- Friday World 24 Aug 2026
राष्ट्रीय राजमार्ग 39, सतना रीवा क्षेत्र। इस वीडियो में जो दृश्य दिख रहा है, वह सिर्फ एक पुल के टूटने का नहीं, बल्कि सिस्टम के खोखलेपन का है।
कहा जा रहा है कि इस ओवरब्रिज का बजट लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक था। यह पुल रेलवे लाइन के ऊपर बना है। नीचे से दिन-रात ट्रेनें गुजरती हैं, ऊपर से हजारों गाड़ियाँ। लेकिन आज इस पुल की हालत देखिए। बीच का स्लैब पूरी तरह उखड़ चुका है, कंक्रीट मलबे में बदल चुका है और लोहे की जालियां नंगी खड़ी हैं।
वीडियो में दिख रहा व्यक्ति खुद गड्ढे में उतर कर छड़ों की मोटाई दिखा रहा है। उसका दावा गंभीर है - जहाँ डिजाइन के हिसाब से 24 MM की मजबूत सरिया लगनी चाहिए थी, वहाँ 6 MM से 10 MM की पतली सरिया लगाकर खानापूर्ति कर दी गई। यही वजह है कि नया बना पुल अपने ही वजन से बैठ गया।
टैक्स पेयर के पैसे पर सवाल
यह सवाल सिर्फ इंजीनियरिंग का नहीं है। यह हर उस गरीब टैक्सपेयर के पैसे का सवाल है जो अपनी मेहनत की कमाई से देश के विकास में योगदान देता है। सड़क अच्छी बने, सफर सुरक्षित हो, इस उम्मीद में टोल और टैक्स दिया जाता है। लेकिन जब वही पैसा घटिया सामग्री में बदल जाए, तो गुस्सा लाजमी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। काम की गुणवत्ता की जांच थर्ड पार्टी से हो, लैब टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक हो और ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
*क्या होना चाहिए?*
1. इस पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट हो।
2. कोर कटिंग और सरिया टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ रिपोर्ट आए।
3. जब तक पुल पूरी तरह सुरक्षित न हो, इसे पूरी तरह बंद रखा जाए और वैकल्पिक मार्ग दिया जाए।
4. रेलवे प्रशासन भी नीचे से गुजरने वाली ट्रेनों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त निरीक्षण करे।
विकास सिर्फ फीता काटने से नहीं होता, विकास टिकाऊ निर्माण से होता है। NH-39 का यह धंसा हुआ पुल हमें यही चेतावनी दे रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो डालने से ज्यादा जरूरी है कि जिम्मेदार एजेंसियां मौके पर आएं, जांच करें और जनता को भरोसा दिलाएं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 24 Aug 2026
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