- Friday World September 09 2026
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गया है। इसका सीधा असर तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देश पर पड़ना तय माना जा रहा है।
आयात बिल में 56% का उछाल, वॉल्यूम जस का तस
ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के इसी अवधि के 40.5 अरब डॉलर की तुलना में 56% बढ़कर 63.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि तेल की खपत या आयात की मात्रा में कोई बड़ा इजाफा नहीं हुआ है।
पिछले साल जहां 8.15 करोड़ टन तेल आयात हुआ था, वहीं इस साल यह आंकड़ा मामूली बढ़कर 8.19 करोड़ टन ही है। यानी तेल उतना ही आया, लेकिन कीमतों में उछाल के कारण देश को अरबों डॉलर ज्यादा चुकाने पड़े। यह भारत के चालू खाता घाटे और रुपये की सेहत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है।
LPG पर 200 रुपये की अंडर-रिकवरी, पेट्रोल-डीजल भी दबाव में
सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल हर LPG सिलेंडर पर सरकार को करीब 200 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। यानी सिलेंडर को उसकी लागत से कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है।
यदि ब्रेंट क्रूड इसी स्तर पर बना रहा तो पेट्रोल-डीजल पर भी यही स्थिति बन सकती है। गौरतलब है कि सरकार इस साल पहले ही चार बार ईंधन के दाम बढ़ा चुकी है और चारों बढ़ोतरी मई महीने में की गई थी। इन चार किस्तों में पेट्रोल 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। पिछले तीन महीनों से दामों में स्थिरता बनी हुई थी, लेकिन अब यह स्थिरता टूट सकती है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
1. ट्रांसपोर्ट महंगा: डीजल महंगा होते ही माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे सब्जी से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे होंगे।
2. रसोई का बजट बिगड़ेगा: LPG सिलेंडर महंगा हुआ तो मध्यम वर्ग की रसोई का बजट सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
3. महंगाई दर में उछाल: कच्चे तेल की महंगाई थोक और खुदरा महंगाई दोनों को बढ़ाती है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार के सामने अब दो रास्ते हैं - या तो जनता पर बोझ डालकर दाम बढ़ाए, या फिर अंडर-रिकवरी का बोझ खुद उठाए जिससे तेल कंपनियों का घाटा बढ़ेगा। चुनावी मौसम और त्योहारी सीजन को देखते हुए कोई भी फैसला आसान नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं हुआ और ब्रेंट 100 डॉलर के ऊपर टिका रहा, तो आने वाले 15-20 दिनों में भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में 3 से 5 रुपये तक की बढ़ोतरी लगभग तय है।
अब सबकी निगाहें अमेरिका-ईरान वार्ता और OPEC देशों के उत्पादन फैसले पर टिकी हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 09 2026
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