- Friday World September 21,2026
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने हाल ही में अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी और तीखी चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप वाकई सैन्य अभियान को लेकर गंभीर हैं तो केवल आक्रामक बयानबाजी और एयर स्ट्राइक पर निर्भर न रहें। बल्कि अमेरिकी सैनिकों को ईरान की जमीन पर भेजें और जमीनी ऑपरेशन करके नियंत्रण लेने की कोशिश करें।
रेजाई ने तंजिया लहजे में सवाल किया कि अमेरिकी सेना इतनी ताकतवर होने का दावा करती है तो फिर वह केवल हवाई हमलों पर क्यों भरोसा करती है? अगर उनकी आर्मी इतनी शक्तिशाली है तो ईरान में उतरकर जमीनी लड़ाई क्यों नहीं लड़ती? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रंप को आर-पार की लड़ाई लड़ने की तैयारी करनी चाहिए, न कि दूर से हमला करने की रणनीति अपनानी चाहिए।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं – परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, मिडिल ईस्ट में सहयोगी देश और आर्थिक प्रतिबंध। ईरान बार-बार यह संदेश देता रहा है कि वह किसी भी बाहरी दबाव या सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। रेजाई का यह बयान उसी रुख को और मजबूती से पेश करता है।
मोहसिन रेजाई ईरान की राजनीति और सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान जमीनी युद्ध के लिए तैयार है। उनका कहना है कि अमेरिकी सैनिक अगर ईरान की सरजमीं पर कदम रखते हैं तो उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। यह चुनौती केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान की सैन्य तैयारियों और आत्मविश्वास को दर्शाती है।
ट्रंप के कार्यकाल में भी अमेरिका-ईरान संबंध तनावपूर्ण रहे थे। एयर स्ट्राइक और प्रतिबंधों की नीति अपनाई गई थी। अब रेजाई ने उसी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वास्तविक सैन्य क्षमता का परीक्षण जमीनी ऑपरेशन में होता है, न कि केवल आसमान से बम गिराने में। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वे बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाएं।
इस चुनौती के कई आयाम हैं। पहला, यह ईरान की घरेलू राजनीति में मजबूत रुख दिखाने का प्रयास है। दूसरा, यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला बयान है। तीसरा, यह अमेरिका की सैन्य रणनीति पर सवाल खड़ा करता है कि क्या हवाई श्रेष्ठता ही पर्याप्त है या जमीनी नियंत्रण भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान तनाव को और बढ़ा सकते हैं। हालांकि दोनों पक्ष अभी भी प्रत्यक्ष युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन शब्दों का यह आदान-प्रदान स्थिति को नाजुक बना रहा है। ईरान बार-बार कह चुका है कि वह आत्मरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार है। रेजाई का बयान उसी श्रृंखला की कड़ी लगता है।
अमेरिका की तरफ से अभी तक इस चुनौती का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे बयानों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां तेज हो जाती हैं। मिडिल ईस्ट में पहले से ही कई संघर्ष चल रहे हैं। ईरान-अमेरिका तनाव उनमें और जटिलता जोड़ सकता है।
रेजाई ने अपने बयान में जोर दिया कि अमेरिकी फोर्स अगर वाकई ताकतवर है तो जमीन पर उतरकर अपना दबदबा कायम करे। उन्होंने एयर स्ट्राइक को आसान विकल्प बताया और कहा कि असली परीक्षा जमीनी लड़ाई में होती है। यह बात सैन्य रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक युद्ध में हवाई शक्ति महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन जमीनी नियंत्रण के बिना लंबे समय तक सफलता हासिल करना मुश्किल होता है।
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड कोष अपनी तैयारियों पर गर्व करते हैं। वे दावा करते हैं कि किसी भी आक्रमण का जवाब देने की क्षमता उनमें है। रेजाई का बयान इसी आत्मविश्वास को दर्शाता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि ईरान दबाव में आकर पीछे नहीं हटेगा।
इस पूरे प्रकरण से एक बात साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की जगह टकराव की भाषा हावी हो रही है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। एक तरफ अमेरिका तकनीकी और हवाई श्रेष्ठता का दावा करता है, तो दूसरी तरफ ईरान जमीनी युद्ध और क्षेत्रीय प्रभाव पर जोर देता है।
मोहसिन रेजाई का यह बयान न सिर्फ ट्रंप को संबोधित है बल्कि पूरी दुनिया को ईरान का संदेश पहुंचाता है। वे कहना चाहते हैं कि ईरान किसी भी सैन्य अभियान का सामना करने के लिए तैयार है। अगर अमेरिका आर-पार की लड़ाई चाहता है तो उसे जमीनी ऑपरेशन की हिम्मत दिखानी होगी।
अंत में यह कहा जा सकता है कि ऐसे बयान तनाव बढ़ाते हैं लेकिन साथ ही दोनों पक्षों को अपनी सीमाएं भी याद दिलाते हैं। शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति ही लंबे समय तक स्थिरता ला सकते हैं। फिर भी वर्तमान समय में रेजाई की चुनौती ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों को सुर्खियों में ला दिया है।
यह चुनौती सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक भी है। दुनिया अब देख रही है कि आगे क्या होता है। क्या अमेरिका इस चुनौती का जवाब देगा या स्थिति को कूटनीतिक स्तर पर ही नियंत्रित रखा जाएगा? जवाब समय ही देगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 21,2026
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