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Tuesday, 14 July 2026

पश्चिम एशिया युद्ध का झटका! 6 महीने में दुबई में हाउसिंग सेल्स 16% गिरी - भारतीय खरीदारों पर भी असर

पश्चिम एशिया युद्ध का झटका! 6 महीने में दुबई में हाउसिंग सेल्स 16% गिरी - भारतीय खरीदारों पर भी असर - Friday World Jul 14 2026 


225.70 अरब दिरहम के हुए सौदे, फरवरी से अप्रैल में दाम 7% तक टूटे - क्या ये गिरावट अस्थायी है या लंबी मंदी की शुरुआत?

मुंबई: दुनिया का सबसे चमकता हुआ रियल एस्टेट हब दुबई इस समय दबाव में है। पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध का सीधा असर दुबई की प्रॉपर्टी मार्केट पर देखने को मिल रहा है। 2026 की पहली छमाही में दुबई में आवासीय प्रॉपर्टी की बिक्री में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से जून 2026 के बीच दुबई में कुल 225.70 अरब दिरहम के प्रॉपर्टी सौदे हुए हैं। भू-राजनीतिक तनाव के चलते खरीदारों की मानसिकता बदली है और मार्च-अप्रैल में बिक्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह असर अस्थायी है और लॉन्ग टर्म में दुबई की मार्केट फिर से पटरी पर लौट आएगी।

 1. युद्ध की एंट्री और मार्केट पर असर

फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ। इसका असर 15 दिन के अंदर ही दुबई पहुंच गया।

क्या हुआ मार्केट में:
1. पूछताछ गिरी: फरवरी से अप्रैल तक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आने वाली इनक्वायरी में 30 से 40 फीसदी तक की कमी आई। NRI और विदेशी निवेशक "वेट एंड वॉच" मोड में चले गए।
2. दामों में गिरावट: इसी दौरान रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में 4 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट आई। खासकर लग्जरी और सी-फेसिंग अपार्टमेंट्स में डेवलपर्स को डिस्काउंट देना पड़ा।
3. शेयर बाजार ध्वस्त: DFM रियल एस्टेट स्टॉक इंडेक्स अपने ऑल टाइम हाई से 34 प्रतिशत तक टूट गया। इससे डेवलपर्स की फंडिंग और कॉन्फिडेंस दोनों पर असर पड़ा।

रियल एस्टेट ब्रोकर बताते हैं कि मार्च और अप्रैल में मार्केट लगभग ठप था। लोगों को डर था कि अगर युद्ध लंबा चला तो दुबई की सुरक्षा और इकॉनमी पर असर पड़ेगा।

 2. राहत की खबर: सीजफायर के बाद रिकवरी

हालांकि ये गिरावट स्थायी नहीं दिख रही। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जैसे ही सीजफायर की घोषणा हुई, मार्केट में तुरंत सुधार दिखा।

मई और जून में खरीदार फिर से एक्टिव हुए। खासकर वो निवेशक जिन्हें "डिस्काउंट पर डील" चाहिए थी, उनके लिए ये सुनहरा मौका बन गया। एजेंट्स का कहना है कि मौजूदा गिरावट एक "हेल्दी करेक्शन" है, मंदी नहीं।

दुबई सरकार और बड़े डेवलपर्स ने भी कॉन्फिडेंस वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाए। गोल्डन वीजा, टैक्स बेनिफिट और आसान EMI स्कीम्स को फिर से प्रमोट किया गया।

 3. भारतीय खरीदार: दुबई मार्केट की रीढ़

दुबई की प्रॉपर्टी मार्केट में भारतीयों का रोल सबसे बड़ा है। 2025 के आंकड़े इसे साबित करते हैं।

2025 के बड़े आंकड़े:
- कुल सौदे: 2,06,166 
- कुल बिक्री: 547 अरब दिरहम
- भारतीय खरीदारों की हिस्सेदारी: 22%
- 150 से ज्यादा देशों के लोगों ने दुबई में घर खरीदा

दुबई भारतीयों के लिए सेकंड होम का नंबर-1 डेस्टिनेशन क्यों है?
1. 0% इनकम टैक्स: कमाई पर कोई टैक्स नहीं
2. 10 साल का गोल्डन वीजा: 2 मिलियन दिरहम की प्रॉपर्टी पर
3. मुंबई से 3 घंटे की फ्लाइट: कनेक्टिविटी आसान
4. मजबूत इंडियन कम्युनिटी: स्कूल, बिजनेस और सोशल नेटवर्क

युद्ध के समय भी भारतीय खरीदार पूरी तरह से मार्केट से बाहर नहीं हुए। कई लोगों ने अप्रैल-मई में दाम गिरने का फायदा उठाकर डील क्लोज की।

 4. एक्सपर्ट व्यू: ये मौका है या रिस्क?

