Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Friday, 5 June 2026

ममता बनर्जी की सांसद बैठक में बड़ा झटका! 28 में से सिर्फ 3 पहुंचे, अभिषेक बनर्जी समेत मुट्ठी भर नेताओं का सहारा -

ममता बनर्जी की सांसद बैठक में बड़ा झटका! 28 में से सिर्फ 3 पहुंचे, अभिषेक बनर्जी समेत मुट्ठी भर नेताओं का सहारा - Friday World 5 Jun 2026
कोलकाता, 5 जून 2026: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सत्ता हार के बाद उत्पन्न संकट अब और गहराता दिख रहा है। पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण सांसद बैठक में अपेक्षित 28 लोकसभा सांसदों में से महज 3 ही पहुंचे। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी शामिल थे। यह घटना TMC के अंदरूनी कलह और नेतृत्व पर सवालिया निशान लगा रही है।


बैठक की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की भारी जीत के बाद पार्टी में असंतोष, गुटबाजी और नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। ममता बनर्जी ने पार्टी को एकजुट रखने और आगामी रणनीति पर चर्चा के लिए सांसदों की बैठक बुलाई थी। लेकिन नतीजा उल्टा निकला। 


सूत्रों के अनुसार, बैठक में सिर्फ तीन सांसद ही हाजिर हुए — अभिषेक बनर्जी, और दो अन्य वफादार नेता। बाकी 25 सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी के अंदर गहरी दरार को उजागर कर दिया है। कई सांसदों ने बैठक से दूरी बनाए रखी, जबकि कुछ तो फोन भी नहीं उठा रहे थे।


यह बैठक अभिषेक बनर्जी पर हाल में हुए कथित हमले और पार्टी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों के विरोध के बीच बुलाई गई थी। ममता बनर्जी ने इसे भाजपा की साजिश बताते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, लेकिन खुद पार्टी के अंदर से ही मिला समर्थन बेहद कमजोर रहा।


 TMC में बढ़ता असंतोष: कारण क्या हैं?


1. सत्ता हार का सदमा: 15 साल की सत्ता के बाद अचानक विपक्ष में बैठना TMC के कई नेताओं के लिए स्वीकार्य नहीं हो रहा है। कई नेता नई सरकार के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश में लगे दिख रहे हैं।


2. अभिषेक बनर्जी पर असंतोष: पार्टी के अंदर युवा नेतृत्व के रूप में उभरे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और फैसलों पर कई वरिष्ठ नेताओं को आपत्ति है। कुछ सांसद खुलकर कह रहे हैं कि “अभिषेक की छाया” में काम करना अब मुश्किल हो गया है।


3. विधायकों की बगावत: हाल ही में TMC के 80 विधायकों में से 58-60 विधायकों ने अलग गुट बनाने और नए विपक्षी नेता चुनने की दिशा में कदम उठाए हैं। यह सांसदों की अनुपस्थिति को और भी गंभीर बनाता है।


4. आंतरिक कलह: पार्टी में “ममता बनर्जी बनाम बाकी सब” जैसी स्थिति बनती जा रही है। कई पुराने और वफादार नेता भी अब दूरी बना रहे हैं।


 ममता बनर्जी का रुख


ममता बनर्जी ने इस कम उपस्थिति को “बीजेपी की धमकी और साजिश” बताते हुए खारिज करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कई सांसद क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों में व्यस्त थे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे TMC के संगठनात्मक ढांचे के कमजोर होने का संकेत मान रहे हैं।


अभिषेक बनर्जी ने भी बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम संघर्ष के लिए तैयार हैं। ममता दीदी के नेतृत्व में TMC फिर से मजबूत बनेगी।”


 विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया


भाजपा: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा, “ममता जी की पार्टी अब उनके अपने लोगों को भी साथ नहीं रख पा रही। जनता का फैसला साफ है।”


कांग्रेस और सीपीएम: विपक्षी दलों ने इसे “TMC के अंत की शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा कि 15 साल के भ्रष्टाचार और तानाशाही के बाद पार्टी का बिखरना स्वाभाविक है।


 TMC के भविष्य पर सवाल


TMC, जो कभी बंगाल की सबसे मजबूत ताकत मानी जाती थी, आज सत्ता, संगठन और विश्वसनीयता तीनों मोर्चों पर संकट का सामना कर रही है। 


- लोकसभा में TMC के पास कितने सांसद बचे रहेंगे?

- क्या अभिषेक बनर्जी को पार्टी की दूसरी पंक्ति में स्वीकार किया जाएगा?

- क्या ममता बनर्जी पार्टी को फिर से खड़ा कर पाएंगी?


ये सवाल आज पूरे पश्चिम बंगाल में चर्चा का विषय बने हुए हैं।


 संकट या नया अवसर?


ममता बनर्जी की सांसद बैठक में सिर्फ तीन लोगों का पहुंचना एक प्रतीकात्मक झटका है। यह दर्शाता है कि पार्टी के अंदर असंतोष चरम पर है। अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी ने हालांकि ममता के करीबी वफादारों का संदेश जरूर दिया, लेकिन बड़े पैमाने पर अनुपस्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


TMC के कार्यकर्ता और समर्थक अब इंतजार कर रहे हैं कि ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं। क्या वे पुराने तरीके से पार्टी को संभाल पाएंगी या नई रणनीति और नया नेतृत्व सामने आएगा?


पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह दौर बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। एक तरफ भाजपा की मजबूत सरकार, दूसरी तरफ TMC का आंतरिक संकट — आने वाले दिनों में बंगाल की सियासी गलियारों में और धमाल होने वाला है।


“एक बैठक, तीन सांसद और अनगिनत सवाल”— यह शायद TMC के नए अध्याय की शुरुआत है।


Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jun 2026