Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 26 September 2026

जिनपिंग ने ट्रंप को दिखा दी 'लक्ष्मण रेखा' - बोले ताइवान हमारा दिल है, रेड लाइन पार की तो अंजाम बुरा होगा!

जिनपिंग ने ट्रंप को दिखा दी 'लक्ष्मण रेखा' - बोले ताइवान हमारा दिल है, रेड लाइन पार की तो अंजाम बुरा होगा!
- Friday World September 27,2026 
वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में जब दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेता मिले तो माहौल दोस्ताना जरूर था, लेकिन बातें बेहद सख्त हुईं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने साफ-साफ कह दिया कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों के लिए 'लाल रेखा' है और इसे पार नहीं किया जाना चाहिए।

चीनी सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, गुरुवार को हुई इस ऐतिहासिक बैठक में जिनपिंग ने ट्रंप से अपील की कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करे और ताइवान मुद्दे को बेहद सावधानी से संभाले।

जिनपिंग का सख्त संदेश क्या था?

जिनपिंग ने दो टूक कहा, "राष्ट्रीय एकता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के मामले में चीन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है।" इसका मतलब साफ था - ताइवान चीन का हिस्सा है और रहेगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ताइवान को 11 से 14 अरब डॉलर का नया हथियार पैकेज देने पर विचार कर रहा है। बीजिंग में मई में हुई पिछली बैठक में भी जिनपिंग ने इसी मुद्दे पर ट्रंप को काफी देर तक समझाया था, जिसके कारण बैठक तय समय से ज्यादा चली थी।

चार रेड लाइन बताई चीन ने

इस बैठक से एक दिन पहले ही अमेरिका में चीन के राजदूत शीए फेंग ने चीन की चार रेड लाइन गिना दी थीं, जिसे अमेरिका को नहीं लांघना चाहिए:

1. ताइवान का सवाल
2. लोकतंत्र और मानवाधिकार
3. विकास का रास्ता और व्यवस्था
4. विकास के अधिकार

राजदूत ने पीपुल्स डेली में लिखे लेख में कहा था कि जब चीन और अमेरिका सहयोग करते हैं तो दोनों को फायदा होता है, लेकिन जब टकराते हैं तो दोनों को नुकसान होता है।

ट्रंप ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस के ग्रैंड फोयर में जिनपिंग का स्वागत करते हुए ट्रंप ने कहा, "मैं आपका सुंदर व्हाइट हाउस में स्वागत कर के खुश हूँ।" ट्रंप ने याद दिलाया कि मई में बीजिंग में उनका शानदार स्वागत हुआ था। ट्रंप ने यह भी कहा कि 2016 से ही उनकी और जिनपिंग की "सच्ची महान दोस्ती" बनी हुई है जो आपसी सम्मान पर टिकी है।

हालांकि ताइवान पर अमेरिका का आधिकारिक रुख अभी भी वही है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले कहा था कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

क्यों अहम है ताइवान?

चीन ताइवान को अपना ही एक प्रांत मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है। अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर और अंतरराष्ट्रीय समर्थक है, भले ही औपचारिक राजनयिक संबंध न हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिनपिंग ने ट्रंप को यह लक्ष्मण रेखा दिखा कर साफ कर दिया है कि व्यापार और ईरान जैसे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है, लेकिन ताइवान पर कोई समझौता नहीं होगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 27,2026 

#XiJinping #DonaldTrump #Taiwan #USChinaRelations #RedLine #WhiteHouse #Geopolitics #ChinaTaiwan #WorldNews #TrumpXiMeeting