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Saturday, 19 September 2026

DUSU चुनाव 2026: 3 सीटों पर ABVP का कब्जा, बिखरे विपक्ष से जीती सत्ता - आंकड़े खोल रहे हैं बड़ी कहानी

DUSU चुनाव 2026: 3 सीटों पर ABVP का कब्जा, बिखरे विपक्ष से जीती सत्ता - आंकड़े खोल रहे हैं बड़ी कहानी
-Friday World September 20,2026 
नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026 - दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजे आ गए हैं और इस बार भी भगवा लहर ने अपना दबदबा दिखाया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 4 में से 3 पदों - अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर जीत दर्ज की है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर NSUI के बागी निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने ऐतिहासिक जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है।

ये चुनाव सिर्फ जीत-हार नहीं, बल्कि विपक्षी एकता के बिखराव का सबसे बड़ा केस स्टडी बन गया है।

 वोटों का पूरा गणित क्या कहता है?

 1. अध्यक्ष पद:
- यश डाबस (ABVP): 24,576 वोट - विजेता
- विजय शंकर मीणा (NSUI): 22,523 वोट
- LEFT (AISA+SFI): 5,377 वोट
- ASAP: 1,388 वोट
- जीत का अंतर: सिर्फ 2,053 वोट

 2. उपाध्यक्ष पद:
- दीपांशु शोकीन (निर्दलीय/NSUI बागी): 30,615 वोट - विजेता
- ईशु मौर्य (ABVP): 16,910 वोट
- विर चतरथ (NSUI): 4,313 वोट
- LEFT: 2,383 वोट
यहाँ NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार को बागी उम्मीदवार ने लगभग 7 गुना वोटों से पीछे छोड़ दिया।

 3. सचिव पद:
- रिया छावड़ी (ABVP): 21,650 वोट - विजेता
- नम्रता चौधरी (NSUI): 14,869 वोट
- LEFT: 8,734 वोट
- ASAP: 7,639 वोट
- जीत का अंतर: 6,781 वोट

4. संयुक्त सचिव पद:
- लक्ष्य राज सिंह (ABVP): 16,615 वोट - विजेता
- विशेष यादव (SCS/समाजवादी छात्र सभा): 15,778 वोट
- गोपाल चौधरी (NSUI): 15,206 वोट
- LEFT: 5,837 वोट
- जीत का अंतर: सिर्फ 837 वोट - सबसे करीबी मुकाबला

 पत्रकार अरविंद गुणसेकर और सौरभ दास के ट्वीट से निकलते 3 बड़े संदेश

संदेश 1: बंटा हुआ विपक्ष, जीती हुई सत्ता
अध्यक्ष पद पर ABVP को 2,053 वोटों से जीत मिली, जबकि लेफ्ट को मिले 5,377 वोट अगर एक साथ होते तो नतीजा कुछ और होता। सचिव पद पर भी यही कहानी, ABVP की जीत 6,781 वोट से, जबकि लेफ्ट के 8,734 वोट अलग पड़े रहे। सबसे दिलचस्प संयुक्त सचिव का चुनाव रहा, जहाँ ABVP सिर्फ 837 वोट से जीती, जबकि SP (15,778) और LEFT (5,837) को मिलाकर कुल 21,615 वोट विपक्ष के खाते में गए। साफ है, छात्र सत्ता के खिलाफ थे, पर बंटे हुए थे।

संदेश 2: NSUI के लिए खतरे की घंटी
NSUI के बागी दीपांशु शोकीन ने 30,615 वोटों के साथ उपाध्यक्ष पद पर प्रचंड जीत हासिल की। यह NSUI के संगठनात्मक ढांचे पर सीधा सवाल है। टिकट न मिलने पर भी एक कार्यकर्ता इतना बड़ा जनसमर्थन कैसे जुटा लेता है? यह कांग्रेस के छात्र संगठन को अपनी अंदरूनी लोकतंत्र व्यवस्था पर फिर से सोचने का मौका है। पिछले 12 साल से संगठन सुधार की बात हो रही है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ता अब धैर्य खो रहे हैं।

संदेश 3: वाम एकता और वैचारिक शुद्धता का अहंकार
सौरभ दास ने बिल्कुल सही लिखा है - वामपंथी एकता के भीतर कुछ लोग वैचारिक शुद्धता और एक्सक्लूसिविटी पर ज्यादा जोर देते हैं। कोई भी उनसे मान्यता लेने नहीं आ रहा। जब तक वाम, NSUI, SCS, ASAP जैसे सभी छात्र संगठन एक मंच पर नहीं आएंगे, तब तक ABVP को हराना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। बहुमत ABVP के खिलाफ है, लेकिन यह बहुमत एक जगह नहीं है।

जीतने वालों के लिए सबक

इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश जीतने वालों के लिए है। जैसा कि विश्लेषण में कहा गया - "वे कोई राजा या रानी नहीं हैं। बहुमत ने उन्हें वोट नहीं दिया है।" DUSU में कुल 1.51 लाख से ज्यादा वोटर्स थे, मतदान 40.46% हुआ। अध्यक्ष पद पर ABVP को 24 हजार वोट मिले, यानी कुल छात्र आबादी के एक छोटे हिस्से का समर्थन। इसलिए जिम्मेदारी बड़ी है - हॉस्टल, PG सुरक्षा, कैंपस सुविधाएं और छात्र कल्याण पर काम करना होगा, न कि सिर्फ नारेबाजी।

DUSU 2026 ने साफ कर दिया है कि 2029 के बड़े चुनावों से पहले छात्र राजनीति का प्रयोगशाला यही DU है। अगर विपक्ष इसी तरह बंटा रहा, तो वह आगे भी विपक्ष में ही रहेगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 20,2026 

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