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Wednesday, 26 August 2026

"ट्रंप को शापिरो की खुली चुनौती - पेन्सिलवेनिया में मेल-इन वोटिंग पर हाथ डाला तो फिर कोर्ट में हराऊंगा!"

"ट्रंप को शापिरो की खुली चुनौती - पेन्सिलवेनिया में मेल-इन वोटिंग पर हाथ डाला तो फिर कोर्ट में हराऊंगा!"
-Friday World 27 Aug 2026
हैरिसबर्ग, पेन्सिलवेनिया -

अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर चुनावी अधिकारों को लेकर बड़ा टकराव शुरू हो गया है। पेन्सिलवेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। गवर्नर शापिरो ने ऐलान किया है कि वे ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा करेंगे ताकि मेल-इन वोटिंग पर रोक लगाने और चुनाव के नियमों को एकतरफा बदलने की किसी भी गैर-कानूनी कोशिश को रोका जा सके।

गवर्नर शापिरो ने अपने कड़े बयान में कहा, "मैं प्रेसिडेंट ट्रंप को अपने ट्रैक रिकॉर्ड की याद दिलाऊँगा कि मैं पेन्सिलवेनिया के फ्री, फेयर, सेफ और सिक्योर चुनावों को बचाने के लिए कोर्ट में उनके खिलाफ गया था - और जीता भी था। मैं ऐसा फिर से करने के लिए तैयार हूँ।"

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-इन वोटिंग को लेकर बहस तेज है।

पेन्सिलवेनिया में वोटिंग व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं

गवर्नर ने अपने राज्य के मतदाताओं को आश्वस्त करते हुए साफ कहा है कि पेन्सिलवेनिया में मेल से वोटिंग के बारे में कुछ भी नहीं बदला है। आप अभी भी मेल से पूरी तरह से सेफ और सिक्योर तरीके से वोट कर सकते हैं।

पेन्सिलवेनिया अमेरिका के उन प्रमुख स्विंग स्टेट्स में से एक है जहाँ मेल-इन वोटिंग का इतिहास काफी मजबूत है। 2019 में Act 77 कानून पास होने के बाद से यहाँ कोई भी योग्य मतदाता बिना किसी विशेष कारण के मेल-इन बैलेट के लिए आवेदन कर सकता है। 2020 और 2024 के चुनावों में लाखों पेन्सिलवेनियावासियों ने इस सुविधा का उपयोग किया था।

राज्यों का अधिकार बनाम फेडरल सरकार - संविधान क्या कहता है?

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू वह है जिसे गवर्नर शापिरो ने उठाया है। उन्होंने कहा, "भले ही डोनाल्ड ट्रंप हमारे चुनावों में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश करें, लेकिन संविधान साफ है: चुनाव के नियम बनाने का अधिकार राज्यों का है - फेडरल सरकार का नहीं।"

अमेरिकी संविधान के आर्टिकल I, सेक्शन 4 के अनुसार, चुनावों के समय, स्थान और तरीके को निर्धारित करने की प्राथमिक शक्ति राज्य विधानसभाओं के पास है। कांग्रेस इसमें हस्तक्षेप कर सकती है, लेकिन प्रेसिडेंट का एकतरफा कार्यकारी आदेश से राज्यों के चुनाव कानूनों को रद्द करना संवैधानिक रूप से अत्यंत विवादास्पद माना जाता है।

इसी आधार पर शापिरो का तर्क है कि मेल-इन वोटिंग को खत्म करने का कोई भी फेडरल आदेश अदालत में नहीं टिकेगा।

शापिरो का ट्रैक रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है?

जोश शापिरो सिर्फ गवर्नर नहीं हैं, इससे पहले वे पेन्सिलवेनिया के अटॉर्नी जनरल थे। 2020 के चुनाव के बाद जब ट्रंप कैंपेन ने पेन्सिलवेनिया के चुनाव परिणामों को कोर्ट में चुनौती दी थी, तो शापिरो ने ही राज्य की ओर से उस केस को लड़ा और जीत हासिल की थी।

इसलिए उनका यह कहना कि "मैं पहले भी जीता था और फिर जीतूंगा" केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक कानूनी अनुभव पर आधारित चेतावनी है।

आम मतदाता के लिए इसका क्या मतलब है?

1. अगर आप पेन्सिलवेनिया में रहते हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आपका मेल-इन बैलेट वैध है।
2. आप काउंटी चुनाव कार्यालय की वेबसाइट से अभी भी बैलेट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
3. सभी बैलेट्स को ट्रैक किया जाता है और वेरिफिकेशन के बाद ही गिना जाता है, जो इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाता है।

यह लड़ाई अब सिर्फ पेन्सिलवेनिया की नहीं रही, यह अमेरिका में वोटिंग राइट्स की भविष्य की दिशा तय करेगी। क्या चुनाव राज्यों के नियंत्रण में रहेंगे या वाशिंगटन से नियंत्रित होंगे - इसका फैसला अब अदालत में होगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 27 Aug 2026

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