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Saturday, 29 August 2026

अमेरिका का बारूद खत्म? ईरान जंग ने खाली किया आधा हथियार भंडार, दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति दुविधा में

अमेरिका का बारूद खत्म? ईरान जंग ने खाली किया आधा हथियार भंडार, दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति दुविधा में
- Friday World 29 Aug 2026
ईरान के साथ चली 5 महीने की जंग ने अमेरिका को एक ऐसी जगह ला खड़ा किया है, जिसकी कल्पना पेंटागन ने भी नहीं की थी। दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश आज अपने ही हथियारों की कमी से जूझ रहा है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जंग कैसे लड़ी जाए, बल्कि सवाल ये है कि अगर कल को कोई दूसरा मोर्चा खुल गया तो अमेरिका लड़ेगा कैसे?

पिछले एक महीने में आई कई बड़ी रिपोर्ट्स इसी खतरनाक सच्चाई की ओर इशारा कर रही हैं।

रिपोर्ट्स में क्या है? आंकड़े डराने वाले हैं

अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक CSIS (Center for Strategic and International Studies) और CNN की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन में अपने सबसे अहम हथियारों का बड़ा हिस्सा झोंक दिया है: 

- THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का लगभग 50% से 80% तक स्टॉक खत्म
- Patriot एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का लगभग 50% से 65% तक इस्तेमाल
- Tomahawk क्रूज मिसाइलों का लगभग 30% से 50% तक खर्च
- Precision Strike Missile (PrSM) और ATACMS जैसी लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलों का लगभग "virtually all" यानी लगभग पूरा भंडार खाली

एक रिपोर्ट में तो साफ लिखा गया कि जंग से पहले अमेरिका के पास THAAD के 452 इंटरसेप्टर और Patriot के 2,200 इंटरसेप्टर थे, लेकिन अब THAAD 278 से कम और Patriot 827 से भी कम बचे हैं। कुछ आंकड़ों में Patriot की संख्या 759 तक बताई जा रही है। 

Reuters ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की प्रिसिजन मिसाइलों का लगभग पूरा जखीरा इस्तेमाल कर लिया है, जिससे अब बाकी दुनिया में किसी भी बड़े संकट में जवाब देने की उसकी क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

"ना आगे जा सकते हैं, ना पीछे" - अमेरिका की सबसे बड़ी दुविधा

वीडियो में कही गई बात - "ना वापस जा सकता है ना जंग कर सकता है" - यही अमेरिका की मौजूदा रणनीतिक दुविधा है।

CSIS के सीनियर एडवाइजर और रिटायर्ड मरीन कर्नल Mark Cancian ने चेतावनी दी है कि अगर जंग इसी रफ्तार से कुछ दिन और चलती, तो अमेरिका के लिए Indo-Pacific यानी चीन फ्रंट पर जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता। उनका कहना है कि "हाई म्यूनिशन खर्च ने वेस्टर्न पैसिफिक में एक कमजोरी की खिड़की खोल दी है"। 

इसी चिंता के कारण ही NYT की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक बड़े बमबारी प्लान को टाल दिया। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन Gen. Dan Caine ने खुद ट्रंप को चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले से Middle East में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंटरसेप्टर खतरनाक स्तर तक खाली हो जाएंगे। खाड़ी देशों ने भी अमेरिका पर दबाव बनाया कि अगर US का एयर डिफेंस कमजोर हुआ, तो ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

भरपाई में लगेंगे सालों, फैक्ट्रियों में भी लिमिट

सबसे बड़ी चिंता भरपाई को लेकर है। पेंटागन ने Raytheon और Lockheed Martin जैसी कंपनियों के साथ प्रोडक्शन बढ़ाने के कॉन्ट्रैक्ट तो किए हैं, लेकिन जमीन पर हालात मुश्किल हैं।

CNN की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को अभी हर महीने सिर्फ 15 Tomahawk और 20 Patriot इंटरसेप्टर मिल रहे हैं, जबकि 2026 में THAAD की एक भी नई डिलीवरी नहीं होनी है। CSIS का अनुमान है कि इन स्टॉक्स को जंग से पहले वाले स्तर पर लाने में 3 से 5 साल लगेंगे, कुछ सिस्टम्स के लिए तो 2029-2030 तक इंतजार करना पड़ सकता है। 

यानी अगर आज कोई नया युद्ध छिड़ा, तो अमेरिका को हाई-रिस्क वाले मानवयुक्त फाइटर जेट मिशनों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा, क्योंकि दूर से मार करने वाली सुरक्षित मिसाइलें ही कम बची हैं।

ट्रंप का इनकार बनाम पेंटागन की हकीकत

दूसरी तरफ व्हाइट हाउस इस कमी को मानने से इनकार कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है, "हमारे पास massive amounts of munitions हैं, कुछ टाइप में तो virtual unlimited सप्लाई है, कुछ में थोड़ा टाइट है।" रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने तो CNN की रिपोर्ट को "Fake News" तक कह दिया।

पेंटागन के प्रवक्ता ने भी कहा कि अमेरिकी सेना के पास अभी भी राष्ट्रपति के आदेश पर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने की पूरी क्षमता है।

लेकिन सच ये है कि हथियार पूरी तरह खाली नहीं हुए, पर इतने ज्यादा घट गए हैं कि अमेरिका अब दो मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ने की अपनी पुरानी नीति पर कायम नहीं रह सकता। डिफेंस कंपनियां अलबामा और एरिजोना में नई फैक्ट्रियां बना रही हैं, पर जब तक प्रोडक्शन 1000 मिसाइल प्रति वर्ष तक नहीं पहुंचता, ये संकट बना रहेगा।

निष्कर्ष साफ है - ईरान युद्ध ने अमेरिका को जीत तो दी, लेकिन उसकी सैन्य ताकत की पोल भी खोल दी। अब दुनिया देख रही है कि सुपरपावर अपने ही बारूद की कमी से कैसे निपटता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 29 Aug 2026

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