइल का अग्रिम मोर्चा बन चुका है। दुबई और अबू धाबी जैसे वैश्विक वित्तीय और पर्यटन केंद्र ईरानी हमलों के लिए आकर्षक निशाने हो सकते हैं।
ईरान-UAE संबंधों का उतार-चढ़ाव
1971 में UAE के गठन के बाद दोनों देशों के बीच द्वीपों (अबू मूसा, ग्रेटर और लेसर टुनब) को लेकर विवाद रहा है। फिर भी आर्थिक संबंध मजबूत रहे। 2010 के दशक में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद UAE ईरान का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहा।
लेकिन 2015 के बाद स्थिति बदली। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में UAE ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में भाग लिया, जिसे ईरान अपना प्रॉक्सी मानता है। 2019 में अबू धाबी के पास तेल टैंकर हमलों और 2022-23 में इज़राइल के साथ खुली भागीदारी ने ईरान को आक्रोशित किया।
अब 2025-26 में गाजा युद्ध, लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ टकराव और ईरान-इज़राइल प्रत्यक्ष मिसाइल हमलों के बाद तनाव नया रूप ले चुका है।
“40 दिन की लड़ाई” का मतलब
ईरानी सूत्र द्वारा “40-दिन की लड़ाई” का जिक्र संभवतः 2024 के इज़राइल-हिजबुल्लाह या ईरान-इज़राइल प्रत्यक्ष टकराव की ओर इशारा है। ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, लेकिन पूर्ण युद्ध टल गया। अब UAE को चेतावनी दी जा रही है कि अगर वह इज़राइल की तरफ से कोई नया मोर्चा खोलता है तो ईरान पूर्ण युद्ध के लिए तैयार है।
सैन्य क्षमता का आकलन
ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें (शाहेद, फतेह, खैबरशेखर), ड्रोन और समुद्री हमले की क्षमता है। हूती विद्रोही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जो UAE की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
UAE की अर्थव्यवस्था तेल, पर्यटन, वित्त और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर है। दुबई एयरपोर्ट, अबू धाबी पोर्ट, रिसॉर्ट्स और विदेशी निवेश ईरानी हमलों के लिए आसान लक्ष्य हो सकते हैं। UAE के पास आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, लेकिन ईरान की मिसाइल संख्या और असममित युद्ध क्षमता इसे चुनौतीपूर्ण बनाती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
यह चेतावनी पूरे खाड़ी क्षेत्र को प्रभावित करेगी:
- सऊदी अरब: UAE का निकट सहयोगी होने के नाते सऊदी भी सतर्क होगा।
- इज़राइल: अब्राहम समझौतों की मजबूती पर सवाल।
- मेरिका UAE अमेरिकी सैन्य ठिकानों का घर है। कोई हमला अमेरिका को सीधे खींच सकता है।
- चीन और रूस: दोनों देश UAE में निवेश करते हैं और स्थिरता चाहते हैं।
- भारत: UAE भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और 38 लाख से ज्यादा भारतीयों का घर है। तनाव भारतीय ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी श्रमिकों को प्रभावित करेगा।
कूटनीतिक संभावनाएं
ईरान की चेतावनी के बावजूद पूर्ण युद्ध दोनों पक्षों के लिए विनाशकारी होगा। UAE ने पहले भी ईरान के साथ तनाव कम करने के प्रयास किए हैं। 2023-24 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क बढ़े थे।
लेकिन इज़राइल के साथ UAE का बढ़ता सहयोग ईरान को असहज कर रहा है। ओमान और कतर जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
1. तनाव बढ़ना: UAE यदि इज़राइल के साथ कोई संयुक्त सैन्य अभ्यास या खुफिया कार्रवाई करता है तो ईरानी हमले की आशंका।
2. अर्थव्यवस्था पर असर: बीमा लागत बढ़ना, निवेशकों का भय, तेल कीमतों में उछाल।
3. प्रॉक्सी युद्ध: हूती हमले तेज होना, साइबर हमले।
4. परमाणु आयाम: अगर तनाव बढ़ा तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर सकता है।
निष्कर्ष: शीशे का घर और क्षेत्रीय संतुलन
UAE वाकई “शीशे के घर” में बैठा है। उसकी समृद्धि, खुली अर्थव्यवस्था और भौगोलिक स्थिति उसे आर्थिक महाशक्ति बनाती है, लेकिन सैन्य रूप से ईरान जैसे बड़े पड़ोसी के सामने कमजोर भी बनाती है।
ईरान का संदेश साफ है — “हमारे खिलाफ इज़राइल का मोहरा मत बनो।” अब UAE को फैसला करना है कि वह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखते हुए अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा कैसे करे।
मध्यपूर्व में शांति की कोई आसान राह नहीं है। एक छोटा सा गलत कदम पूरे क्षेत्र को आग की लपटों में झोंक सकता है। दुनिया इस नाजुक संतुलन को करीब से देख रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-May 5,2026