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Monday, 1 June 2026

ईरान का साहसिक पलटवार: कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर मिसाइल दागी, अमेरिकी सैनिक घायल – मध्य पूर्व में नया तनाव!

ईरान का साहसिक पलटवार: कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर मिसाइल दागी, अमेरिकी सैनिक घायल – मध्य पूर्व में नया तनाव!
-Friday World 1 Jun 2026
कुवैत सिटी/तेहरान, 1 जून 2026। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया है। अमेरिकी सैन्य अड्डे ‘अली अल सलेम एयरबेस’ को निशाना बनाकर दागी गई फतेह-110 मिसाइल ने क्षेत्रीय सुरक्षा को नया झटका दिया है। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल को बीच में ही रोक लिया, लेकिन मलबे के गिरने से अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों को चोटें आईं तथा दो MQ-9 रीपर ड्रोन क्षतिग्रस्त हो गए।

यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी हिस्से (बंदर अब्बास के निकट) पर हालिया हमलों का प्रत्यक्ष जवाब माना जा रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्षविराम (ceasefire) तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे मध्य पूर्व में पहले से चरमराते तनाव और गहरा गया है।

 घटना का क्रम: जवाबी हमलों की श्रृंखला

ईरानी IRGC के अनुसार, हमला स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 4:50 बजे हुआ। ईरान का दावा है कि यह हमला उन अमेरिकी अड्डों पर किया गया जिनसे हाल ही में ईरान के सैन्य ठिकानों, खासकर सिरिक द्वीप और बंदर अब्बास एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र पर हमले किए गए थे। IRGC ने इसे “सफल” ऑपरेशन बताया और चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी आक्रामकता पर और मजबूत जवाब दिया जाएगा।

कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उसके क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय हुई, सायरन बज उठे और कई मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे “ceasefire का घोर उल्लंघन” करार दिया। Bloomberg और अन्य स्रोतों के मुताबिक, मलबे से पांच अमेरिकी सैनिक व ठेकेदार हल्की चोटों के साथ घायल हुए। दो MQ-9 रीपर ड्रोन (लगभग 3 करोड़ डॉलर मूल्य) क्षतिग्रस्त हुए, एक पूरी तरह नष्ट होने की खबर है।

कुवैत सरकार ने ईरान की इस कार्रवाई की निंदा की और इसे “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। कुवैत अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है और उसके यहां कई अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, जिनमें अली अल सलेम एयरबेस अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड का महत्वपूर्ण अड्डा है।

: अमेरिका-ईरान संघर्ष की नई कड़ी

यह घटना 2026 के ईरान-अमेरिका तनाव की निरंतरता है। हाल के हफ्तों में:

- अमेरिका ने ईरान के ड्रोन ठिकानों और रडार सिस्टम पर हमले किए।

- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी ड्रोन गिराने और जवाबी कार्रवाई का दावा किया।

- दोनों पक्षों के बीच नाजुक संघर्षविराम चल रहा था, जो अब टूटने की कगार पर है।

ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पहले आक्रामकता की, जबकि वॉशिंगटन ईरान को ड्रोन हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता का जिम्मेदार ठहरा रहा है। इस हमले से तेल की कीमतें बढ़ने, क्षेत्रीय सहयोगी देशों में चिंता और बड़े पैमाने पर युद्ध की आशंका बढ़ गई है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

कुवैत पर असर: कुवैत, जो लंबे समय से तटस्थ रहने की कोशिश कर रहा था, अब सीधे संघर्ष में घिर गया है। उसकी अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है और अमेरिकी सैन्य उपस्थिति उसकी सुरक्षा का आधार रही है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान से तुरंत अपनी कार्रवाई रोकने की मांग की है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया: अमेरिकी अधिकारी अभी विस्तृत बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन CENTCOM ने स्पष्ट किया कि कोई भी हमला बिना जवाब नहीं रहेगा। राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन के सूत्रों ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

ईरान की रणनीति: IRGC ने दावा किया है कि उसके हमले सटीक थे और अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। ईरान का मिसाइल कार्यक्रम (फतेह-110 जैसी मध्यम दूरी की मिसाइलें) इस घटना में अपनी क्षमता दिखा गया। तेहरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी आगे बढ़े तो “मजबूत” जवाब आएगा।

वैश्विक चिंता: संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। तेल निर्यात पर निर्भर दुनिया के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का अस्थिर होना बड़ी चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह श्रृंखला बढ़ी तो पूर्ण युद्ध की आशंका बढ़ जाएगी।

 विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या आगे बढ़ेगा संघर्ष?

सैन्य विश्लेषक मानते हैं कि ईरान का यह हमला “प्रतीकात्मक लेकिन साहसिक” था। कुवैत जैसे अमेरिकी सहयोगी पर हमला करके तेहरान ने संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय सहयोगियों को भी निशाना बना सकता है। हालांकि, इंटरसेप्शन की सफलता से पता चलता है कि अमेरिकी-कुवैती रक्षा प्रणाली मजबूत है।

दूसरी ओर, अमेरिका के लिए यह “ceasefire violation” है, जो उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा को चुनौती देता है। अगर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर जवाब दिया तो ईरान के परमाणु ठिकानों या तेल सुविधाओं पर हमले हो सकते हैं, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।

 शांति या और बड़ा युद्ध?

ईरान का कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हमला 2026 के मध्य पूर्व संघर्ष की एक और खतरनाक कड़ी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आक्रामकता का आरोप लगा रहे हैं, जबकि निर्दोष देश कुवैत इसकी कीमत चुकाने को मजबूर है। घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम बताई जा रही है, लेकिन नुकसान की वास्तविकता से इनकार नहीं किया जा सकता।

दुनिया अब सांस रोके यह देख रही है कि क्या कूटनीति जीत हासिल करेगी या मिसाइलों की बौछार और बढ़ेगी। फिलहाल, तनाव चरम पर है और अगले कुछ दिनों के फैसले पूरे क्षेत्र की किस्मत तय कर सकते हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 1 Jun 2026