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Saturday, 13 June 2026

ईरान का सख्त अल्टीमेटम: 24 अरब डॉलर वापस दो, वरना युद्ध हिंद महासागर से भूमध्य सागर तक फैल जाएगा

ईरान का सख्त अल्टीमेटम: 24 अरब डॉलर वापस दो, वरना युद्ध हिंद महासागर से भूमध्य सागर तक फैल जाएगा - Friday World 13 Jun 2026

मोहसिन रज़ाई का CNN को दिया गया विस्फोटक इंटरव्यू: ट्रंप पर दबाव, खामेनेई की मुलाकात नामुमकिन

तेहरान, 13 जून 2026: ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह मुजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी सर्दार मोहसिन रज़ाई ने CNN को विशेष साक्षात्कार में अमेरिका को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच कोई भी समझौता तभी संभव है, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के 24 अरब डॉलर के फ्रोजन एसेट्स तुरंत जारी कर दे। रज़ाई ने साफ कहा कि बातचीत फिलहाल “बेनबस्त” (deadlock) पर पहुंच गई है और “टॉप ट्रंप के कोर्ट में है”।

यह इंटरव्यू ऐसे समय में आया है जब हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम पर है, भारतीय जहाजों पर हमलों के आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है।

 ईरान की मांग: 24 अरब डॉलर — “यह हमारा पैसा है”

रज़ाई ने CNN को बताया कि कोई भी सैन्य या शांति समझौता होने पर पहले चरण में 12 अरब डॉलर तुरंत जारी किए जाएं और अगले चरण में बाकी 12 अरब डॉलर। कुल 24 अरब डॉलर। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह अमेरिका का पैसा नहीं, बल्कि ईरान का अपना पैसा है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विदेशी बैंकों में फ्रीज हो गया है।”

रज़ाई ने इसे “ट्रस्ट बिल्डिंग मेजर” (विश्वास निर्माण का परीक्षण) बताया। उन्होंने कहा, “अगर ट्रंप ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं, तो यह 24 अरब डॉलर ट्रस्ट का टेस्ट है। अमेरिका को यह टेस्ट पास करना होगा, तभी आगे का रास्ता खुलेगा।” इस राशि की रिहाई को उन्होंने “ईरान और अमेरिका के भविष्य के लिए नया क्षितिज” बताया।

 मुजतबा खामेनेई-ट्रंप मुलाकात? “ऐसा कुछ नहीं होगा”

ईरानी नेता ने स्पष्ट रूप से अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि **आयातोल्लाह मुजतबा खामेनेई** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात नहीं करेंगे। “यह घटना नहीं होगी,” रज़ाई ने साफ शब्दों में कहा। इससे पहले ट्रंप ने ऐसी संभावना जताई थी, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से नकार दिया।

 युद्ध की चेतावनी: “फारस की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर, लाल सागर और भूमध्य सागर तक”

रज़ाई का सबसे आक्रामक संदेश युद्ध की स्थिति को लेकर था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युद्ध फिर शुरू हुआ और समुद्री नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो ईरान संघर्ष को क्षेत्रीय स्तर से बाहर ले जाएगा। 

“हम युद्ध को फारस की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर, लाल सागर (Bab el-Mandeb), और भूमध्य सागर तक फैला देंगे।” 

उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी ठिकानों पर और हमले करेगा, जिससे अमेरिका को “बहुत भारी नुकसान” उठाना पड़ेगा। रज़ाई ने पेंटागन को सीधा संदेश दिया कि अगर अमेरिका और इजराइल ज़मीनी युद्ध शुरू करते हैं, तो ईरान की थलसेना (Ground Forces) कई गुना अधिक शक्तिशाली और तैयार है। “अमेरिका एक अंधेरी और अनंत गली में चला जाएगा,” उन्होंने चेतावनी दी।

 हॉर्मुज स्ट्रेट पर नया प्रस्ताव: ईरान-ओमान संयुक्त प्रबंधन

रज़ाई ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान और ओमान मिलकर इस रणनीतिक जलमार्ग की यात्रा व्यवस्था करेंगे और संबंधित शुल्क (fees) प्राप्त करेंगे। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हॉर्मुज दुनिया के 20-30% तेल परिवहन का केंद्र है और हालिया घटनाओं में भारतीय जहाज प्रभावित हुए हैं।

 संदर्भ: ईरान-अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि

यह इंटरव्यू हालिया US-ईरान संघर्ष के बाद आया है, जिसमें हॉर्मुज में तनाव बढ़ा, जहाजों पर हमले हुए और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकाबंदी को अपनी अर्थव्यवस्था पर हमला मानता है, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को खतरा बताता है।

रज़ाई ने जोर दिया कि बातचीत का खर्च युद्ध के खर्च से कहीं कम है। “ट्रंप को स्वतंत्र फैसला लेना चाहिए, इजराइल के प्रभाव से मुक्त होकर।”

 भू-राजनीतिक प्रभाव

- भारत के लिए: हजारों भारतीय नाविक हॉर्मुज क्षेत्र में कार्यरत हैं। ईरान से सस्ता तेल और चाबहार पोर्ट भारत की रणनीति का हिस्सा है। 24 अरब डॉलर की रिहाई और हॉर्मुज की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ी है।

- वैश्विक अर्थव्यवस्था: यदि युद्ध फैला तो तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं, शिपिंग मार्ग खतरे में पड़ सकते हैं।

- ट्रंप प्रशासन: डेडलॉक तोड़ने का दबाव बढ़ गया है।

ईरान की यह मजबूत स्थिति दिखाती है कि तेहरान न सिर्फ आर्थिक मांगों पर अड़ा है, बल्कि सैन्य रूप से भी पूरी तरह तैयार है। मोहसिन रज़ाई जैसे अनुभवी कमांडर (पूर्व IRGC चीफ) का यह बयान ईरान की रणनीतिक सोच को उजागर करता है — ट्रस्ट बिल्डिंग पहले, फिर समझौता।

ट्रंप के लिए फैसला मुश्किल है — एक तरफ इजराइल और हॉawks का दबाव, दूसरी तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था और चुनावी साल में स्थिरता की जरूरत।

: मोहसिन रज़ाई का CNN इंटरव्यू सिर्फ एक साक्षात्कार नहीं, बल्कि ईरान की नई कूटनीतिक और सैन्य रणनीति का ऐलान है। 24 अरब डॉलर की मांग “ट्रस्ट टेस्ट” है, जबकि युद्ध विस्तार की चेतावनी “रेड लाइन”। अब गेंद ट्रंप के कोर्ट में है। दुनिया देख रही है कि अमेरिका इस डेडलॉक को कैसे तोड़ता है — बातचीत से या फिर “अंधेरी गली” में कदम रखकर।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 13 Jun 2026