Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 6 June 2026

पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक बाजी: IRGC के US हमलों के बाद रुकी US-ईरान बातचीत को फिर शुरू करने की कोशिश

पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक बाजी: IRGC के US हमलों के बाद रुकी US-ईरान बातचीत को फिर शुरू करने की कोशिश - Friday World 7 Jun 2026
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में सीजफायर उल्लंघनों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ठीक इसी दौरान पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी का तेहरान दौरा हुआ है। पाकिस्तान US-ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटा दिख रहा है। क्या इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थ भूमिका को मजबूत कर पाएगा, या यह सिर्फ एक और डिप्लोमैटिक कोशिश साबित होगी जो क्षेत्रीय जटिलताओं में फंस जाएगी?

यह घटनाक्रम 2026 के शुरुआती महीनों से चले आ रहे US-ईरान संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान अप्रत्याशित रूप से प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है।

 पृष्ठभूमि: पाकिस्तान ब्रोकरेड सीजफायर

अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ था। यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उच्चस्तरीय संपर्क था। इस्लामाबाद में हुई बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घालिबाफ जैसे शीर्ष नेता शामिल हुए। हालांकि पूर्ण समझौता नहीं हो सका, लेकिन सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया।

पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभाई। चीन और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ अपने संबंधों का फायदा उठाते हुए इस्लामाबाद ने इस डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया। लेकिन सीजफायर नाजुक था। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाते रहे।

हालिया उल्लंघन और IRGC की प्रतिक्रिया

मई 2026 के अंत में अमेरिका ने ईरान के हORMुज प्रांत और स्ट्रेट ऑफ हORMुज के पास मिसाइल साइट्स तथा नावों पर हमले किए। अमेरिका ने इसे “सेल्फ-डिफेंस” बताया, लेकिन ईरान ने इसे “सीजफायर का घोर उल्लंघन” करार दिया। 

IRGC ने जवाबी कार्रवाई की। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों (कुवैत, बहरीन समेत) पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। IRGC कमांडरों ने साफ चेतावनी दी कि कोई भी आगे की आक्रामकता “अधिक निर्णायक” जवाब बुलाएगी। इन हमलों से क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ गया। कुवैत और बहरीन जैसे देशों ने भी इन हमलों की निंदा की।

इसी संदर्भ में पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी (या अन्य वरिष्ठ अधिकारी) का तेहरान दौरा हुआ। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी पहले ईरान जा चुके हैं। ये दौरे दर्शाते हैं कि पाकिस्तान डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने और बातचीत को फिर शुरू करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: अवसर और चुनौतियां

अवसर:
पाकिस्तान ईरान के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और सीमा संबंध रखता है। वहीं, अमेरिका के साथ उसकी लंबे समय से सैन्य और खुफिया सहयोग रहा है। चीन के साथ CPEC के जरिए मजबूत संबंध उसे दोनों पक्षों से बात करने की क्षमता देते हैं। पाकिस्तान ने खुद को “न्यूट्रल मध्यस्थ” के रूप में पेश किया है, जो दोनों को विश्वास दिला सके।

चुनौतियां:
- ईरान के अंदर IRGC का बढ़ता प्रभाव — कई कमांडर युद्ध की नीति और “दुश्मन से बातचीत बेकार” का पक्ष लेते हैं।  

- अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति।  

- इजराइल का कारक — इजराइल सीजफायर को लेकर अलग रुख रखता है, खासकर लेबनान और हिजबुल्लाह मुद्दे पर।  

- क्षेत्रीय गुटबंदी — सऊदी अरब, UAE जैसे देश अमेरिका के करीब, जबकि ईरान समर्थित गुट अलग।  

पाकिस्तान के लिए यह भूमिका जोखिम भरी भी है। अगर बातचीत सफल हुई तो पाकिस्तान की वैश्विक छवि मजबूत होगी। असफलता से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित करेगी।

 US-ईरान विवाद के मूल मुद्दे

1. ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम*— अमेरिका ईरान से उच्च संवर्धित यूरेनियम का निर्यात या नष्ट करने की मांग कर रहा है। ईरान इसे नागरिक उद्देश्य बताता है और पूर्ण समाप्ति से इनकार करता है।  

2. स्ट्रेट ऑफ हORMुज — वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण रास्ता। ईरान ने इसे बंद करने की धमकी दी थी।  

3. क्षेत्रीय प्रॉक्सी युद्ध — लेबनान, यमन, इराक और सीरिया में ईरान समर्थित समूह।  

4. आर्थिक प्रतिबंध और फ्रोजन एसेट्स — ईरान अमेरिका से फ्रोजन संपत्ति छोड़ने की मांग करता है।  

ये मुद्दे दशकों पुराने हैं, लेकिन 2026 के युद्ध ने उन्हें और जटिल बना दिया।

 पाकिस्तान की डिप्लोमेसी का भविष्य

पाकिस्तान के अधिकारी तेहरान में ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर US के प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं। पाकिस्तान US को ईरानी संदेश पहुंचा रहा है और vice-versa। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान दूसरा दौरा वार्ता आयोजित करने की कोशिश कर रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की यह भूमिका दक्षिण एशिया की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। भारत के साथ तनाव के बावजूद पाकिस्तान मध्य पूर्व में अपनी जगह बना रहा है।

हालांकि, सफलता आसान नहीं। IRGC के हालिया मिसाइल हमलों के बाद विश्वास का संकट गहरा गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर “बदनीयती” का आरोप लगा रहे हैं।

 क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक निहितार्थ

- खाड़ी देश: कुवैत, बहरीन, UAE जैसे देश अमेरिकी ठिकानों पर हमलों से चिंतित हैं। उनकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।  

- चीन: पाकिस्तान के सबसे बड़े सहयोगी के रूप में शांति चाहता है, क्योंकि उसकी ऊर्जा आपूर्ति हORMुज से गुजरती है।  

- रूस: ईरान का समर्थक, लेकिन जटिल भूमिका।  

- भारत: पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका को नजरअंदाज नहीं कर सकता।  

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल की कीमतें बढ़ी हैं, शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं।

 शांति की उम्मीद या नया चक्र?

पाकिस्तान IRGC के हमलों के बाद US-ईरान बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश सराहनीय है, लेकिन क्षेत्र की जटिलताएं बहुत गहरी हैं। सफलता के लिए दोनों पक्षों को समझौता करना होगा — ईरान को न्यूक्लियर पारदर्शिता देनी होगी और अमेरिका को आर्थिक राहत तथा सुरक्षा गारंटी देनी होगी।

पाकिस्तान की मध्यस्थता अगर कामयाब हुई तो न सिर्फ क्षेत्र शांत होगा, बल्कि इस्लामाबाद की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया अध्याय जुड़ेगा। लेकिन अगर असफल रही तो मध्य पूर्व में नया युद्ध चक्र शुरू हो सकता है, जिसके परिणाम दूरगामी होंगे।

अभी फिलहाल इंतजार है — पाकिस्तानी राजनयिकों की मेहनत, तेहरान और वाशिंगटन के फैसलों और IRGC की अगली चाल का। शांति की राह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 7 Jun 2026