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Sunday, 27 September 2026

पकौड़ा बेचो के बाद अब 'टैक्सी चलाओ' - डिप्टी CM ब्रजेश पाठक के बयान पर बवाल, युवा बोले - तेल आसमान पर, सवारी कहाँ से लाएं?

पकौड़ा बेचो के बाद अब 'टैक्सी चलाओ' - डिप्टी CM ब्रजेश पाठक के बयान पर बवाल, युवा बोले - तेल आसमान पर, सवारी कहाँ से लाएं?
- Friday World September 28,2026 
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का एक बयान इस समय सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। लखनऊ में 'भारत टैक्सी' सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में उन्होंने कहा - "नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा / टैक्सी ले लो, खूब चलाओ और खूब पैसा कमाओ।"

सरकार इसे स्वरोजगार बता रही है, लेकिन बेरोजगार युवा इसे 'पकौड़ा बेचो' के बाद 'टैक्सी चलाओ' का नया वर्जन बता रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

23 सितंबर को लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में सहकारिता मंत्रालय की 'भारत टैक्सी' योजना लॉन्च हुई। यह ड्राइवर-ओनर मॉडल है जिसमें कमीशन नहीं कटेगा और कमाई सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगी। इसी मंच से ब्रजेश पाठक ने युवाओं से इस योजना से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा - "अपनी गाड़ी, अपना ड्राइवर और कमाई भी अपने घर में रहेगी।"

इस बयान का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अलग एंगल से वायरल हो गया, जिसमें लग रहा है कि सरकार युवाओं को सरकारी नौकरी की जगह टैक्सी चलाने की सलाह दे रही है। ABP Live के मुताबिक इस पर सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई नेताओं ने निशाना साधा है।

युवाओं के 3 बड़े सवाल - जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए

 1. पेट्रोल-डीजल-CNG आसमान पर तो कमाई कैसे?
देश में पेट्रोल करीब 100-110 रुपये, डीजल 95-98 रुपये और CNG 80-85 रुपये किलो के पार है। ई-रिक्शा की बैटरी भी 40-50 हजार की आती है। ऐसे में रोज 500-700 कमाने के लिए 300 रुपये का तेल/CNG फूंकना पड़ेगा, बचेगा क्या?

 2. बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर
CMIE के आंकड़ों के मुताबिक युवा बेरोजगारी अब तक के उच्च स्तर पर है। युवा कह रहे हैं कि इंजीनियरिंग, B.A., M.A. करके क्या टैक्सी चलाने के लिए पढ़ाई की थी?

 3. ट्रेन-बस ही खाली तो टैक्सी में कौन बैठेगा?
वायरल पोस्ट में यूजर्स लिख रहे हैं - "2014 से पहले ट्रेन और सरकारी बस में करंट टिकट नहीं मिलता था, आज जेब में पैसा नहीं है इसलिए ट्रेन-बस खाली दौड़ रही हैं, तो टैक्सी में सवारी कौन करेगा और पकौड़े कौन खाएगा?"

सरकार का पक्ष क्या है?

सरकार का कहना है कि भारत टैक्सी से अब तक देश में 40 हजार ड्राइवर जुड़ चुके हैं और पिछले 6 महीने में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई सीधे उनके खातों में गई है। यह नौकरी का विकल्प नहीं, स्वरोजगार का एक अतिरिक्त अवसर है।

लेकिन विपक्ष कह रहा है कि स्वरोजगार के नाम पर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। असली रोजगार तो सरकारी भर्ती और फैक्ट्रियों से आएगा, टैक्सी चलाने से नहीं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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