-Friday World Jul 16 2026
पश्चिम एशिया में पिछले कुछ हफ्तों से जो आग सुलग रही थी, वो अब भड़क कर पूरे गल्फ क्षेत्र में फैल गई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने "ऑपरेशन नस्र 2" के तहत अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ा झटका बहरैन और कुवैत में लगा, जहां अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों की आवाज़ों से रातें दहल गईं।
ईरानी मीडिया के मुताबिक ये हमले अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी और क़ेश्म द्वीप पर किए गए हमलों के "बदले" में किए गए हैं।
लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
बहरैन: शेख ईसा एयर बेस और फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर निशाने पर
अमेरिका की नेवी की फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय बहरैन की राजधानी मनामा में है। IRGC के बयान के अनुसार हमले के दूसरे चरण में बहरैन के शेख ईसा एयर बेस को टारगेट किया गया।
ईरान का दावा है कि इस हमले में:
- हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस और रिपेयर की सुविधा को नुकसान पहुंचा
- P-8 इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान का हैंगर तबाह हुआ
- अमेरिकी सैन्य ड्रोन ऑपरेशन का कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर निशाना बना
बहरैन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि देशभर में एयर रेड सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। मनामा और हमद टाउन में ड्रोन इंटरसेप्शन के दौरान गिरे मलबे से वाहनों में आग लग गई और घरों को नुकसान पहुंचा। एक 11 साल की बच्ची मामूली रूप से घायल भी हुई।
हालांकि CENTCOM ने इन दावों को "झूठा" बताया और कहा कि बहरैन की तरफ दागे गए 3 मिसाइलों को अमेरिका और बहरैन की एयर डिफेंस ने तुरंत इंटरसेप्ट कर लिया।
कुवैत: धमाकों से गूंजा आसमान, MQ-9 ड्रोन बेस तबाह
कुवैत में हालात और भी ज्यादा तनावपूर्ण रहे। यहां दो बड़े ठिकाने निशाने पर थे - अली अल सलेम एयर बेस और अहमद अल जाबेर एयर बेस।
IRGC का दावा है कि हमले में:
1. अली अल सलेम एयर बेस: MQ-9 ड्रोन के लॉन्च पैड को खास तौर पर टारगेट किया गया ताकि गल्फ में अमेरिकी निगरानी और हमले की क्षमता कमजोर हो। ईरान का कहना है कि यहां ईंधन भंडारण टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह कर दिए गए।
2. अहमद अल जाबेर एयर बेस: यहां FPS स्ट्रेटेजिक रडार सिस्टम को नष्ट किया गया।
3. अल शुऐबा वेयरहाउस: कुवैत के अल शुऐबा इलाके में एक महत्वपूर्ण सुविधा पर Shahed-136 आत्मघाती ड्रोन से हमला हुआ। फुटेज में ड्रोन को गोता लगाकर वेयरहाउस से टकराते देखा गया, जिसके बाद 70 फीट ऊंची आग की लपटें उठीं और काला धुआं आसमान में छा गया।
कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के मुताबिक आग पर जल्दी काबू पा लिया गया। 6 फायर टीमों के साथ सेना और नेशनल गार्ड को तैनात किया गया। कोई जनहानि नहीं हुई, सिर्फ भौतिक नुकसान हुआ।
कुवैती सेना ने भी माना कि देश में "शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों" का सामना किया जा रहा है और धमाकों की आवाज़ें एयर डिफेंस द्वारा इंटरसेप्शन के कारण हैं।
MQ-9 ड्रोन का क्या हुआ?
