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Tuesday, 8 September 2026

ईरान से हार के बाद बौखलाया अमेरिकी साम्राज्य - टैंकरों पर हमला, कनाडा को 51वां राज्य बनाने की धमकी, ये है डूबते साम्राज्यवाद का नया फेज

ईरान से हार के बाद बौखलाया अमेरिकी साम्राज्य - टैंकरों पर हमला, कनाडा को 51वां राज्य बनाने की धमकी, ये है डूबते साम्राज्यवाद का नया फेज
- Friday World September 08 2026 
पिछले कुछ दिनों में दुनिया ने जो देखा है, उसने अमेरिकी ताकत के मिथक को पूरी तरह से तोड़ दिया है। ईरान ने दो अमेरिकी नेवी वॉरशिप पर हमला किया और अमेरिका ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की। दुनिया हैरान रह गई। 

लेकिन आज खबर आई कि अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला कर दिया। यानी वो जहाज जो तेल लेकर जा रहे थे। इसका साफ मतलब है कि अमेरिका बदला लेने की कोशिश कर रहा है। पहले अमेरिका हमला करता था और ईरान बदला लेता था, अब समीकरण उलट गया है। ईरान हमला करता है और अमेरिका बदला लेने की कोशिश करता है। 

ट्रम्प का कनाडा-राग: सबसे बड़ा खतरा कौन?

ट्रम्प की ईरान को लेकर हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पत्रकारों ने जब उनसे पूछा - "अमेरिका के व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा कौन सा देश है?" तो जवाब सुनकर पूरी दुनिया दंग रह गई।

ट्रम्प ने कहा - "कनाडा अमेरिका के व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा है।"

उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया। रूस का नाम नहीं लिया। किसी और देश का नाम नहीं लिया। नाम लिया तो अपने सबसे करीबी सहयोगी कनाडा का। 

अमेरिकी प्रोफेसर रिचर्ड वुल्फ ने आज ही नॉर्वे के प्रोफेसर ग्लेन डिसेन के शो पर कहा - "This is the new phase of American imperialism" - ये अमेरिकी साम्राज्यवाद का नया दौर है।

उनका इशारा साफ था। अमेरिकी साम्राज्य अब पतन के रास्ते पर है। और जब साम्राज्य डूबते हैं तो वो इसी तरह हाथ-पैर मारते हैं।

प्रोफेसर वुल्फ ने कहा कि ट्रम्प कभी भी कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य घोषित कर सकते हैं। जैसे कुछ दिन पहले उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट का नक्शा अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके उसे अमेरिकी संपत्ति बता दिया। उन्होंने कनाडा की लेक ओंटारियो को भी अपना बता दिया।

झूठ पर टिकी विश्व व्यवस्था

अब सवाल है वो ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं?

अमेरिकी जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट और अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने कहा - "The world order built on lies is now unravelling" - झूठ पर बनी विश्व व्यवस्था अब बिखर रही है।

उनका मतलब था कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद, खासकर 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद अमेरिकी नेतृत्व में जो विश्व व्यवस्था बनी, वो असल में झूठ पर खड़ी थी। 

इसे आसान भाषा में समझिए। अमेरिका से पहले हम किन देशों को साम्राज्यवादी मानते थे? ब्रिटेन, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस।

ब्रिटेन ने भारतीय उपमहाद्वीप की दौलत लूट कर आज का ब्रिटेन बनाया। बेल्जियम ने कांगो के संसाधन लूट कर आज का बेल्जियम बनाया। नीदरलैंड ने इंडोनेशिया को लूट कर अपना देश खड़ा किया।

तो साम्राज्यवादी देश दूसरे देशों के संसाधन लूट कर ही अमीर बने। दूसरे विश्व युद्ध के बाद लोकतंत्र और मानवाधिकार के नाम पर जो व्यवस्था बनी, वो भी इसी झूठ पर खड़ी थी।

प्रोफेसर माइकल क्लेयर ने कहा - "America was doing the same thing but in a different way" - अमेरिका भी वही कर रहा था, बस तरीका अलग था।

वो अफगानिस्तान गया संसाधन लूटने, इराक गया, हाल में वेनेजुएला भी गया। लेकिन जब इन देशों में गया तो क्या कहा? लोकतंत्र और मानवाधिकार की बात की। ईरान के साथ भी यही हुआ। "ईरान में लोकतंत्र नहीं है, मानवाधिकार नहीं है" - ये सब कहकर वो ईरान भी आया। लेकिन उसे पता नहीं था कि ईरानी औरों जैसे नहीं हैं। उनकी हजारों साल पुरानी सभ्यता है। ज्ञान-विज्ञान में वो बहुत आगे हैं। इसलिए वो ईरान के संसाधन लूटने के चक्कर में फंस गया। ईरान रोज उसे सबक सिखा रहा है।

डूबता साम्राज्य और नई लूट

लेकिन अमेरिका की आर्थिक हालत आज बहुत खराब है। तो अब वो क्या करेगा? कभी कनाडा पर कब्जा करना चाहेगा, कभी ग्रीनलैंड पर। आजकल सुनने में आ रहा है कि वो आइसलैंड पर भी कब्जा करना चाहता है।

जब साम्राज्य पतन की ओर होते हैं तो ऐसा ही व्यवहार करते हैं। प्यूर्टो रिको को ही ले लीजिए। अमेरिका ने उस पर कब्जा कर रखा है। वहां के लोग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वोट तक नहीं दे सकते। फिर वही अमेरिका दुनिया भर में लोकतंत्र का भाषण देता है।

आज ट्रम्प ने घोषणा की - "We are going to attack Pickaxe Mountain soon" - हम जल्द ही पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने जा रहे हैं।

ये सुनकर अमेरिकी प्रोफेसर मियर्सहाइमर ने पूछा - "Didn't Trump say three months ago that he would destroy this mountain?" - क्या ट्रम्प ने तीन महीने पहले नहीं कहा था कि वो इस पहाड़ को नष्ट कर देगा?

तो ये सिलसिला कई साल और चलेगा। ईरान में हारने के बाद साम्राज्यवादी अमेरिका अलग-अलग देशों में जाएगा और उनके संसाधन लूटने की कोशिश करेगा। लेकिन ज्यादातर जगहों पर उसे हार ही मिलेगी।

इसे ही प्रोफेसर वुल्फ "New phase of American imperialism" कहते हैं।

ये नया फेज और कुछ नहीं, बल्कि अमेरिकी साम्राज्यवाद के अंत की शुरुआत है। 1991 में इराक से अमेरिकी साम्राज्य के दबदबे की शुरुआत हुई थी और उसी साम्राज्य के पतन की शुरुआत ईरान से हुई है।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 08 2026 

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