-Friday World 18 Aug 2026
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के अभियान के दौरान एक गंभीर घटना सामने आई है। 24 जुलाई 2026 को आर्ले बर्क क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस बेनफोल्ड (DDG-65) के जनरेटर में तकनीकी खराबी आ गई। इस इंजीनियरिंग कैजुअल्टी के कारण जहाज पूरी तरह बिजलीविहीन हो गया। बिजली जाने के बाद जहाज अपनी गति खो बैठा और आगे बढ़ने की क्षमता भी समाप्त हो गई। रसोई (गैली), टॉयलेट, एयर कंडीशनिंग और पीने के पानी की सुविधाएं भी प्रभावित हुईं।
यह घटना साउथ चाइना सी के बेहद गर्म मौसम में हुई। जुलाई के अंतिम दिनों में यहां दिन का तापमान 32 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था। ऐसे में बिना एयर कंडीशनिंग और बुनियादी सुविधाओं के चार दिन गुजारना चालक दल के लिए बेहद तनावपूर्ण साबित हुआ। अमेरिकी नौसेना के अनुसार इस घटना में किसी भी सैनिक को चोट नहीं पहुंची। नौसेना ने चालक दल के हौसले, संयम, पेशेवर रवैये और मुश्किल हालात में उनके दृढ़ संकल्प की तारीफ की।
पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी और कैप्टन कार्ल शुस्टर ने सीएनएन से बात करते हुए बताया कि उन्होंने कभी चार घंटे तक बिना बिजली वाले युद्धपोत पर समय बिताया था, लेकिन साउथ चाइना सी में चार दिन तक ऐसे हालात झेलना कहीं ज्यादा तनावपूर्ण होता। जहाज पर इंजीनियर बिजली बहाल करने की कोशिश में लगे रहे, ऑपरेशन अधिकारी सैनिकों के मनोबल और अभियान की चिंता करते रहे, जबकि कमांडर को मौसम, भोजन, सुरक्षा और मदद पहुंचने तक की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।
मुसीबत के बीच जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के अन्य जहाजों ने मदद की। विशेष रूप से यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स (टाइकोंडेरोगा-क्लास क्रूजर) ने बेनफोल्ड के सैनिकों के लिए पका हुआ खाना पहुंचाया। आखिरकार ठेकेदार टगबोट्स की मदद से युद्धपोत को खींचकर फिलीपींस के सुबिक बे ले जाया गया। वहां 28 जुलाई को पहुंचने के बाद मरम्मत शुरू हुई। 30 जुलाई को बिजली बहाल हुई और सभी आवश्यक मरम्मत 7-8 अगस्त तक पूरी हो गई। 8 अगस्त तक युद्धपोत फिर से सेवा में लौट आया और बाद में योकोसुका (जापान) पहुंचा।
यह घटना अमेरिका के लिए चिंता बढ़ाने वाली है। अमेरिकी नौसेना पहले से ही ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों, वैश्विक प्रतिबद्धताओं और विस्तारित डिप्लॉयमेंट्स के कारण भारी दबाव में है। बेनफोल्ड की घटना प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत के बिजली खोने का दूसरा हालिया मामला है। इससे पहले मई में यूएसएस हिगिंस की बिजली और इंजन प्रणाली भी कई घंटों के लिए प्रभावित हुई थी। दोनों जहाज आर्ले बर्क क्लास के हैं। अमेरिकी नौसेना के बेड़े में 70 से अधिक ऐसे युद्धपोत हैं, जिन्हें सतही नौसेना की रीढ़ माना जाता है। लगभग 500 फीट लंबे और करीब 10 हजार टन वजन वाले इन जहाजों पर आमतौर पर 329 से 359 सैनिक तैनात रहते हैं।
यूएसएस बेनफोल्ड की यह घटना न केवल तकनीकी खराबी को उजागर करती है, बल्कि आधुनिक युद्धपोतों पर रखरखाव, जनरेटर सिस्टम की विश्वसनीयता और लंबे अभियानों में सैनिकों के मनोबल की चुनौतियों को भी रेखांकित करती है। नौसेना जांच कर रही है कि आखिर जनरेटर में क्या समस्या आई। इस बीच चालक दल की मजबूती और सहयोगी जहाजों की त्वरित मदद ने बड़े संकट को टाला। साउथ चाइना सी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी घटनाएं अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और लॉजिस्टिक क्षमताओं पर सवाल जरूर उठाती हैं, लेकिन सैनिकों की सहनशीलता और सामूहिक प्रयास ने दिखाया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी वे डटे रहते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 18 Aug 2026
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