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Tuesday, 5 May 2026

"ड्रैगन और शेर की नई कूटनीति: बीजिंग में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची का दौरा, परमाणु वार्ता से होर्मुज तक हर मुद्दे पर होगी बात"

"ड्रैगन और शेर की नई कूटनीति: बीजिंग में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची का दौरा, परमाणु वार्ता से होर्मुज तक हर मुद्दे पर होगी बात"
-Friday World-May 5,2026 
ईरान और चीन के रिश्ते हमेशा से "रणनीतिक साझेदारी" के नाम से जाने जाते हैं। लेकिन फरवरी-अप्रैल 2026 के बीच अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच हुए सीधे सैन्य टकराव के बाद ये रिश्ते अब सिर्फ तेल और व्यापार तक सीमित नहीं रहे। आज, 5 मई 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराक़ची बीजिंग पहुंच रहे हैं। उनके बैग में है राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का एक लिखित संदेश और दिमाग में है ओमान में अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का पूरा खाका। ये दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक धुरी बनने की आहट साफ सुनाई दे रही है। 

*1. दौरा क्यों अहम है: टाइमिंग ही सब कुछ है*
अराक़ची का चीन दौरा अचानक नहीं हुआ। पिछले 60 दिनों में पश्चिम एशिया का भूगोल बदल गया है।

- 28 फरवरी से 8 अप्रैल 2026: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हमले किए। जवाब में ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी हितों और इज़राइल पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए।
- 8 अप्रैल 2026: पाकिस्तान की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ। लेकिन ये सीजफायर बेहद नाजुक है।
- अप्रैल-मई 2026: ओमान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका के बीच दो दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता हो चुकी है। तीसरा दौर मस्कट में इसी हफ्ते होना है। 

ठीक इसी कूटनीतिक दलदल के बीच अराक़ची पहले मॉस्को गए, अब बीजिंग जा रहे हैं। ईरान का संदेश साफ है: "चीन और रूस हमारे रणनीतिक साझेदार हैं जो मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहे"। 69f8

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा था कि ये दौरा पहले से तय था। इसका दोहरा मकसद है: पहला, अमेरिका से चल रही वार्ता पर चीन को अपडेट करना। दूसरा, चीन के साथ हुए द्विपक्षीय समझौतों को तेज़ी से लागू करना। 1e2d

2. अराक़ची के बैग में क्या है: 4 बड़े एजेंडे

एजेंडा 1: परमाणु वार्ता में चीन की भूमिका
अराक़ची ने बीजिंग रवाना होने से पहले कहा कि चीन ने हमेशा ईरान के "शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम" का समर्थन किया है। चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और JCPOA का हिस्सा भी रहा। ईरान चाहता है कि चीन अमेरिका पर दबाव बनाए कि वो "अवास्तविक मांगें" न रखे। बघाई ने साफ कहा: चीन किसी भी प्रक्रिया में "रचनात्मक और प्रभावशाली भूमिका" निभा सकता है। 69f85ce01e2d

एजेंडा 2: होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। ये दुनिया के तेल-गैस का 20% रास्ता है। जर्मनी, इटली और दक्षिण कोरिया पहले ही अराक़ची से फोन पर इसे खोलने की मांग कर चुके हैं। जर्मनी ने तो यहां तक कहा कि "ईरान को परमाणु हथियार पूरी तरह और सत्यापन योग्य तरीके से छोड़ने होंगे और तुरंत होर्मुज खोलना होगा"। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है। होर्मुज बंद होने से चीन की ऊर्जा सुरक्षा सीधे खतरे में है। बीजिंग चाहेगा कि ईरान गारंटी दे। 

एजेंडा 3: 25 साल का रणनीतिक समझौता और व्यापार
2021 में ईरान-चीन ने 25 साल का 400 अरब डॉलर का समझौता किया था। इसमें तेल, बंदरगाह, 5G और सैन्य सहयोग शामिल है। युद्ध और प्रतिबंधों की वजह से इसकी रफ्तार धीमी पड़ी। बघाई ने कहा कि इस दौरे का "एक बड़ा हिस्सा द्विपक्षीय समझौतों के कार्यान्वयन में तेजी लाना है"। ईरान को पुनर्निर्माण के लिए पैसे चाहिए, चीन को सस्ता तेल और बेल्ट एंड रोड के लिए चाबहार तक पहुंच चाहिए। डील पक्की है। 

