-Friday World 8 Aug 2026
शनिवार तड़के यमन में एक बार फिर बंदूकें गरज उठीं। यमन की सऊदी समर्थित सेना ने घोषणा की कि उसने अंसारुल्लाह के ठिकानों और सैन्य उपकरणों को निशाना बनाकर एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने इस कार्रवाई को "आत्मरक्षा और जवाबी कदम" बताया।
इस घोषणा के साथ ही मआरिब और हज़रामौत प्रांतों की सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जहां पिछले कुछ हफ्तों से दोनों पक्षों के बीच झड़पों की खबरें आ रही थीं।
क्या हुआ, और क्यों हुआ?
कर्नल अल-नुज़ैली के मुताबिक, यह अभियान अचानक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों मआरिब और हज़रामौत प्रांतों में स्थित सैन्य शिविरों पर अंसारुल्लाह की ओर से हमले किए गए थे। इन्हीं हमलों के जवाब में सेना ने कई मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई करने का फैसला लिया।
प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान संपर्क रेखाओं के साथ-साथ अंसारुल्लाह के लड़ाकों और उनके सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया। उनका कहना था कि इसका मकसद आगे होने वाले हमलों को रोकना और सेना की चौकियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
"हमने संयम दिखाया, लेकिन जब हमारे शिविरों पर हमले हुए तो जवाब देना जरूरी हो गया," अल-नुज़ैली ने बयान में कहा।
कई मोर्चों पर तेज हुई गतिविधि
सेना के अनुसार, यह अभियान एक जगह तक सीमित नहीं है। मआरिब के रेगिस्तानी इलाकों से लेकर हज़रामौत की पहाड़ी पट्टी तक कई धुरियों पर सैन्य गतिविधि तेज कर दी गई है।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि हवाई निगरानी और जमीनी गश्त दोनों बढ़ा दी गई हैं। ड्रोन और तोपखाने का इस्तेमाल भी संपर्क रेखाओं पर देखा गया। हालांकि अभी तक दोनों तरफ से हताहतों की आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई है।
मआरिब यमन के ऊर्जा संसाधनों के लिहाज से बेहद अहम प्रांत माना जाता है। वहीं हज़रामौत अपने बंदरगाहों और तेल क्षेत्रों के कारण रणनीतिक महत्व रखता है। पिछले 9 साल से इन इलाकों में नियंत्रण को लेकर खींचतान चल रही है।
चेतावनी भी, और जिम्मेदारी भी
कर्नल अल-नुज़ैली ने अपने बयान में सिर्फ अभियान की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि एक कड़ी चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी और बढ़ोतरी के लिए पूरी तरह अंसारुल्लाह और उनके समर्थकों को जिम्मेदार मानती है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "अगर हमले जारी रहे तो हमारी सेना बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देगी। हम अपने सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।"
इस बयान को जानकार एक तरह का अल्टीमेटम मान रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में संघर्ष विराम की कोशिशें कई बार हुईं, लेकिन जमीन पर तनाव कम नहीं हुआ।
यमन का संघर्ष: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
यमन 2014 से गृहयुद्ध की चपेट में है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन है, तो दूसरी तरफ अंसारुल्लाह आंदोलन है जिसका ईरान से समर्थन जुड़ा माना जाता है।
इस लड़ाई में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन यमन को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बताते रहे हैं। भोजन, पानी और दवाओं की कमी आम लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
मआरिब और हज़रामौत पिछले 2 सालों में संघर्ष के नए केंद्र बन गए हैं। यहां तेल, गैस और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।
आम लोगों पर क्या असर?
जैसे ही अभियान की खबर आई, मआरिब और हज़रामौत के सीमावर्ती गांवों में हलचल बढ़ गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई परिवार अपने घरों से निकलकर सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं।
बाजारों में जरूरी सामान की खरीदारी तेज हो गई है। स्कूल और क्लीनिक बंद होने की भी खबरें हैं। राहत एजेंसियों को डर है कि अगर लड़ाई लंबी खिंची तो पहले से कमजोर सप्लाई चेन और टूट सकती है।
एक स्थानीय शिक्षक ने फोन पर बताया, "हम रोज यही दुआ करते हैं कि लड़ाई न बढ़े। लेकिन हर कुछ महीनों में यही खबर आ जाती है। बच्चे डर गए हैं।"
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस अभियान का मकसद अंसारुल्लाह को पीछे धकेलना और भविष्य के हमलों को रोकना है।
वहीं अंसारुल्लाह की तरफ से अभी कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है। माना जा रहा है कि वे भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहे होंगे।
संयुक्त राष्ट्र के दूत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों को निशाना न बनाने की अपील की है। खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या यह झड़प एक बार फिर बड़े युद्ध में बदलती है, या बातचीत की मेज पर लौटती है।
3 अहम बातें जो आपको जाननी चाहिए
1. जवाबी कार्रवाई: सऊदी समर्थित आतंकवादी सेना ने इसे मआरिब और हज़रामौत में शिविरों पर हुए हमलों का जवाब बताया।
2. भौगोलिक महत्व: मआरिब और हज़रामौत तेल और गैस संसाधनों के कारण यमन के सबसे महत्वपूर्ण प्रांतों में हैं।
3. मानवीय चिंता: ताजा तनाव से विस्थापन और मानवीय मदद में रुकावट का खतरा बढ़ गया है।
यमन में शांति की उम्मीद हर बार एक नई झड़प के साथ धुंधली पड़ जाती है। शनिवार तड़के शुरू हुआ यह अभियान उसी पुराने चक्र का हिस्सा लगता है, जहां आरोप, जवाब और चेतावनी का सिलसिला थमता नहीं।
अब सबकी निगाह इस पर है कि क्या कूटनीति इस बार बंदूकों से तेज चलेगी, या मआरिब-हज़रामौत की धरती एक बार फिर खून से सनेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 8 Aug 2026
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