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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 26 September 2026

बाब-अल-मंदेब में अंसारुल्लाह की दहाड़ से भारत की सांसे अटकीं! $200 अरब का व्यापार और 20 हजार नाविकों की जान खतरे में, लाल सागर बना जंग का मैदान

बाब-अल-मंदेब में अंसारुल्लाह की दहाड़ से भारत की सांसे अटकीं! $200 अरब का व्यापार और 20 हजार नाविकों की जान खतरे में, लाल सागर बना जंग का मैदान
-Friday World September 27,2026 
यमन में अंसारुल्लाह आंदोलन, जिसे दुनिया हूती के नाम से जानती है, की बढ़ती समुद्री ताकत ने अब भारत की चिंता बढ़ा दी है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास अंसारुल्लाह की पकड़ मजबूत होने से भारत के समुद्री व्यापार पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

भारत के लिए क्यों है यह स्ट्रेट इतना अहम?

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद अहम व्यापारिक मार्ग है। दुनिया का लगभग 12% ग्लोबल व्यापार इसी 29 किलोमीटर चौड़े संकरे रास्ते से गुजरता है। भारत का यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका से होने वाला लगभग 200 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार इसी रास्ते से होता है। भारत की तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा भी इसी रूट से आता है।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, अगर हूतियों ने इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया या हमले तेज कर दिए, तो भारतीय जहाजों को लाल सागर से बचकर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप से होकर जाना पड़ेगा।

10 से 14 दिन लंबी होगी यात्रा, खर्चा डबल

अगर जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाना पड़ा तो:

1. यात्रा 10 से 14 दिन लंबी हो जाएगी: इससे सामान पहुंचने में देरी होगी।

2. खर्च में भारी बढ़ोतरी: ईंधन का खर्च 40% तक बढ़ जाएगा। माल ढुलाई का भाड़ा और युद्ध जोखिम के कारण बीमा प्रीमियम तीन से चार गुना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ेगा।

3. तेल की कीमतों में उछाल: देरी से भारत में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

20 हजार भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

इस क्षेत्र में काम कर रहे 20 हजार से ज्यादा भारतीय नाविकों की जान पर भी खतरा है। हूती पहले ही कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं और कई जहाजों को हाईजैक कर चुके हैं। हाल ही में यूरोपीय जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारतीय नौसेना को अरब सागर और अदन की खाड़ी में हाई अलर्ट पर रखा गया है।

INS कोलकाता, INS कोच्चि जैसे युद्धपोत पहले ही इस क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और कई भारतीय जहाजों को बचाया भी है।

भारत की रणनीति क्या है?

भारत फिलहाल दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। एक तरफ नौसेना की तैनाती बढ़ा कर अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक तौर पर सभी पक्षों से बात कर के इस संकट को टालने की कोशिश हो रही है।

समुद्री विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हूती संकट लंबा खिंचता है तो भारत को अपने व्यापार के लिए नए और वैकल्पिक रास्ते खोजने होंगे, नहीं तो 200 अरब डॉलर का व्यापार खतरे में पड़ सकता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 27,2026 

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