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Sunday, 28 June 2026

बीजेपी ने नाजिया इलाही खान से किया पूर्ण मोहभंग: 'फ्रॉड' और 'नफरत फैलाने वाली' तत्व का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं

बीजेपी ने नाजिया इलाही खान से किया पूर्ण मोहभंग: 'फ्रॉड' और 'नफरत फैलाने वाली' तत्व का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
-Friday World 28 Jun 2026
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की वरिष्ठ नेता डॉ. जीनत अंसारी ने साफ शब्दों में कहा - नाजिया इलाही खान बीजेपी की कोई नेता नहीं है। पार्टी ने ऐसे तत्वों से दूरी बनाकर सामाजिक सद्भाव और अपनी छवि की रक्षा का संदेश दिया है।

नई दिल्ली/नोएडा। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में सक्रिय रहने वाली नाजिया इलाही खान को लेकर पार्टी में सख्ती बढ़ गई है। हाल ही में उनके विवादित बयानों पर देश भर में FIR दर्ज होने के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है। सबसे ताजा और मजबूत बयान डॉ. जीनत अंसारी का आया है, जिन्होंने नोएडा पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए नाजिया को 'बड़ी फ्रॉड' करार दिया।

डॉ. जीनत अंसारी ने मीडिया से स्पष्ट अपील की कि नाजिया इलाही खान को 'बीजेपी नेता' या 'प्रवक्ता' बताना बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि नाजिया का पार्टी से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है और वह निजी फायदे के लिए समाज में नफरत फैला रही हैं।

 घटना का क्रम और आरोप

नाजिया इलाही खान सोशल मीडिया और विभिन्न चैनलों पर सक्रिय रहीं। वे खुद को बीजेपी से जुड़ा बताती थीं और इस्लाम, पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) तथा अन्य धार्मिक मुद्दों पर तीखे बयान देती थीं। इन बयानों ने मुस्लिम समुदाय में आक्रोश पैदा किया। महाराष्ट्र (मुंबई-भिवंडी), कोलकाता और अन्य जगहों पर उनके खिलाफ IT एक्ट और धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले प्रावधानों के तहत FIR दर्ज हुई।

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नाजिया कोई पदाधिकारी नहीं हैं। उन्होंने पार्टी डेटाबेस चेक करने और सभी प्रदेश अध्यक्षों से पूछताछ के बाद कहा कि नाजिया का नाम कहीं दर्ज नहीं है। अब डॉ. जीनत अंसारी ने इस दूरी को और मजबूत किया है।

डॉ. जीनत ने नोएडा के सेक्टर-24 थाने में शिकायत में आरोप लगाया कि नाजिया खुद को वकील बताती हैं लेकिन उनके पास कोई एनरोलमेंट नंबर नहीं है। वे चैनलों पर झूठ बोलकर बीजेपी का नाम इस्तेमाल करती हैं और समाज को तोड़ने का काम कर रही हैं।

 बीजेपी का साफ संदेश: नफरत का कोई स्थान नहीं

भारतीय जनता पार्टी सदैव 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र पर चलती रही है। पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के नेताओं द्वारा इस मामले में त्वरित कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि बीजेपी किसी भी व्यक्ति या तत्व को नफरत फैलाने की छूट नहीं देगी, भले ही वह खुद को पार्टी से जोड़ने की कोशिश करे।

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि व्यक्तिगत राय व्यक्त करने की आजादी है, लेकिन पार्टी का नाम इस्तेमाल कर सनसनी फैलाना और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना स्वीकार्य नहीं। पार्टी ने ऐसे लोगों से दूरी बनाने का फैसला लिया है ताकि गलतफहमी न फैले।

नाजिया इलाही खान कौन हैं? पृष्ठभूमि

नाजिया इलाही खान पश्चिम बंगाल (कोलकाता) से ताल्लुक रखती हैं। वे पहले ट्रिपल तलाक मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील के रूप में चर्चा में आई थीं। बाद में वे बीजेपी से जुड़ने का दावा करती रहीं और 'नाजिया सनातनी' के नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय हुईं।

उनके कुछ बयानों में मुस्लिम समुदाय के आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार, मस्जिदों-मजारों पर टिप्पणियां और धार्मिक व्यक्तियों पर विवादित टिप्पणियां शामिल रहीं। इनसे देश भर के मुस्लिम संगठनों में गुस्सा भड़का। राजौरी जैसे क्षेत्रों में भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराने की मांग उठी।

पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, नाजिया पर पहले भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हुए थे, हालांकि उन्होंने उन आरोपों से इनकार किया था।

सामाजिक सद्भाव और कानूनी प्रक्रिया

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धार्मिक सद्भाव अत्यंत जरूरी है। संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह स्वतंत्रता दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की छूट नहीं देती।

नाजिया के मामले में कई राज्यों की पुलिस सक्रिय है। कानूनी प्रक्रिया अपना रास्ता तय करेगी। डॉ. जीनत अंसारी और जमाल सिद्दीकी जैसे नेताओं की शिकायतें इस प्रक्रिया को और मजबूती देंगी।

राजनीतिक विश्लेषण: बीजेपी की रणनीति

बीजेपी लंबे समय से अल्पसंख्यक वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। 'सबका साथ' के तहत पार्टी ने कई अल्पसंख्यक चेहरों को आगे बढ़ाया। लेकिन जब कोई व्यक्ति पार्टी की छत्रछाया में रहकर नफरत फैलाने का काम करता है, तो पार्टी तुरंत दूरी बना लेती है।

यह घटना पार्टी के लिए एक सबक भी है - सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेल्फ-क्लेम्ड लीडर्स की जांच सख्त होनी चाहिए। पार्टी ने साफ किया कि केवल आधिकारिक पदाधिकारी ही पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

 मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया

देश भर के मुस्लिम संगठनों, उलेमा और आम नागरिकों ने नाजिया के बयानों की निंदा की। कई जगहों पर प्रदर्शन और FIR की मांग हुई। डॉ. जीनत अंसारी जैसे बीजेपी के मुस्लिम नेताओं द्वारा नाजिया से दूरी बनाने से समुदाय में कुछ राहत महसूस की जा रही है।

यह घटना दिखाती है कि नफरत फैलाने वाले चाहे किसी भी धर्म या पार्टी से जुड़े हों, समाज उन्हें स्वीकार नहीं करता।

मीडिया की भूमिका

मीडिया चैनलों से अपील की गई है कि बिना वेरिफिकेशन के किसी को 'बीजेपी नेता' न बताया जाए। कई चैनलों ने पहले नाजिया को बीजेपी का चेहरा बताकर बहस कराई थी, जिससे गलतफहमी फैली। अब डॉ. जीनत की अपील के बाद मीडिया को सतर्क रहना चाहिए।

 सद्भाव की राह पर आगे बढ़ें

नाजिया इलाही खान प्रकरण बीजेपी के लिए एक स्पष्ट संदेश है - पार्टी विकास, एकता और राष्ट्रवाद पर विश्वास करती है, न कि नफरत और विभाजन पर। डॉ. जीनत अंसारी, जमाल सिद्दीकी जैसे नेताओं की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है।

कानूनी जांच अपना काम करेगी। उम्मीद है कि इस मामले से सबक लेकर सभी राजनीतिक दल और व्यक्ति सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे। भारत की एकता इसी में है कि हम मतभेदों के बावजूद सम्मान और संवाद का रास्ता अपनाएं।

नफरत का बाजार कभी नहीं चलता। सच्चाई, विकास और समावेशी भारत का सपना ही आगे का रास्ता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 28 Jun 2026