इस पूरे संघर्ष में MQ-9 रीपर ड्रोन सबसे ज्यादा चर्चा में है। ये अमेरिका का सबसे घातक निगरानी और हमलावर ड्रोन माना जाता है।
ईरान ने 2 दावे किए:
1. कुवैत में: अली अल सलेम बेस पर MQ-9 ड्रोन के रैंप को निशाना बनाकर कई ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त किए गए।
2. ईरान के ऊपर: IRGC ने दावा किया कि उसने ईरान के जाम शहर के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया।
"ऑपरेशन नस्र 2" - ईरान का बदला
IRGC ने इस पूरे अभियान को "ऑपरेशन नस्र 2" नाम दिया है। ईरानी सेना के अनुसार ये जवाबी कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के क़ेश्म द्वीप और सिरिक में टेलीकम्युनिकेशन टावर पर हमले के बाद की गई।
IRGC का बयान था: "शहीदों के पवित्र खून का बदला निश्चित और आसन्न है"।
ईरान ने सिर्फ बहरैन और कुवैत ही नहीं, बल्कि जॉर्डन के अज़राक एयर बेस और ओमान तक को निशाना बनाने का दावा किया। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उन्होंने ईरान से आए 5 मिसाइलों को मार गिराया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
अमेरिका का पलटवार और CENTCOM का बयान
अमेरिकी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की। CENTCOM ने कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ड्रोन-कैरियर जहाज पर बड़ा हमला किया, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई। इसके अलावा क़ेश्म द्वीप पर ईरानी सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NBC को दिए इंटरव्यू में कहा: "हमने कल रात उनकी अच्छी खबर ली"।
गल्फ देशों की प्रतिक्रिया और नागरिकों में दहशत
हमलों के बाद पूरे गल्फ में हाई अलर्ट है।
बहरैन: विदेश मंत्रालय ने हमलों को "संप्रभुता का खुला उल्लंघन" और "गल्फ की सुरक्षा के लिए खतरा" बताया। उन्होंने ईरान से तुरंत हमले रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना रोकटोक खोलने की मांग की।
कुवैत: रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने लोगों से अपील की कि वे मलबे या संदिग्ध वस्तुओं के पास न जाएं और सिर्फ आधिकारिक चैनलों से जानकारी लें।
आम नागरिकों में दहशत है। कुवैत की एक मिस्री महिला रीम ने कहा: "हम एक बड़े धमाके के साथ उठे। मेरे बच्चे डर गए थे और मैं उन्हें शांत नहीं कर पा रही थी"।
तेल और शिपिंग पर खतरा - होर्मुज जलडमरूमध्य बंद?
सबसे बड़ा खतरा अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस शिपमेंट का सबसे अहम रास्ता है।
ईरान ने इसे अपना "क्षेत्र" बताया और कहा कि वो "दुनिया के दूसरे छोर से आई लुटेरी सेना" को वहां अवैध हस्तक्षेप नहीं करने देगा। फरवरी 2026 के अंत से ईरान ने इस जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 में भी ईरान के हमलों और होर्मुज को बंद करने की कोशिशों की निंदा की गई है।
क्या होगा आगे? 3 बड़े सवाल
1. क्या जंग और बढ़ेगी?
IRGC ने कहा है कि वो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखेंगे। वहीं ट्रंप ने कहा है कि आने वाले दिनों में वो ईरान के परमाणु ठिकानों और पुलों को निशाना बनाएंगे।
2. गल्फ देश किस तरफ?
बहरैन, कुवैत और जॉर्डन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं। सऊदी अरब और UAE अभी सीधे इसमें नहीं कूदे हैं, लेकिन उनकी चिंता बढ़ गई है।
3. MQ-9 और ड्रोन युद्ध का भविष्य
इस संघर्ष ने दिखा दिया है कि अब युद्ध हवाई जहाजों से ज्यादा ड्रोन से लड़ा जा रहा है। MQ-9 जैसे महंगे ड्रोन का नष्ट होना अमेरिका के लिए बड़ा झटका है, और सस्ते Shahed-136 ड्रोन का इस्तेमाल ईरान की नई रणनीति है।
गल्फ में नया समीकरण
बहरैन और कुवैत में हुए हमले सिर्फ दो देशों की घटना नहीं हैं। ये अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी एक बड़ी जंग का हिस्सा बन गए हैं। एक तरफ अमेरिका "सतर्क, घातक और तैयार" रहने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान "निश्चित बदले" की धमकी दे रहा है।
फिलहाल किसी भी पक्ष ने बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जिस तरह मिसाइलें और ड्रोन आसमान में उड़ रहे हैं, उससे साफ है कि गल्फ अब पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा।
दुनिया की नजरें अब इस पर हैं कि क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी, या फिर होर्मुज की लपटें पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लेंगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 16 2026
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