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Friday, 3 July 2026

ट्रंप का सख्त ऐलान: पनामा कैनाल चीन के हाथ नहीं जाने देंगे, अमेरिका का ऐतिहासिक अधिकार वापस लेंगे

ट्रंप का सख्त ऐलान: पनामा कैनाल चीन के हाथ नहीं जाने देंगे, अमेरिका का ऐतिहासिक अधिकार वापस लेंगे - Friday World 3 Jul 2026

“पनामा कैनाल अमेरिका का इंजीनियरिंग चमत्कार है – इसे चीन की चपेट में नहीं पड़ने देंगे”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक रणनीति में अपना सख्त रुख दिखाया है। थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में दिए गए भाषण में उन्होंने पनामा कैनाल को लेकर चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा पर सीधा हमला बोला। ट्रंप ने कहा, “हम पनामा कैनाल को चीन के हाथों में कभी नहीं जाने देंगे। यह अमेरिका की रणनीतिक संपत्ति है और हमें इसे सुरक्षित रखना होगा।” 

यह बयान न केवल पनामा कैनाल की वर्तमान स्थिति बल्कि अमेरिका-चीन भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के एक बड़े अध्याय को उजागर करता है। 

 पनामा कैनाल का ऐतिहासिक महत्व

पनामा कैनाल दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। 1914 में अमेरिकी इंजीनियरों द्वारा बनाया गया यह कैनाल प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ता है। इससे पहले जहाजों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर के खतरनाक केप हॉर्न से गुजरना पड़ता था। कैनाल के बनने से जहाजों की यात्रा में हजारों मील और कई हफ्तों की बचत होती है। 

अमेरिका ने इस परियोजना में भारी निवेश किया था। राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के नेतृत्व में यह इंजीनियरिंग का चमत्कार बना। पहाड़ों को काटकर, लॉक सिस्टम बनाकर इस कैनाल को तैयार किया गया। आज भी यह अमेरिकी नवाचार और दूरदृष्टि का प्रतीक है।

 जिमी कार्टर का फैसला: ट्रंप की नजर में “मूर्खतापूर्ण कदम”

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर की तीखी आलोचना की। 1977 में कार्टर प्रशासन ने पनामा की सरकार के साथ संधि की, जिसके तहत 1999 में कैनाल का नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया। ट्रंप ने इसे “अत्यंत मूर्खतापूर्ण” बताया। 

उन्होंने कहा कि पनामा सरकार ने कैनाल पर नियंत्रण मिलते ही ट्रांजिट फीस (यातायात शुल्क) चार गुना बढ़ा दी। इससे न केवल अमेरिकी व्यापार पर बोझ बढ़ा, बल्कि वैश्विक शिपिंग कंपनियां भी प्रभावित हुईं। ट्रंप का आरोप है कि अब चीन इस कैनाल पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है।

 चीन की बढ़ती भूमिका: अमेरिका के लिए खतरा

वर्तमान में पनामा कैनाल के संचालन में एक चीनी कंपनी की भागीदारी है। ट्रंप का कहना है कि यह कंपनी वास्तव में चीनी सरकार से जुड़ी हुई है। अगर कैनाल चीन के प्रभाव में चला गया तो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। 

कैनाल के जरिए अमेरिकी नौसेना और व्यापारिक जहाज आसानी से दोनों महासागरों के बीच आवागमन करते हैं। यदि चीन इसका नियंत्रण हासिल कर लेता है तो वह अमेरिकी जहाजों पर दबाव बना सकता है, फीस बढ़ा सकता है या सामरिक रूप से रणनीतिक लाभ उठा सकता है। इससे अमेरिका की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सैन्य तैनाती और आर्थिक हित प्रभावित होंगे।

ट्रंप ने स्पष्ट कहा, “हम ऐसा होने नहीं देंगे।” यह बयान अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जिसमें रणनीतिक संपत्तियों को विदेशी नियंत्रण से बचाना शामिल है।

भू-राजनीतिक परिदृश्य

पनामा कैनाल पर चीन की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं। चीन “बेल्ट एंड रोड” पहल के तहत विश्व भर के बंदरगाहों और जलमार्गों में निवेश कर रहा है। पनामा में भी उसकी कंपनियां सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैनाल पर चीन का प्रभाव बढ़ा तो लैटिन अमेरिका में उसकी पैठ मजबूत हो जाएगी, जिससे अमेरिका के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में चुनौती बढ़ेगी।

ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे को न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा के नजरिए से देख रहा है। कैनाल के नियंत्रण में बदलाव से उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बीच व्यापारिक और सामरिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

 जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) पर ट्रंप का रुख

भाषण के दौरान ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान मूल रूप से अमेरिका में गुलामों के बच्चों के लिए बनाया गया था, न कि विदेश से आने वाले अप्रवासियों के लिए। हालांकि अदालत ने इसे स्वीकार किया है, लेकिन ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। 

यह मुद्दा उनके अप्रवासन नीति का हिस्सा है, जिसमें अवैध प्रवास को रोकना और अमेरिकी नागरिकता को संरक्षित रखना शामिल है।

 पनामा कैनाल: आर्थिक और सामरिक महत्व

- व्यापार: विश्व व्यापार का बड़ा हिस्सा इस कैनाल से गुजरता है। अनाज, तेल, ऑटोमोबाइल आदि का परिवहन आसान होता है।

- सैन्य: अमेरिकी नौसेना के लिए दोनों महासागरों के बीच तेज आवागमन संभव।

- आय: पनामा को कैनाल से अरबों डॉलर की आय होती है।

- विवाद: फीस वृद्धि और विदेशी प्रभाव ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।

ट्रंप का बयान इन सभी आयामों को छूता है। उन्होंने रूजवेल्ट की विरासत को याद करते हुए कहा कि अमेरिका ने इसे बनाया था, इसलिए उसका हक भी अमेरिका का है।

आगे की संभावनाएं

ट्रंप प्रशासन पनामा सरकार के साथ नए समझौते या दबाव की रणनीति अपना सकता है। अमेरिका कैनाल के संचालन में अधिक हिस्सेदारी या सुरक्षा गारंटी की मांग कर सकता है। चीन के साथ चल रही व्यापक व्यापारिक और प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा में यह एक और मोर्चा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा न केवल द्विपक्षीय बल्कि बहुपक्षीय कूटनीति को प्रभावित करेगा। लैटिन अमेरिकी देशों में अमेरिका की छवि और चीन की बढ़ती पहुंच के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

अमेरिका की मजबूत इच्छाशक्ति

डोनाल्ड ट्रंप का पनामा कैनाल वाला बयान उनकी विदेश नीति की निरंतरता दर्शाता है – जहां राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि ऐतिहासिक उपलब्धियां और सामरिक संपत्तियां विदेशी शक्तियों के हाथ नहीं जाने दी जाएंगी। 

पनामा कैनाल सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि अमेरिकी महत्वाकांक्षा, इंजीनियरिंग प्रतिभा और वैश्विक पहुंच का प्रतीक है। ट्रंप की इस लड़ाई में अमेरिका की जनता और सहयोगी देशों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। 

जैसा कि ट्रंप ने कहा – “हम इसे चीन के हाथों में नहीं जाने देंगे।” यह वाक्य भविष्य की कई कूटनीतिक लड़ाइयों की शुरुआत हो सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 3 Jul 2026