-Friday World September 17,2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। एक तरफ ईरान के साथ अमेरिका और इज़राइल का सीधा युद्ध छह महीने से ज्यादा से चल रहा है, दूसरी तरफ यमन के हूथी विद्रोहियों के हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को दहला रखा है। इसी भीषण तनाव के बीच जर्मनी से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों को चौंका दिया है।
अमेरिकी मीडिया Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते जर्मनी के एक सुनसान और गुप्त स्की रिजॉर्ट में अमेरिका, इज़राइल और 7-8 अरब देशों के टॉप सैन्य कमांडरों की एक बेहद गुप्त बैठक हुई। इस बैठक का आयोजन किसी और ने नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के सबसे बड़े कमांडर, CENTCOM के चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था।
कौन-कौन हुआ शामिल? एक टेबल पर दुश्मन से दोस्त तक
यह बैठक सामान्य नहीं थी। इस एक टेबल पर वो देश बैठे थे जो एक दशक पहले तक एक-दूसरे से बात तक नहीं करते थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि, "पिछले हफ्ते CENTCOM ने जर्मनी में एक निर्धारित सम्मेलन के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य नेताओं की मेजबानी की। नेताओं ने मध्य पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।"
रिपोर्ट के अनुसार इस गुप्त मीटिंग में शामिल थे:
1. अमेरिका: CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर
2. इज़राइल: IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर
3. सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सेना प्रमुख
इस मीटिंग की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे वो अरब देश भी शामिल थे जिनके इज़राइल के साथ आज तक औपचारिक राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। एक ही कमरे में इज़राइली और सऊदी जनरल का बैठना अपने आप में इतिहास है।
एजेंडे में क्या था? ईरान, हूथी और होर्मुज
दो इज़राइली अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से इस तरह की पहली बैठक थी। हालांकि पहले भी ऐसी बैठकें होती रही हैं, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद यह सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण थी।
बैठक में तीन मुख्य मुद्दों पर फोकस था:
1. अमेरिका पीछे नहीं हटेगा: एडमिरल कूपर ने सभी अरब सहयोगियों को साफ आश्वासन दिया कि ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार हमलों के बावजूद अमेरिका मध्य पूर्व से अपनी सेना नहीं हटाएगा। खाड़ी देशों को डर था कि अमेरिका उन्हें छोड़कर चला जाएगा, इस आश्वासन ने उन्हें राहत दी है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना: ईरान ने धमकी दी है कि वह दुनिया के 20% तेल की सप्लाई वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा। कूपर ने बैठक में बताया कि अमेरिका किस तरह से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बढ़ाने और ईरानी नाकेबंदी को तोड़ने की योजना बना रहा है।
3. इज़राइल का नया रोल: इज़राइल के सेना प्रमुख इयाल जमीर ने सभी मोर्चों पर चल रहे IDF ऑपरेशन्स की ब्रीफिंग दी। सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि इज़राइल अब अरब देशों की सीधे मदद कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल ने युद्ध के दौरान UAE को अपना आयरन डोम डिफेंस सिस्टम, उसे चलाने के लिए स्टाफ और रियल-टाइम इंटेलिजेंस (ISR) सपोर्ट दिया है। अब इसी तरह की मदद सऊदी अरब को हूथियों के खिलाफ देने पर चर्चा चल रही है।
अब्राहम समझौता अब युद्ध के मैदान में
2020 में हुए अब्राहम समझौते के बाद इज़राइल का अमेरिका के यूरोपीय कमांड से निकालकर CENTCOM में शामिल करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ। अब इज़राइल और अरब देश एक ही सैन्य कमांड के तहत आ गए हैं। खुफिया जानकारी साझा करना, एयर डिफेंस सिस्टम का समन्वय और अब हूथियों के खिलाफ जॉइंट ऑपरेशन की योजना, यह सब उसी का नतीजा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक एक नए नाटो जैसे अरब-इज़राइली सैन्य गठबंधन की नींव है, जिसका एकमात्र लक्ष्य ईरान और उसके प्रॉक्सी हूथियों को रोकना है।
क्या महायुद्ध की आहट है?
यह गुप्त बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरा मध्य पूर्व बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले, लाल सागर में हूथियों के जहाजों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने दुनिया को हिला दिया है। जर्मनी की यह सीक्रेट मीटिंग इस बात का संकेत है कि अमेरिका और उसके सहयोगी एक लंबे और बड़े युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। वे किसी भी कीमत पर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं करने देंगे।
आने वाले हफ्तों में सऊदी अरब में इज़राइली इंटेलिजेंस की मौजूदगी या लाल सागर में कोई बड़ा जॉइंट ऑपरेशन दिखे, तो चौंकिएगा मत। मध्य पूर्व का नक्शा बदलने की तैयारी जर्मनी के बर्फीले पहाड़ों में ही हो चुकी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 17,2026
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