Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 6 June 2026

मीडिया की चुप्पी और विपक्ष की 'चुनिंदा गुस्सा': NEET-CBSE विवाद में सवालों का तूफान

मीडिया की चुप्पी और विपक्ष की 'चुनिंदा गुस्सा': NEET-CBSE विवाद में सवालों का तूफान
- Friday World 7 Jun 2026
भारत के युवा आज शिक्षा व्यवस्था के भरोसे टूट रहे हैं। NEET-UG 2026 का पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने का फैसला, फिर CBSE बोर्ड परीक्षाओं में असमान कठिनाई, मूल्यांकन विवाद और छात्रों के भविष्य से जुड़ी अनिश्चितता ने पूरे देश को हिला दिया है। पिछले 15 दिनों से कांग्रेस और उसकी छात्र संगठन NSUI व Youth Congress तमाम शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। सड़कों पर पानी की बौछारें झेलते, धूप में तपते युवा कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लेकिन यह आंदोलन अचानक 'अदृश्य' क्यों हो गया? मेनस्ट्रीम मीडिया, यूट्यूब के बड़े चैनल, सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया के 'वायरल' चेहरे कहां गायब हैं? जब विपक्षी एकता की कोशिशें हो रही हैं, तो क्या यह प्रदर्शन वोट बिखराव की नई स्क्रिप्ट है? 

यह सवाल सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की निष्पक्षता, मीडिया की स्वतंत्रता और युवा भविष्य के साथ खिलवाड़ का है। 

NEET 2026 विवाद: छात्रों का सपना बिक गया?

मई 2026 में आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। लाखों छात्रों ने सालों की तैयारी की, कोचिंग फीस दी, रात-दिन मशक्कत की—सब कुछ पलों में धूल हो गया। CBI जांच चल रही है, दोबारा परीक्षा का ऐलान हुआ है, लेकिन छात्रों में गुस्सा और आक्रोश चरम पर है। कांग्रेस ने इसे BJP सरकार की नाकामी बताते हुए देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किए। जयपुर में पानी की बौछारें, दिल्ली में बैरिकेडिंग, हरियाणा, ओडिशा समेत कई राज्यों में मार्च—सब कुछ हुआ।

NSUI और Youth Congress के कार्यकर्ता मॉक डॉक्टर कोट पहनकर, लाल स्याही लगाकर सड़कों पर उतरे। राहुल गांधी ने इसे "युवाओं के भविष्य के साथ अपराध" बताया। लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े मुद्दे पर पूर्ण मीडिया कवरेज क्यों नहीं? कुछ पत्रकारों ने खुद 'मीडिया ब्लैकआउट' की शिकायत की। एक तरफ छोटे-मोटे प्रदर्शन या विपक्षी दलों के अन्य मुद्दों पर 24x7 डिबेट, तो दूसरी तरफ इस छात्र आंदोलन पर चुप्पी।

 CBSE का संकट: बोर्ड परीक्षाओं में भी अनियमितताएं

NEET अकेला नहीं। CBSE कक्षा 12वीं के रिजल्ट और मूल्यांकन में भी बड़े सवाल उठे हैं। छात्रों का कहना है कि मैथ्स, फिजिक्स जैसे विषयों में सेटों की कठिनाई असमान थी, OSM (ओपन स्क्रिप्ट मॉडरेशन) में गड़बड़ियां हुईं, अपेक्षा से कम मार्क्स आए। पुनर्मूल्यांकन की मांग, PIL दायर हुए, छात्रों में हताशा बढ़ी। कुछ जगहों पर CBSE-NEET दोनों मुद्दों को लेकर संयुक्त प्रदर्शन भी हुए।

छात्रों का गुस्सा जायज है। मध्यम वर्गीय परिवार डॉक्टर, इंजीनियर बनने के सपने देखते हैं। कोचिंग का कारोबार अरबों का है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं तो पूरा सिस्टम ही संदिग्ध हो जाता है। पिछले सालों में भी NEET में लीक के मामले सामने आए थे। NTA की विश्वसनीयता पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

 मीडिया की दोहरी नीति: सिलेक्टिव आउटेज

सवाल सबसे बड़ा मीडिया पर है। जब किसान आंदोलन, CAA-NRC या कोई अन्य मुद्दा होता है तो टीआरपी के लिए 24 घंटे कवरेज। लेकिन जब कांग्रेस छात्रों के मुद्दे पर सड़क पर है, तो चुप्पी। यूट्यूब पर बड़े-बड़े 'न्यूट्रल' या 'एंटी-एस्टेब्लिशमेंट' चैनल भी इस पर गहरी चुप्पी साधे हुए हैं। सेलिब्रिटीज, जो हर छोटे-बड़े इश्यू पर ट्वीट कर ट्रेंडिंग बनाते हैं, यहां गायब। 

क्या कारण है? 

