-Friday World Oct 29,2026
इजराइल की सियासत में एक दिन ऐसा आया जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पूरा दिन अपने ही देश के 21 लाख नागरिकों ने बेचैन रखा।
कहानी 1948 से शुरू होती है। इजराइल ने अपने विस्तार के दौरान फिलिस्तीन के कुछ इलाकों को जानबूझकर नहीं छेड़ा था, ताकि दुनिया में उस पर पूर्ण निष्कासन का आरोप न लगे। वहीं रहने वाले लोग आज इजराइल के अरब नागरिक कहलाते हैं। आज उनकी संख्या करीब 21 लाख है, जो कुल आबादी का 21% है। इनमें 83% मुस्लिम, 9% ड्रूज और 7% ईसाई हैं। धर्म अलग-अलग होने के बावजूद, चुनावों में ये एक साझा राजनीतिक ताकत - Joint List - बनकर लड़ते हैं, जिसमें मंसूर अब्बास और अहमद तिबी जैसे बड़े चेहरे हैं।
हालिया चुनाव में इन अरब वोटरों ने ऐसा जोश दिखाया कि नेतन्याहू की टीम के होश उड़ गए। सबसे ज्यादा सुर्खियां नेगेव रेगिस्तान के बेदूइन समुदाय ने बटोरीं। नेगेव में न पक्की सड़क, न बस, फिर भी सुबह से ही लोग ऊंटों और गधों पर बैठकर, औरतें बच्चों के साथ पैदल चलकर पोलिंग बूथ तक पहुंच गए। वायरल तस्वीरों में एक बुजुर्ग लाठी के सहारे, तो एक महिला गधे पर बच्चे के साथ वोट डालने जा रही थी।
जैसे-जैसे मतदान प्रतिशत बढ़ा, नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने दिन भर दर्जनों वीडियो और तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें से कुछ असली थीं तो कुछ पुरानी और फर्जी। उनका मकसद था - यहूदी और Zionist वोटरों में डर पैदा करना। उन्होंने कहा - "चुनाव चुराया जा रहा है।"
उनका सबसे विवादित बयान था - "यह देखो, ये मुसलमान मुझे हराने के लिए बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों का रुख कर रहे हैं, सभी Zionists बाहर निकलें और मुझे हार से बचाएं, अन्यथा मंसूर अब्बास और अहमद तिबी की सरकार बन जाएगी।"
इस पर अरब नेताओं ने तीखा पलटवार किया। अहमद तिबी ने इसे खुला नस्लवाद कहा, तो मंसूर अब्बास ने कहा - "हम इजराइली नागरिक हैं, वोट करना हमारा हक है, कोई एहसान नहीं।"
सच यह है कि अरब वोट के बिना इजराइल में सरकार बनना मुश्किल है। 120 सीटों वाली संसद नेसेट में अरब पार्टियां 10-15 सीटें लाती हैं। 2021 में मंसूर अब्बास इजराइल के इतिहास में पहले अरब नेता बने जो सरकार में शामिल हुए।
बेदूइन का ऊंट पर वोट देने आना सिर्फ वोट नहीं, बल्कि यह बताना था कि हम रेगिस्तान में रहते हैं, लेकिन इस देश के फैसले में हमारी भी हिस्सेदारी है। उनकी मांगें हैं - बस्तियों को मान्यता, बिजली, पानी, स्कूल और बराबरी का हक।
एक दिन के इस मतदान ने साबित कर दिया - इजराइल के अरब वोटर अब हाशिए पर नहीं, बल्कि सेंटर स्टेज पर हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 29,2026
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