-Friday World 3 Sep 2026
वाशिंगटन से एक बड़ा बयान आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की मिलिट्री लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, “ईरान की नेवी चली गई, एयरफोर्स चली गई, एयर डिफेंस खत्म हो गया और उसके लीडर भी मारे गए।”
ट्रंप का यह बयान उस छह महीने लंबे टकराव के बीच आया है जिसे अमेरिका में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कहा जा रहा है। इस ऑपरेशन में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के हजारों मिलिट्री ठिकानों, हथियार फैक्ट्रियों और कमांड सेंटर्स पर हमले किए। ट्रंप ने इसे जीत के तौर पर पेश किया।
लेकिन क्या सच में ईरान की सेना खत्म हो गई है? अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट खुद ट्रंप के दावे से अलग कहानी बता रही है।
अमेरिकी मीडिया CBS News और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो जानकारी अमेरिकी अधिकारियों ने दी है वो चौंकाने वाली है:
1. मिसाइल पावर अभी भी जिंदा है: ईरान के पास मौजूद बैलिस्टिक मिसाइलों और उनके लॉन्चर्स का लगभग 80% हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। यानी आधी ताकत अभी भी हमला करने लायक है। पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने खुद माना है कि ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और वन-वे अटैक ड्रोन हैं जो पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों के लिए खतरा हैं।
2. नेवी खत्म नहीं, सिर्फ घायल है: ट्रंप ने कहा था कि 42 से 154 ईरानी जहाज डुबो दिए गए हैं। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नेवी का लगभग 65% हिस्सा अभी भी ऑपरेशनल है। इसमें उनके खतरनाक फास्ट-अटैक बोट्स भी शामिल हैं। इसका सबूत हाल में तब मिला जब सीजफायर के ऐलान के कुछ घंटों बाद ही ईरानी गनबोट्स ने होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हमला किया।
3. एयरफोर्स का बड़ा हिस्सा बचा हुआ: ट्रंप का दावा है कि एयरफोर्स पूरी तरह तबाह हो गई है। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, ईरान की एयरफोर्स का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अभी भी काम कर रहा है। हां, उसे काफी नुकसान हुआ है, रडार और डिटेक्शन सिस्टम कमजोर हुए हैं, लेकिन “खत्म” शब्द बहुत बड़ा है।
तो फिर सवाल उठता है कि ईरान जवाबी हमला कैसे कर पा रहा है?
इसका जवाब मिलिट्री रणनीति में छिपा है। किसी देश के बड़े-बड़े बेस और बिल्डिंग उड़ा देना एक बात है, लेकिन उसकी लड़ने की इच्छाशक्ति और छिपी हुई ताकत को खत्म करना दूसरी बात। ईरान ने पिछले 40 सालों में अपनी ताकत को ‘डिस्पर्स्ड’ यानी बिखरा कर रखा है। मिसाइलें पहाड़ों के नीचे बंकरों में, ड्रोन छोटे-छोटे ट्रकों पर, और स्पीडबोट्स पूरे खाड़ी तट पर फैली हुई हैं।
दूसरा बड़ा हथियार है होर्मुज़ स्ट्रेट। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है। ईरान जानता है कि उसे अमेरिका जैसी सुपरपावर से सीधी जंग में नहीं जीतना, बल्कि दुनिया की एनर्जी सप्लाई को धमकाकर दबाव बनाना है।
ट्रंप खुद भी इस बात को मानते हैं। उन्होंने कहा था, “वे सख्त लोग हैं। वे स्मार्ट लोग हैं। लेकिन वे बहुत बुरे हैं।” उन्होंने यह भी माना कि सबसे बुरा सीनारियो यह हो सकता है कि एक बुरे लीडर को हटाकर उससे भी बुरा लीडर आ जाए।
इसलिए ट्रंप की भाषा एक पॉलिटिकल मैसेज ज्यादा लगती है, मिलिट्री हकीकत कम। अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह घायल जरूर किया है, उसकी हवा में ताकत कम हुई है, लेकिन उसे “खत्म” कहना जल्दबाजी है। ईरान आज भी एक ‘घायल लेकिन खतरनाक’ दुश्मन है, जिसके पास जवाबी हमले की क्षमता मौजूद है।
युद्ध में बिल्डिंग गिराना आसान है, लेकिन जंग जीतने के लिए दुश्मन की क्षमता और इरादे दोनों को खत्म करना पड़ता है — और ईरान के मामले में दूसरा हिस्सा अभी भी बाकी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 3 Sep 2026
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