1. नैरेटिव कंट्रोल: मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सरकार-समर्थक या विपक्ष-विरोधी नैरेटिव पर चलता है। अगर प्रदर्शन BJP शासित राज्यों में ज्यादा दिखे तो 'विपक्षी राजनीति' कहकर डिस्काउंट कर दिया जाता है।

2. ट्रेंडिंग मैनिपुलेशन: 'Cockroach Janta Party' जैसे नए ग्रुप्स या अन्य छात्र आंदोलनों को ज्यादा जगह मिल रही है, जबकि स्थापित विपक्षी प्रदर्शनों को इग्नोर। यह संयोग नहीं लगता।

3. विपक्ष की विश्वसनीयता: कांग्रेस पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद और पुरानी असफलताओं का ठप्पा है। जब वह शिक्षा सुधार की बात करती है तो लोग पूछते हैं—पिछले अपने शासन में क्या किया? इसीलिए कवरेज कम।

लेकिन सवाल युवाओं का है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह मुद्दे को कवर करे, न कि राजनीतिक रंग देखे।

क्या यह प्रायोजित बिखराव की स्क्रिप्ट है?

विपक्षी दलों में हाल ही में एकता की कोशिशें देखी गईं—कुछ चुनावी नाकामियों के बाद। ठीक उसी समय NEET-CBSE मुद्दा उछला और कांग्रेस अलग-अलग प्रदर्शन कर रही है। कुछ विश्लेषक इसे 'संगी स्क्रिप्ट' कह रहे हैं—यानी BJP विरोधी वोटों को बांटने की रणनीति। जब INDIA गठबंधन मजबूत हो रहा था, तभी ऐसे मुद्दे पर विपक्ष खुद अलग लाइन ले रहा है।

दूसरी तरफ, सच्चाई यह भी है कि शिक्षा एक राष्ट्रीय मुद्दा है। पेपर लीक, NTA की नाकामी, CBSE की कमियां—ये किसी एक पार्टी की नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता है। पिछले 10-12 सालों में परीक्षा सुधार की कई कोशिशें हुईं, लेकिन स्कैंडल रुक नहीं रहे। डिजिटल पेपर, बेहतर सुरक्षा, AI मॉनिटरिंग—ये समाधान हैं, लेकिन लागू करने की इच्छाशक्ति कहां?

 युवा भारत का गुस्सा: समाधान क्या?

छात्रों को राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। 

- परीक्षा सुधार: NTA को भंग कर नई, स्वायत्त, पारदर्शी एजेंसी बनाएं। पेपर लीक पर सख्त सजा, डिजिटल लॉक सिस्टम।

- CBSE ओवरहॉल: मूल्यांकन में uniformity, ग्रेस मार्क्स की बजाय बेहतर पेपर सेटिंग।

- कोचिंग माफिया पर लगाम: फीस रेगुलेशन, छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने के लिए काउंसलिंग।

- विकल्प: स्किल डेवलपमेंट, वोकेशनल कोर्स, विदेशी विश्वविद्यालयों से टाई-अप बढ़ाएं ताकि NEET-CBSE ही इकलौता रास्ता न रहे।

राजनीतिक दल चाहे जो कहें, लेकिन प्रदर्शन अगर सिर्फ वोट बैंक के लिए हैं तो छात्र धोखा खाएंगे। असली बदलाव सिस्टम में आएगा, न कि सड़क पर नारेबाजी से।

: सत्य की आवाज को दबने न दें

NEET और CBSE के मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन चल रहे हैं। कुछ जगहों पर पुलिस कार्रवाई भी हुई। लेकिन मीडिया की चुप्पी चिंताजनक है। यह चुप्पी बताती है कि हमारा मीडिया कितना polarized हो चुका है। सेलिब्रिटीज और इन्फ्लुएंसर्स की चुप्पी युवाओं के साथ अन्याय है।

लोकतंत्र में विरोधी आवाज जरूरी है। लेकिन वह प्रायोजित या वोट-बिखराव वाली न हो। छात्रों का भविष्य राजनीति से ऊपर है। सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए—चाहे CBI रिपोर्ट हो या इस्तीफे। विपक्ष को भी सिर्फ आरोप नहीं, ठोस समाधान देना चाहिए।

जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं आएगी, युवा गुस्सा फूटता रहेगा। मीडिया को अपना फर्ज निभाना चाहिए—सच्चाई दिखाना, न कि चुप्पी साधना। वरना यह 'चुनिंदा गुस्सा' न सिर्फ छात्रों का, बल्कि पूरे लोकतंत्र का नुकसान करेगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 7 Jun 2026