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Thursday, 6 August 2026

श्रीलंका-वियतनाम भारत से अमीर? वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने खोली भारतीय राज्यों की पोल, दिल्ली-कर्नाटक आगे निकले

श्रीलंका-वियतनाम भारत से अमीर? वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने खोली भारतीय राज्यों की पोल, दिल्ली-कर्नाटक आगे निकले
- Friday World 7 Aug 2026
वर्ल्ड बैंक की ताजा कंट्री इनकम क्लासिफिकेशन रिपोर्ट (जुलाई 2026) ने एक बार फिर भारत की आर्थिक असमानता को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका और वियतनाम समेत कई देश लोअर-मिडिल इनकम से अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में पहुंच गए हैं, जबकि भारत अब भी लोअर-मिडिल इनकम ग्रुप में बना हुआ है। सवाल उठ रहा है—क्या वाकई श्रीलंका और वियतनाम भारत से अमीर हो गए? जवाब इतना सीधा नहीं है। कुल अर्थव्यवस्था के आकार में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय (GNI per capita) के पैमाने पर तस्वीर बिल्कुल अलग है।

### वर्ल्ड बैंक का पैमाना क्या कहता है?

वर्ल्ड बैंक देशों को प्रति व्यक्ति ग्रॉस नेशनल इनकम (GNI) के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है:
- लो-इनकम
- लोअर-मिडिल इनकम ($1,176 से $4,635 तक)
- अपर-मिडिल इनकम ($4,636 से $14,375 तक)
- हाई-इनकम

भारत की प्रति व्यक्ति GNI करीब 2,760-2,813 डॉलर है, जो अपर-मिडिल की सीमा से काफी नीचे है। इसके विपरीत वियतनाम की प्रति व्यक्ति आय लगभग 4,970 डॉलर और श्रीलंका की 4,500-5,000 डॉलर के आसपास पहुंच गई है। दोनों देश अब अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में हैं। फिलीपींस और जॉर्डन भी इसी लिस्ट में शामिल हुए।

यह वर्गीकरण कुल GDP पर नहीं, बल्कि औसत व्यक्ति की आय पर आधारित है। भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, इसलिए राष्ट्रीय औसत नीचे रहता है। वहीं छोटे देशों में आय का वितरण अपेक्षाकृत बेहतर दिखता है।

### भारतीय राज्यों की अलग-अलग कहानी

रिपोर्ट और राज्य-स्तरीय आंकड़ों (MoSPI डेटा के विश्लेषण) से साफ होता है कि भारत के अंदर दो अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं चल रही हैं। कुछ राज्य पहले ही वर्ल्ड बैंक की अपर-मिडिल इनकम सीमा को पार कर चुके हैं:

- दिल्ली: करीब 6,217 डॉलर  
- कर्नाटक: 5,579 डॉलर  
- तेलंगाना: 5,407 डॉलर  
- तमिलनाडु: 5,329 डॉलर  
- गुजरात: 4,734 डॉलर  

ये राज्य वियतनाम और श्रीलंका से आगे या लगभग बराबर हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल भी सीमा के बेहद करीब हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत के ये राज्य आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, सेवा क्षेत्र और निवेश के दम पर तेजी से आगे बढ़े हैं।

दूसरी ओर बिहार (लगभग 984 डॉलर), उत्तर प्रदेश (1,403 डॉलर) और झारखंड (1,470 डॉलर) जैसे राज्य राष्ट्रीय औसत से भी काफी नीचे हैं। कुछ आंकड़ों में ये नेपाल से भी कम प्रति व्यक्ति आय वाले बताए जाते हैं। यही असमानता भारत के राष्ट्रीय औसत को नीचे खींचती है।

### क्यों भारत पीछे रह गया?

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है। कुल GDP के मामले में वह कई विकसित देशों से आगे है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में चुनौतियां बनी हुई हैं। बड़ी आबादी, क्षेत्रीय असमानता, शिक्षा-स्वास्थ्य में अंतर और रोजगार की गुणवत्ता प्रमुख कारण हैं। वियतनाम ने निर्यात-आधारित विकास, मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश पर फोकस करके तेजी से प्रगति की। श्रीलंका ने 2022 के गहरे संकट के बाद रिकवरी की और पर्यटन तथा सेवा क्षेत्र से वापसी की।

भारत में भी कई राज्य इसी रास्ते पर चल रहे हैं। दिल्ली और कर्नाटक जैसी जगहों पर प्रति व्यक्ति आय कई मध्यम-आय वाले देशों से बेहतर है। लेकिन पूर्वी और उत्तरी कुछ राज्यों में विकास की गति धीमी रही है। पिछले तीन दशकों में राज्यों के बीच आय की असमानता बढ़ी है।

### क्या मतलब है इस रिपोर्ट का?

यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। यह नीति-निर्माताओं के लिए आईना है। भारत अगर 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना चाहता है तो सिर्फ राष्ट्रीय GDP ग्रोथ काफी नहीं। हर राज्य और हर नागरिक की आय बढ़नी चाहिए। गरीब राज्यों में शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। अमीर राज्य मॉडल बन सकते हैं, लेकिन असमानता कम करना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत 2030 के दशक की शुरुआत में अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में पहुंच सकता है, बशर्ते मौजूदा विकास दर बनी रहे और क्षेत्रीय असंतुलन कम हो। वर्ल्ड बैंक की पुरानी रिपोर्ट्स में भी भारत को 2032 तक इस लक्ष्य तक पहुंचने का अनुमान था।

### आगे की राह

श्रीलंका और वियतनाम का अपग्रेड उनकी मेहनत और सुधारों का नतीजा है। भारत के लिए सबक साफ है—विकास समावेशी होना चाहिए। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की सफलता को पूरे देश में दोहराना होगा। बिहार, यूपी और झारखंड जैसे राज्यों में निवेश, स्किल और उद्योग बढ़ाने से राष्ट्रीय औसत तेजी से ऊपर उठेगा।

यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था की ताकत उसके विविध राज्यों में छिपी है। कुछ राज्य पहले ही वैश्विक मध्यम-आय स्तर छू चुके हैं, जबकि कुछ अभी पीछे हैं। असली चुनौती इस खाई को पाटना है। जब तक हर भारतीय की जेब में ज्यादा पैसा नहीं आएगा, तब तक कुल GDP की बड़ी संख्या पर्याप्त नहीं मानी जाएगी।

वर्ल्ड बैंक की यह रिपोर्ट भारतीय नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और आम नागरिकों के लिए सोचने का मौका है। विकास सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर घर की समृद्धि में दिखना चाहिए। श्रीलंका और वियतनाम का उदाहरण प्रेरणा भी है और चेतावनी भी—प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना ही असली तरक्की है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 7 Aug 2026

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