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Saturday, 10 October 2026

एक व्यक्ति को बचाने के लिए किले में तब्दील हुई दिल्ली, पर मणिपुर और पहलगाम पर क्यों खामोश रही सत्ता?

एक व्यक्ति को बचाने के लिए किले में तब्दील हुई दिल्ली, पर मणिपुर और पहलगाम पर क्यों खामोश रही सत्ता?
-Friday World Oct 10,2026 
दिल्ली की सड़कों को देखिए। कीलें, कंटीले तार, लोहे के बैरिकेड, 40,000 जवान, इंटरनेट बंद, मेट्रो बंद, ड्रोन से निगरानी। ऐसा लगता है जैसे देश पर कोई बाहरी हमला हो गया हो। लेकिन हकीकत यह है कि यह सारी तैयारी एक व्यक्ति, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए की गई है।

सवाल सीधा है, और देश पूछ रहा है - जितनी फोर्स ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए लगाई गई है, वो फोर्स मणिपुर और पहलगाम में क्यों नहीं लगाई गई थी?

मणिपुर जल रहा था, दिल्ली सो रही थी

मणिपुर दो साल से जल रहा है। घर जलाए गए, औरतों को निर्वस्त्र घुमाया गया, सैकड़ों लोग मारे गए। इंटरनेट महीनों बंद रहा, लेकिन फोर्स नहीं पहुंची। प्रधानमंत्री का एक बयान तक नहीं आया महीनों तक। वहां किले बंदी की जरूरत थी, वहां बैरिकेड की जरूरत थी, वहां 40,000 जवानों की जरूरत थी, ताकि बहन-बेटियों की इज्जत बच सके। लेकिन तब यह सरकार खामोश थी।

पहलगाम में सुरक्षा कहां थी?

पहलगाम में जब 26 निर्दोष पर्यटकों को धर्म पूछकर मार दिया गया, तब यह सुरक्षा व्यवस्था कहां थी? तब इंटेलिजेंस कहां था? तब ड्रोन कहां थे? वहां तो एक भी जवान समय पर नहीं पहुंचा। लेकिन जब बात एक कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा की आती है, तो पूरी दिल्ली को छावनी बना दिया जाता है।

यह दोहरा चरित्र है। जनता के लिए कोई सुरक्षा नहीं, कुर्सी के लिए पूरी फौज।

किसानों से भी यही किया था, और हारे थे

यह पहली बार नहीं है। किसानों को भी आपने ऐसे ही दिल्ली में घुसने से रोका था। याद है सिंघु बॉर्डर? टिकरी बॉर्डर? वहां भी कीलें गाड़ी थीं, कंटीले तार लगाए थे, सीमेंट की दीवारें बनाई थीं। किसानों को आतंकवादी कहा था, खालिस्तानी कहा था।

लेकिन क्या हुआ? आप तब भी हारे थे। 700 किसानों की शहादत के बाद आपको तीनों काले कानून वापस लेने पड़े थे, माफी मांगनी पड़ी थी। क्योंकि कीलों से किसानों के हौसले को नहीं रोका जा सकता।

इस बार भी हारोगे

आज फिर वही इतिहास दोहराया जा रहा है। आज वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नागरिकों, युवाओं, विपक्षी नेताओं को रोकने के लिए वही कीलें, वही बैरिकेड, वही 163 BNSS की धारा लगाई जा रही है।

आप जंतर-मंतर को किला बना सकते हैं, आप सड़कों पर स्पाइक स्ट्रिप लगा सकते हैं, लेकिन आप सच को कैद नहीं कर सकते।

ज्ञानेश कुमार कोई व्यक्ति नहीं, वह उस पूरी व्यवस्था का प्रतीक बन गए हैं जिस पर वोट चोरी का आरोप लग रहा है। और एक व्यक्ति को बचाने के लिए आप पूरे लोकतंत्र को बंधक बना रहे हैं।

जनता देख रही है। किसान देख रहा है, मणिपुर की मां देख रही है, पहलगाम के पीड़ितों के परिवार देख रहे हैं। आप बैरिकेड से दिल्ली को रोक सकते हैं, लेकिन देश के सवालों को नहीं रोक सकते।

किसानों से हारे थे, इस बार जनता से भी हारोगे।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 10,2026 

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