- Friday World Jul 20 2026
_सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 23वें दिन देशभर में उबाल, अहमदाबाद में भी NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन_
दिल्ली की सड़कों पर जंग का मैदान
सोमवार, 29 अप्रैल 2026। दिल्ली का दिल कहे जाने वाले जंतर-मंतर से लेकर संसद तक का रास्ता आज रणक्षेत्र बन गया। "कोकरोच जनता पार्टी" यानी CJP के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्च का ऐलान किया था। मांग थी - शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET पेपर लीक की CBI जांच और सोनम वांगचुक की 3 शर्तें मानना।
लेकिन मार्च शुरू होते ही दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त टकराव हो गया। राजीव चौक और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के अंदर प्रदर्शनकारी घुस गए। कई जगह बैरिकेड तोड़े गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। आरोप है कि इसमें कई लोगों के सिर फूट गए और दर्जनों घायल हुए। हालांकि दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज से चोट लगने की बात से इनकार किया है।
क्या हुआ था पूरा घटनाक्रम?
सुबह 10 बजे - जंतर-मंतर से कूच
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपक के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग जंतर-मंतर पर जमा हुए। हाथों में तिरंगा, बैनर और "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ" के नारे। अभिजीत दीपक ने मंच से कहा: _"हमें कोई रोक नहीं सकता। ये मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।"_
11:30 बजे - मेट्रो स्टेशन में घुसपैठ
जैसे ही मार्च संसद की तरफ बढ़ा, पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी। RAF और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात थे। अनुमति न होने का हवाला देकर पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका।
आक्रोशित प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के अंदर घुस गए। कुछ लोग तो पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन तक पहुंच गए। वहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
12:15 बजे - लाठीचार्ज और अफरा-तफरी
जंतर-मंतर पर बचे हुए प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। चश्मदीदों का कहना है कि पुलिस ने बिना चेतावनी के डंडे बरसाए। कई लोगों के सिर से खून निकला। कई महिलाएं और बुजुर्ग भी इसमें शामिल थे।
पुलिस का पक्ष: _"हमने सिर्फ हल्का बल प्रयोग किया ताकि भीड़ को काबू किया जा सके। किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।"_
सोनम वांगचुक की 3 शर्तें: भूख हड़ताल जारी
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बचाए और NEET पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी ले।
आज उन्होंने भूख हड़ताल तोड़ने के लिए सरकार के सामने 3 शर्तें रखीं:
1. सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी ले और सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
2. CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने दिया जाए और सांसद सदन में इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दें।
3. अगर स्वास्थ्य कारणों से ये संभव न हो तो सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर यही आश्वासन दें।
वांगचुक की हालत लगातार बिगड़ रही है। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है, लेकिन वो अपनी मांगों पर अड़े हैं।
अहमदाबाद में भी गूंजा विरोध
दिल्ली की आग का असर गुजरात तक पहुंचा। अहमदाबाद के लॉ गार्डन के पास "हैप्पी स्ट्रीट" पर दर्जनों छात्र और अभिभावक सड़क पर उतर आए।
मांगें थीं:
- NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- सोनम वांगचुक के समर्थन में सरकार से बातचीत
- छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो
प्रदर्शनकारी "भाजपा हाय हाय" और "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारे लगाते हुए बैनर लेकर सड़क पर आ गए। आनन-फानन में ACP और DCP समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर हिरासत में लिया। कुछ देर के लिए ट्रैफिक भी बाधित रहा।
CJP कौन है और क्यों कर रही है विरोध?
"कोकरोच जनता पार्टी" कोई रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। ये छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक समूह है जो पिछले 2 साल से शिक्षा सुधार की मांग कर रहा है। नाम "कोकरोच" इसलिए क्योंकि उनका कहना है _"जैसे कॉकरोच को मारा नहीं जा सकता, वैसे ही छात्रों की आवाज को भी दबाया नहीं जा सकता।"_
पिछले 6 महीने में देशभर में 4 बड़े पेपर लीक हुए हैं। NEET, CUET और कई राज्य स्तरीय परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। CJP का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही।
राजनीति गरमाई
विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता ने कहा: _"तानाशाही की हद है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज। शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।"_
सरकार का जवाब:
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा: _"प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। मेट्रो और संसद की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता। कानून अपना काम करेगा।"_
5 बड़े सवाल जो इस आंदोलन ने खड़े किए
1. क्या शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है?
2 साल में 4 पेपर लीक। करोड़ों छात्रों का भरोसा टूटा है।
2. प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
CJP का कहना है कि उन्होंने 15 दिन पहले आवेदन दिया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
3. पुलिस का लाठीचार्ज जायज था?
वीडियो फुटेज में पुलिस को भीड़ पर डंडे बरसाते देखा गया। मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी किया है।
4. सोनम वांगचुक की शर्तें मानी जाएंगी?
सरकार अभी तक चुप है। अगर बात नहीं बनी तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
5. आगे क्या?
CJP ने ऐलान किया है कि अगर 48 घंटे में मांगें नहीं मानी गईं तो 1 मई को देशभर में "शिक्षा बंद" का आह्वान किया जाएगा।
आम लोगों की राय
राजीव चौक पर ड्यूटी कर रहे मेट्रो कर्मचारी रमेश: _"हम भी छात्रों के साथ हैं, लेकिन मेट्रो में तोड़फोड़ सही नहीं। आम लोग परेशान हुए।"_
प्रदर्शन में शामिल छात्रा प्रिया, जो NEET की तैयारी कर रही है: _"2 साल से पढ़ रही हूं। पेपर लीक हो गया तो मेरा क्या कसूर? सरकार को जवाब देना होगा।"_
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर
BBC, अल-जजीरा और न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस मार्च को कवर किया। हेडलाइन थी: _"India's Students Rise: Police Clash as Education Protest Turns Violent"_
अब आगे क्या होगा?
1. दिल्ली पुलिस ने 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। उन पर सरकारी काम में बाधा और दंगा भड़काने के केस दर्ज होंगे।
2. स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट ले रही है।
3. संसद का सत्र कल से शुरू है। विपक्ष इस मुद्दे को सदन में उठाने की तैयारी में है।
आवाज दबेगी या सुनी जाएगी?
आज दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ वो सिर्फ एक मार्च नहीं था। ये देश के युवाओं की हताशा थी। पेपर लीक से टूटे सपनों की चीख थी।
सरकार कहती है कानून व्यवस्था जरूरी है। प्रदर्शनकारी कहते हैं लोकतंत्र में आवाज जरूरी है।
बीच में फंसा है एक आम छात्र, जो बस पढ़कर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहता है।
क्या सरकार सोनम वांगचुक की 3 शर्तें मानेगी? क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे? या ये आंदोलन भी बाकी आंदोलनों की तरह ठंडा पड़ जाएगा?
फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन एक बात तय है - 29 अप्रैल 2026 को दिल्ली ने फिर देखा कि जब युवा सड़क पर उतरता है तो बैरिकेड भी छोटे पड़ जाते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 20 2026
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