दुबई के टॉप रियल एस्टेट कंसल्टेंट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए एंट्री का मौका है।

पॉजिटिव पॉइंट्स:
1. प्राइस करेक्शन: पिछले 2 साल में दुबई में दाम 25% तक बढ़ गए थे। 4-7% की गिरावट से मार्केट बैलेंस हुआ है।
2. किराए की डिमांड बरकरार: दुबई में रेंटल यील्ड अभी भी 6 से 8 प्रतिशत है। ये लंदन और न्यूयॉर्क से कहीं ज्यादा है। इसलिए निवेशक अभी भी इंटरेस्टेड हैं।
3. सरकारी प्लान: दुबई 2040 अर्बन मास्टर प्लान पर काम कर रहा है। नए इलाके, मेट्रो एक्सटेंशन और इंफ्रा प्रोजेक्ट से लॉन्ग टर्म डिमांड बढ़ेगी।

नेगेटिव रिस्क:
1. युद्ध फिर भड़का तो: अगर पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ता है तो खरीदार फिर पीछे हट सकते हैं।
2. ग्लोबल मंदी: अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरें ऊंची हैं। इससे NRI के पास लिक्विडिटी कम है।
3. सप्लाई ज्यादा: 2026 में 50,000 से ज्यादा नए फ्लैट हैंडओवर होने हैं। अगर डिमांड नहीं बढ़ी तो दामों पर और दबाव आएगा।

 5. अगले 6 महीने का आउटलुक

रिपोर्ट कहती है कि 2026 की दूसरी छमाही में मार्केट धीरे-धीरे रिकवर करेगा। इसके 3 बड़े कारण हैं:

1. सीजफायर का टिकना: अभी सीजफायर कायम है। अगर ये बना रहा तो बायर कॉन्फिडेंस वापस आएगा।
2. इवेंट्स और टूरिज्म: साल के अंत में दुबई में बड़े इंटरनेशनल इवेंट हैं। इससे शॉर्ट टर्म रेंटल और प्रॉपर्टी डिमांड बढ़ेगी।
3. भारतीयों की वापसी: दिवाली और ईयर एंड पर भारतीय दुबई में सबसे ज्यादा निवेश करते हैं। 22% हिस्सेदारी वाले भारतीय मार्केट को सपोर्ट करेंगे।

हालांकि डेवलपर्स को सलाह दी गई है कि वो सिर्फ लग्जरी प्रोजेक्ट न लाएं। मिड-सेगमेंट और अफोर्डेबल हाउसिंग की डिमांड ज्यादा है।

 6. भारतीय निवेशकों के लिए 3 जरूरी टिप्स

अगर आप दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो ये 3 बातें ध्यान रखें:

1. लोकेशन सबसे जरूरी: डाउनटाउन, दुबई मरीना और पाम जुमेराह में रेंटल डिमांड सबसे ज्यादा है। दाम भले थोड़े ज्यादा हों लेकिन रीसेल वैल्यू बेस्ट मिलती है।
2. ऑफ-प्लान में सावधानी: कई डेवलपर डिस्काउंट दे रहे हैं। लेकिन डेवलपर की साख और प्रोजेक्ट की डिलीवरी टाइमलाइन जरूर चेक करें।
3. करेंसी रिस्क: दिरहम डॉलर से पेड है। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो आपकी कॉस्ट बढ़ जाएगी।

 7. दुबई vs बाकी ग्लोबल मार्केट

जब लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर में प्रॉपर्टी की यील्ड 2 से 4 प्रतिशत है, तब दुबई 6 से 8 प्रतिशत यील्ड दे रहा है। साथ में टैक्स भी नहीं। 

इसीलिए भले ही शॉर्ट टर्म में 16% की गिरावट आई हो, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए दुबई आज भी सबसे आकर्षक मार्केट है। खासकर भारतीय, पाकिस्तानी, ब्रिटिश और रूसी खरीदारों के लिए।

 घबराएं नहीं, लेकिन समझदारी से निवेश करें

दुबई में 6 महीने में 16% की गिरावट की खबर सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। पश्चिम एशिया का युद्ध एक "ब्लैक स्वान" घटना थी। इसका सबसे ज्यादा असर मार्च-अप्रैल में दिखा। लेकिन सीजफायर के बाद मार्केट वापस रिकवर कर रहा है।

दुबई की ताकत उसकी सेफ्टी, टैक्स फ्री पॉलिसी और ग्लोबल कनेक्टिविटी है। एक युद्ध से इसकी नींव नहीं हिल सकती।

भारतीय खरीदारों के लिए ये समय "बाइंग अपॉर्चुनिटी" हो सकता है। क्योंकि दाम में थोड़ी गिरावट और डेवलपर्स की ऑफर की वजह से अच्छी डील मिल सकती है। 

बस निवेश से पहले लोकेशन, डेवलपर और अपने फाइनेंस का सही एनालिसिस करना जरूरी है। दुबई आज भी दुनिया के सबसे सुरक्षित और प्रॉफिटेबल रियल एस्टेट मार्केट्स में से एक है। बस थोड़ा सब्र और रिसर्च की जरूरत है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Jul 14 2026 

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