-Friday World 23 Aug 2026
ढाका से इस्लामाबाद तक, एक ही स्क्रिप्ट, एक ही धमकी। भारत के दो पड़ोसी - बांग्लादेश और पाकिस्तान - पानी को हथियार बनाकर एक जैसी रणनीति पर चल पड़े हैं। सवाल गंभीर है: क्या भारत के खिलाफ एक अनौपचारिक जल-मोर्चा तैयार हो रहा है?
बांग्लादेश की दोहरी मांग: गारंटी क्लॉज और तीस्ता
19 अगस्त 2026 को ढाका में एक सेमिनार में बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री मोहम्मद शाहिद उद्दीन चौधरी अनी ने खुली चेतावनी दी। उनकी दो मांगें हैं:
1. गंगा जल संधि में गारंटी क्लॉज वापस लाओ: भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को हुई 30 साल की गंगा जल संधि 11 दिसंबर 2026 को खत्म हो रही है। बांग्लादेश चाहता है कि नई संधि में 1977 वाला गारंटी क्लॉज फिर से जोड़ा जाए। 1977 में जियाउर्रहमान के समय हुई पहली संधि में यह था कि सूखे के समय में भी बांग्लादेश को न्यूनतम पानी मिलेगा। 1982, 1985 के अस्थायी समझौतों और 1996 की फाइनल संधि से इसे हटा दिया गया।
आज के फॉर्मूले के मुताबिक फरक्का बैराज पर पानी 70,000 क्यूसेक से कम होने पर आधा-आधा बंटवारा। 11 मार्च से 10 मई के सबसे संवेदनशील समय में 35,000 क्यूसेक की गारंटी बारी-बारी से 10-10 दिन के लिए है। बांग्लादेश का कहना है, जलवायु परिवर्तन के कारण फरक्का पर पानी लगातार कम हो रहा है, इसलिए 40,000 क्यूसेक की पक्की गारंटी चाहिए।
2. तीस्ता का पानी दो: मंत्री ने कहा कि तीस्ता मास्टर प्लान का मुख्य काम अगले साल शुरू होगा। प्रधानमंत्री तारिक रहमान खुद फाइल देख रहे हैं। 2011 में मनमोहन सिंह के समय 42.5% भारत और 37.5% बांग्लादेश का ड्राफ्ट बना था, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध से लटका है। गजलडोबा बैराज के बाद तीस्ता का बहाव 200 क्यूमेक से घटकर 40 क्यूमेक रह गया है।
मंत्री ने कहा, "हम भारत से संबंध खराब नहीं करना चाहते, लेकिन यह हमारा अधिकार है। नहीं माने तो हम UN समेत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाएंगे।"
दूसरा किनारा: सिंधु पर पाकिस्तान का UN दांव
ठीक यही भाषा 4 महीने पहले पाकिस्तान ने बोली थी। अप्रैल 2026 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, तो पाकिस्तान UN सिक्योरिटी काउंसिल पहुंच गया था। वहां उसे कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, क्योंकि सिंधु संधि वर्ल्ड बैंक की गारंटी वाली द्विपक्षीय संधि है, UN का विषय नहीं।
लेकिन रणनीति एक जैसी है - द्विपक्षीय मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाओ।
UNECE वाटर कन्वेंशन - बांग्लादेश का नया हथियार
जून 2025 में बांग्लादेश ने एक बड़ा कदम उठाया। वह UNECE वाटर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाला दक्षिण एशिया का पहला देश बन गया। भारत इस कन्वेंशन का सदस्य नहीं है, इसलिए कानूनी तौर पर भारत पर यह लागू नहीं होता। फिर भी ढाका इसका इस्तेमाल नैतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय जल कानून का पालन कर रहा है।
भारत की चिंता यही है कि बांग्लादेश इस कन्वेंशन के जरिए 14 साझा नदियों के लिए एक नया संस्थागत ढांचा बनाने की मांग कर रहा है, जिसे भारत द्विपक्षीय मुद्दा मानता है।
क्या सच में संयुक्त मोर्चा बन रहा है?
दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य गठबंधन नहीं है, लेकिन तीन समानताएं खतरनाक संकेत देती हैं:
1. समय: दोनों संधियां 2026 में निर्णायक मोड़ पर हैं। गंगा संधि का नवीनीकरण और सिंधु संधि का निलंबन।
2. भाषा: दोनों "गारंटी", "अधिकार" और "अंतरराष्ट्रीयकरण" शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।
3. मंच: दोनों UN और अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहे हैं।
हाल ही में ढाका में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता भी हुई है, हालांकि पाक विदेश मंत्री इशाक डार का दौरा पहलगाम पर उनके विवादित बयान के बाद टल गया।
भारत के लिए चुनौती और रास्ता
भारत के पास 54 साझा नदियां हैं, लेकिन सिर्फ गंगा पर ही औपचारिक संधि है। भारत का पक्ष है कि सभी जल समझौते द्विपक्षीय हैं और निचले तटवर्ती देशों की चिंता का सम्मान करते हुए, ऊपरी तटवर्ती देश के किसानों और बाढ़ नियंत्रण का भी ध्यान रखना होगा। पश्चिम बंगाल सरकार को भी भरोसे में लेना जरूरी है, क्योंकि संविधान के तहत पानी राज्य का विषय है।
सरकार ने पहले ही सभी हितधारकों से राय ली है और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि अक्टूबर 2023 से मार्च 2025 तक हुई चार अंतर-मंत्रालयी बैठकों में शामिल हुए हैं।
तीस्ता से सिंधु तक पानी अब सिर्फ नदी नहीं, कूटनीति है। बांग्लादेश और पाकिस्तान का एक साथ UN का रुख करना भारत के लिए चेतावनी है कि जल कूटनीति को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की तरह ही देखना होगा। द्विपक्षीय वार्ता, वैज्ञानिक डेटा शेयरिंग और समय पर संधि नवीनीकरण ही इस नए मोर्चे को टूटने से बचा सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 23 Aug 2026
#WaterDiplomacy #TeestaRiver #IndusWaterTreaty #GangaTreaty #IndiaBangladesh #IndiaPakistan #FarakkaBarrage #UNWaterConvention #GuaranteeClause #SouthAsia