-Friday World 4 Aug 2026
ईरान ने साफ कह दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। यह कोई अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं है। तेहरान का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान में युद्ध खत्म करने के लिए सोमवार से नई वार्ता शुरू होगी और इसी उद्देश्य से उन्होंने ईरान पर होने वाले बड़े पैमाने के हमलों को रोक दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है और ऐसी कोई योजना भी नहीं है। इसके बजाय, तेहरान और मस्कट (ओमान की राजधानी) के बीच एक अस्थायी व्यवस्था पर सहमति बनाने की कोशिश चल रही है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और अन्य वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित गुजर सकें।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और एलएनजी का बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इसकी चौड़ाई कुछ जगहों पर बहुत कम है और दोनों तरफ ईरान तथा ओमान की तटरेखाएं हैं। इसी वजह से दोनों देश इस मार्ग पर अपनी संप्रभुता का दावा करते रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान ने सुरक्षा चिंताओं और अमेरिकी-इजरायली कार्रवाइयों का हवाला देते हुए मार्ग को प्रतिबंधित या बंद रखने की रणनीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता फैल गई। कई टैंकरों को वापस लौटना पड़ा या वैकल्पिक लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ गए।
ओमान के साथ बातचीत: अंतिम चरण में
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कैबिनेट को जानकारी देते हुए कहा कि ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है और सहमति की ओर बढ़ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देश एक ऐसी नई समुद्री मार्ग व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जो न तो पूरी तरह उत्तरी मार्ग हो और न दक्षिणी, बल्कि दोनों पक्षों की संप्रभुता और सुरक्षा हितों का सम्मान करे।
ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। वह ईरान और खाड़ी के अन्य देशों के बीच संवाद का पुल बनाने में मदद करता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी समितियां भी गठित की गई हैं जो जहाजों के सुरक्षित गुजरने, समुद्री सेवाओं और संबंधित व्यवस्थाओं पर चर्चा कर रही हैं। ईरान का कहना है कि सिर्फ ओमान के साथ सहमति से स्ट्रेट पूरी तरह नहीं खुल जाएगा। व्यापक सुरक्षा गारंटी और अमेरिकी हमलों की समाप्ति भी जरूरी है।
ईरान ने बार-बार दोहराया है कि होर्मुज की समस्या ईरान और ओमान के बीच मतभेद की वजह से नहीं बनी, बल्कि बाहरी सैन्य कार्रवाइयों के कारण पैदा हुई। इसलिए केवल द्विपक्षीय तकनीकी समझौता पर्याप्त नहीं होगा।
ट्रंप का दावा और ईरान का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना भी शामिल है। उन्होंने बड़े हमलों को रोकने का फैसला किया और कहा कि नई बातचीत शुरू होगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वार्ता में कौन-कौन शामिल होंगे।
ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया। तेहरान का रुख साफ है कि वह इस समय अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं कर रहा। ईरानी अधिकारियों ने जोर दिया कि उनकी प्राथमिकता ओमान के साथ द्विपक्षीय व्यवस्था है। कुछ बयानों में यह भी कहा गया कि जब तक अमेरिकी शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां जारी रहेंगी, होर्मुज की स्थिति सामान्य नहीं हो सकती।
यह कूटनीतिक अदला-बदली क्षेत्र में जारी तनाव को दर्शाती है। फरवरी 2026 से चले आ रहे संघर्ष ने न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी गहरा असर डाला है।
तेल बाजार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा। जब आवाजाही रुकती या घटती है तो आपूर्ति की चिंता बढ़ती है और कीमतें उछलती हैं। हाल के दिनों में जब बातचीत की खबरें आईं तो बाजार में कुछ राहत भी दिखी, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है। कई विश्लेषक मानते हैं कि जब तक सुरक्षित और नियमित आवाजाही बहाल नहीं होती, कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
खाड़ी के तेल निर्यातक देशों के लिए यह मार्ग जीवनरेखा है। कोई भी लंबा व्यवधान न केवल उत्पादक देशों की आय को प्रभावित करता है बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया भर के उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का कारण बन सकता है।
क्षेत्रीय कूटनीति की भूमिका
ओमान के अलावा सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देश भी स्थिरता की बात कर रहे हैं। ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर अन्य देशों से भी संपर्क बनाए हुए है। होर्मुज को लेकर कोई भी स्थायी समाधान तभी संभव है जब तटीय देशों की संप्रभुता का सम्मान हो और बाहरी हस्तक्षेप कम हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी मार्ग व्यवस्था एक शुरुआत हो सकती है। अगर दोनों देश किसी स्वीकार्य मार्ग और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सहमत हो जाते हैं तो धीरे-धीरे सामान्य आवाजाही बहाल होने की उम्मीद बढ़ेगी। लेकिन पूर्ण सामान्य स्थिति के लिए व्यापक राजनीतिक समझ और संघर्ष विराम जरूरी है।
आगे की राह
ईरान-ओमान वार्ता अंतिम चरण में होने के बावजूद कई सवाल बाकी हैं। नई व्यवस्था में जहाजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? टोल या सेवा शुल्क का क्या प्रावधान होगा? अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बीमा कंपनियों का भरोसा कैसे बहाल होगा? ये सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।
ट्रंप प्रशासन की तरफ से हमलों को रोकने का फैसला कूटनीति के लिए जगह बनाता है, लेकिन ईरान का इनकार साफ संकेत देता है कि तेहरान अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहता है। होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है।
दुनिया की नजरें अब मस्कट और तेहरान के बीच चल रही चर्चाओं पर टिकी हैं। अगर अस्थायी व्यवस्था पर सहमति बन जाती है तो तेल बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन स्थायी शांति और पूर्ण आवाजाही के लिए और व्यापक प्रयासों की जरूरत होगी। फिलहाल ईरान का संदेश साफ है – होर्मुज को लेकर बात ओमान से हो रही है, अमेरिका से नहीं।
यह घटनाक्रम याद दिलाता है कि संकीर्ण जलमार्ग कितनी बड़ी भू-राजनीतिक ताकत रखता है। एक छोटे से स्ट्रेट का बंद या खुलना पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसलिए कूटनीतिक समाधान की सफलता न सिर्फ क्षेत्र बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 4 Aug 2026
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