- Friday World September 21,2026
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का अमेरिका दौरा हमेशा सुर्खियों में रहता है। व्हाइट हाउस में मीटिंग, पेंटागन में चर्चा, सिलिकॉन वैली के दिग्गजों से मुलाकात और लॉबी मीटिंग्स - उनका शेड्यूल हफ्तों का होता था। लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह पलट गई है।
इस बार नेतन्याहू अमेरिका में रुकेंगे नहीं, दौड़ेंगे।
खबर है कि नेतन्याहू सिर्फ 24 घंटे के लिए न्यूयॉर्क आएंगे, UN जनरल असेंबली में भाषण देंगे और उसी रात उल्टे पैर इजरायल लौट जाएंगे। इजरायल के UN राजदूत डैनी डैनन ने खुद इसकी पुष्टि की है कि यह एक तूफानी दौरा होगा।
और इस पूरे बदलाव के पीछे एक ही नाम है - न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी।
कौन हैं जोहरान ममदानी और क्या है उनका दांव?
जोहरान ममदानी ने खुलकर नेतन्याहू को "वॉर क्रिमिनल" कहा है और अमेरिकी संघीय सरकार से मांग की है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू किया जाए।
ICC ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में वारंट जारी किया था, जिसमें गाजा में मानवीय सहायता रोकने और "भुखमरी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल" करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
ममदानी ने कहा है कि न्यूयॉर्क शहर के पास स्वतंत्र रूप से इस वारंट को लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं है, लेकिन संघीय सरकार के पास है और उसे ICC में शामिल होकर इसे लागू करना चाहिए।
बस इसी एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया।
डर की वजह क्या है?
अमेरिका और इजरायल दोनों ही ICC के सदस्य नहीं हैं, और ट्रंप प्रशासन ने तो ICC स्टाफ पर प्रतिबंध लगाने तक का अभियान चला रखा है। लेकिन कानूनी पेंच के बावजूद न्यूयॉर्क में गिरफ्तारी की मांग का प्रतीकात्मक और राजनीतिक दबाव बहुत बड़ा है।
सोचिए, दुनिया का सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाला व्यक्ति अगर अमेरिका की आर्थिक राजधानी में कदम रखते ही "अरेस्ट" के नारों और कानूनी नोटिस के डर में हो, तो इससे बड़ी बेइज्जती क्या होगी?
इसी डर के चलते बताया जा रहा है कि नेतन्याहू का एलन मस्क जैसे बड़े उद्योगपतियों के साथ प्रस्तावित मीटिंग कैंसिल हो गई है। पहले जहां वे कई दिन रुककर बिजनेस और पॉलिटिकल लॉबिंग करते थे, अब वे 23 सितंबर की रात न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, 24 सितंबर दोपहर UN में भाषण देंगे और रात को ही वापस उड़ जाएंगे।
इजरायली दूत डैनन ने इसे "पॉलिटिक्स" बताया है और कहा कि न्यूयॉर्क में इजरायल को दोष देना अब एक ट्रेंड बन गया है, लेकिन हकीकत यह है कि यह ट्रेंड नहीं, ट्रैप बन चुका है।
न्यूयॉर्क में बैठा चौधरी क्यों भारी पड़ा?
जोहरान ममदानी की ताकत उनकी कुर्सी में नहीं, उनकी सोच में है। वह अमेरिकी राजनीति के उस नए चेहरे का प्रतीक हैं जो फिलिस्तीन के मुद्दे पर खुलकर बोलता है। उन्होंने साफ कहा है कि कानून जो इजाजत देगा, वे करेंगे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही कहा हो कि नेतन्याहू को अमेरिका में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, लेकिन ममदानी के बयान ने एक वैश्विक बहस छेड़ दी है कि क्या युद्ध अपराध के आरोपी को दुनिया के सबसे बड़े मंच पर बोलने का हक मिलना चाहिए?
यही वजह है कि नेतन्याहू खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। उन्हें पता है कि न्यूयॉर्क की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी होंगे, मीडिया में सवाल होंगे, और हर कदम पर ICC वारंट की चर्चा होगी।
इसलिए इस बार कोई लंबा अमेरिकी दौरा नहीं, कोई फोटो-ऑप नहीं। सिर्फ एक भाषण और सीधी उड़ान।
इसे ही कहते हैं - डर। जब सत्ता का सबसे बड़ा चेहरा भी एक मेयर की कानूनी मांग से अपने कदम छोटा करने पर मजबूर हो जाए।
यह घटना साबित करती है कि दुनिया बदल रही है। अब बड़े देशों के नेता भी अंतरराष्ट्रीय कानून और जनमत से बच नहीं सकते, चाहे वे कितनी भी बड़ी महाशक्ति के मेहमान क्यों न हों।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 21,2026
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