-Friday World September 13,2026
अमेरिका में इन दिनों एक ही चर्चा है - ईरान के साथ चल रहा युद्ध और उसके बाद बेलगाम हुई महंगाई। फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने अब व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई चरमरा गई है, और इसका सीधा असर अमेरिकी जनता की जेब पर पड़ रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो दूसरी बार सत्ता में लौटे हैं, अब सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले महंगाई और ईंधन के दाम उनके लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गए हैं।
महंगाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
अमेरिकी श्रम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक महंगाई फिर से सिर उठा रही है। अगस्त में सालाना कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 3.4% बढ़ा है, जबकि जुलाई से अगस्त के बीच मासिक महंगाई 0.4% रही, जो जुलाई में सिर्फ 0.1% थी। फेडरल रिजर्व के लिए यह बड़ा सिरदर्द है क्योंकि ब्याज दरें पहले से ही ऊंची हैं।
महंगाई का सबसे बड़ा कारण है - डीज़ल और पेट्रोल। डीज़ल अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ट्रक, खेती के उपकरण, कंस्ट्रक्शन मशीनें सब डीज़ल से ही चलती हैं।
डीज़ल $6 के पार, जनता बेहाल
अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के मुताबिक देश में डीज़ल का औसत दाम अब $5.85 प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले $3.71 था। पिछले हफ्ते GasBuddy ने तो बताया कि राष्ट्रीय औसत ने पहली बार $6 प्रति गैलन का आंकड़ा भी पार कर लिया है। कैलिफोर्निया में तो हालात बदतर हैं, जहां कुछ पंपों पर डिजिटल डिस्प्ले $9.999 दिखा रहा है क्योंकि मशीन उससे ज्यादा कीमत दिखा ही नहीं सकती।
ब्रेंट क्रूड $92 से $100 प्रति बैरल के बीच झूल रहा है, पिछले हफ्ते इसमें 7.6% की तेजी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों का आना-जाना लगभग बंद है, जिससे सप्लाई 14 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक घट गई है।
इसका असर? किसान परेशान हैं। नॉर्थ कैरोलिना के एक किसान ने बताया कि सिर्फ फसल कटाई में उसे $15,000 ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने ऑनलाइन ऑर्डर पर सरचार्ज लगा दिया है। किराने की दुकान से लेकर कपड़ों तक, हर चीज़ महंगी हो गई है।
पेट्रोल भी $4.22 प्रति गैलन पर है, जो पिछले साल इसी समय $3.19 था। लेबर डे वीकेंड पर तो अमेरिकी इतिहास में सबसे महंगा ईंधन बिका।
ट्रंप प्रशासन पर बढ़ा दबाव
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल में ले रहा है, लेकिन बाजार को भरोसा नहीं हो रहा। ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा है कि युद्ध खत्म होने पर तेल $40-50 तक गिर सकता है, पर अभी जनता को कोई राहत नहीं मिल रही।
विपक्ष और यहां तक कि ट्रंप के अपने किसान समर्थक भी नाराज हैं। उपभोक्ता भरोसे के दोनों बड़े इंडेक्स - यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन और कॉन्फ्रेंस बोर्ड - अगस्त में गिर गए हैं, लोगों ने महंगे गैस को इसका कारण बताया है।
घरों की बिक्री भी ठंडी पड़ गई है। ऊंचे ईंधन दाम + ऊंचा ब्याज = आम अमेरिकी के लिए दोहरी मार।
आगे क्या?
ANZ और Citi जैसी बड़ी एजेंसियों ने ब्रेंट का अनुमान बढ़ाकर $95 कर दिया है। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो सर्दियों में हीटिंग ऑयल और भी महंगा होगा।
साफ है, ईरान युद्ध सिर्फ मिडिल ईस्ट का मुद्दा नहीं रहा, यह अब अमेरिका के हर घर का मुद्दा बन गया है। मिडटर्म चुनाव में महंगाई ही सबसे बड़ा वोटिंग फैक्टर बनने जा रही है। ट्रंप के लिए यह वाकई "आखो खेल बगड्यो" वाली स्थिति है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 13,2026
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