-Friday World September 13,2026
अमेरिका से दोस्ती का मतलब कभी अरब देशों के लिए सुरक्षा की गारंटी माना जाता था। अमेरिकी बेस, पेट्रिएट मिसाइलें, F-35 और पांचवें बेड़े की मौजूदगी। लेकिन 2026 का मंजर कुछ और ही कह रहा है। ईरान-अमेरिका जंग के बीच सबसे ज्यादा कीमत वही चुका रहे हैं जो अमेरिका के सबसे करीब हैं।
सवाल अब खुलेआम उठ रहा है - क्या अमेरिका की दोस्ती ने सुरक्षा दी या युद्ध को घर तक ले आई?
1. ईरानी मिसाइलें और अरब शहरों पर खतरा
पिछले कुछ हफ्तों में जंग ने नया मोड़ लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों को सीधा निशाना बनाना शुरू किया है।
- सऊदी अरब के आभा, नजरान, जाज़ान और खमीस मुशैत में हौथियों के ड्रोन और मिसाइल हमले, तेल रिफाइनरी में आग जो सैटेलाइट से दिखी। 73 लोग घायल।
- UAE के खोर फक्कन पोर्ट पर LNG टैंकर पर हमला।
- कुवैत और बहरीन के पोर्ट में खड़े टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी।
- जॉर्डन में अमेरिकी बेस के पास 20 बैलिस्टिक मिसाइलें।
अमेरिका की मौजूदगी ने इन देशों को ढाल देने के बजाय टारगेट बोर्ड बना दिया है। तेहरान का तर्क साफ है - जो अमेरिका का साथ देगा, वह हमारा दुश्मन।
2. होर्मुज़ बंद, कारोबार ठप
दुनिया के 20% तेल का रास्ता होर्मुज़ जलडमरूमध्य आज लगभग जाम है। युद्ध से पहले रोज़ 8-9 मिलियन बैरल तेल यहां से निकलता था, अब यह गिरकर 2 से 5 मिलियन बैरल पर आ गया है।
इसका सीधा असर खाड़ी देशों पर है। कतर, कुवैत, इराक और बहरीन का तो कोई वैकल्पिक समुद्री रास्ता ही नहीं है। उनके LNG, फर्टिलाइजर और तेल के जहाज खाड़ी में ही फंसे हैं।
हौथियों ने दूसरी तरफ बाब अल-मंदब को भी निशाने पर ले लिया है, जो लाल सागर का गेट है। यानी अरब एक साथ दो समुद्री नाकेबंदी में फंस गए हैं।
3. UAE का प्लान-B: अब खुद को बचाओ
इसी डर से UAE ने पहली बार खुलकर कहा है - "हमारे ऊर्जा निर्यात को बंधक नहीं बनाया जा सकता।" d960
राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने अबू धाबी में कहा कि UAE अब पूर्वी तट पर पोर्ट, पाइपलाइन, रेलवे और सड़क नेटवर्क बना रहा है। फुजैरा और खोर फक्कन जैसे बंदरगाह जो होर्मुज़ के बाहर हैं, अब बैकअप नहीं बल्कि मुख्य व्यापार का हिस्सा बन रहे हैं।
DP World ने सऊदी अरब, ओमान से लेकर तुर्की और इराक तक ट्रकों से माल भेजना शुरू कर दिया है। कभी-कभी 5000 किमी सड़क से सामान लाया जा रहा है ताकि दुबई के जेबेल अली पोर्ट का घाटा पूरा हो सके।
4. दोस्ती पर भरोसा टूटा?
सबसे बड़ी टिप्पणी कतर से आई। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा - "खाड़ी को समझना होगा कि अमेरिका से रणनीतिक गठबंधन जरूरी है, लेकिन काफी नहीं है। सुरक्षा में आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है।" d960
UAE के गरगाश ने भी कहा - "जब हम पूरी तरह दूसरों पर निर्भर होते हैं, तो हम यह नहीं मान सकते कि हमारी सुरक्षा उनकी प्राथमिकता होगी।" d960
यानी अमेरिका की दोस्ती पर सवाल अब पर्दे के पीछे नहीं, मंच से उठ रहे हैं।
तो फिर फायदा किस बात का?
अरब देशों ने अमेरिका को बेस दिए, अरबों डॉलर के हथियार खरीदे, इस उम्मीद में कि सुकून बना रहेगा। आज हालात ये हैं कि तेल का कारोबार रुक रहा है, शहरों पर मिसाइलें गिर रही हैं और व्यापार के लिए रेगिस्तान में नए रास्ते खोजने पड़ रहे हैं।
अमेरिका की दोस्ती ने शायद दुश्मन से बचाया हो, लेकिन आज उसी दोस्ती की वजह से जंग दरवाजे पर खड़ी है। और जब सुकून ही छिन जाए, तो ऐसी सुरक्षा का क्या मतलब?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 13,2026
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