एजेंडा 4: "पूर्व की ओर देखो" नीति को मजबूती
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम संदेश इस बात का सबूत है कि तेहरान अब पश्चिम से उम्मीद छोड़कर "पूर्व" पर दांव लगा रहा है। अराक़ची ने खुद कहा: "चीन और रूस हमारे करीबी दोस्त हैं"। जब यूरोप ईरान पर "परमाणु हथियार" का आरोप लगा रहा है, तब चीन-रूस का साथ ईरान के लिए कूटनीतिक ढाल है। 

3. बीजिंग से तेहरान तक: चीन क्या चाहता है?
चीन के लिए ये दौरा "संकट में अवसर" जैसा है।

1. ऊर्जा सुरक्षा: चीन अपने तेल का 10% से ज्यादा ईरान से लेता है। होर्मुज बंद रहना बीजिंग बर्दाश्त नहीं कर सकता।
2. अमेरिका को संतुलित करना: चीन नहीं चाहता कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अकेला "शांति निर्माता" बने। ईरान-अमेरिका वार्ता में शामिल होकर चीन खुद को वैश्विक मध्यस्थ के तौर पर पेश करना चाहता है।
3. Gulf में पैर जमाना: सऊदी-ईरान समझौता 2023 में चीन ने ही कराया था। अब वो युद्ध के बाद के खाड़ी का नया सुरक्षा ढांचा तय करना चाहता है।

4. पूरी दुनिया की नजर क्यों है?
अराक़ची ने पिछले 72 घंटों में 12 देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है। इटली, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान, रूस सब ईरान से संपर्क में हैं। 

इटली के विदेश मंत्री ताजानी ने अराक़ची से साफ कहा कि "ईरान का सैन्य परमाणु कार्यक्रम इटली के लिए रेड लाइन है"। अराक़ची ने जवाब दिया कि यूरोप को अमेरिका-इज़राइल की "अकारण सैन्य आक्रामकता" की निंदा करनी चाहिए। ebe9c584

यानी दुनिया दो खेमों में बंटी है: एक तरफ अमेरिका-यूरोप जो ईरान पर दबाव बना रहे हैं। दूसरी तरफ चीन-रूस जो ईरान को कूटनीतिक ऑक्सीजन दे रहे हैं। बीजिंग दौरा तय करेगा कि पलड़ा किधर झुकता है।

5. आगे क्या: 3 संभावनाएं

संभावना 1: चीन बने गारंटर
अगर चीन ईरान को मनाने में कामयाब रहता है कि वो यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और होर्मुज खोले, तो अमेरिका तीसरे दौर की वार्ता में नरम पड़ सकता है। बदले में चीन ईरान में बड़े निवेश का ऐलान कर सकता है। ये "Win-Win" होगा।

संभावना 2: "प्रतिरोध की धुरी" मजबूत
अगर बात नहीं बनी, तो ईरान-चीन-रूस मिलकर अमेरिका के खिलाफ नया ब्लॉक बना सकते हैं। चीन ईरान से तेल खरीद बढ़ाकर प्रतिबंधों को बेअसर कर सकता है। ये पश्चिम के लिए बुरा सपना होगा।

संभावना 3: यथास्थिति
हो सकता है ये दौरा सिर्फ "विचार-विमर्श" तक सीमित रहे। चीन सीधे अमेरिका से नहीं टकराना चाहता। वो बस इतना सुनिश्चित करेगा कि युद्ध दोबारा न भड़के क्योंकि उससे तेल 200 डॉलर प्रति बैरल चला जाएगा।

निष्कर्ष: नई विश्व व्यवस्था की प्रयोगशाला बना पश्चिम एशिया
अब्बास अराक़ची का बीजिंग दौरा सिर्फ दो देशों की मुलाकात नहीं है। ये 21वीं सदी की नई शीत युद्ध की आहट है। 8 अप्रैल को हुआ सीजफायर अभी भी कागजी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना "किसी भी खतरे से देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है"। 

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प कह चुके हैं कि ईरान ने "अभी पर्याप्त बड़ी कीमत नहीं चुकाई है"। ऐसे में चीन की भूमिका "किंगमेकर" वाली हो गई है। 4e9b

अराक़ची मंगलवार रात बीजिंग पहुंचे। उनके पास पेज़ेश्कियान का संदेश है, मॉस्को का समर्थन है, और ओमान वार्ता का दबाव है। बीजिंग में होने वाली बातचीत तय करेगी कि पश्चिम एशिया में अगला कदम जंग की तरफ होगा या तेल की पाइपलाइन की तरफ। 

एक बात तय है: दुनिया अब यूनिपोलर नहीं रही। "ड्रैगन" और "शेर" मिलकर नया खेल रच रहे हैं, और वॉशिंगटन-तेल अवीव को अब सिर्फ देखना नहीं, सुनना भी पड़ेगा। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-May 5,2026