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Friday, 16 October 2026

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर गोलीबारी की साजिश: भारत की चिंता, नफरत के खिलाफ चेतावनी

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर गोलीबारी की साजिश: भारत की चिंता, नफरत के खिलाफ चेतावनी
-Friday World Oct 16,2026 
अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा इलाके में एक प्रमुख हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की साजिश का पर्दाफाश होने के बाद भारत सरकार ने गहरी चिंता जताई है। यह घटना न सिर्फ धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है, बल्कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत की ओर भी इशारा करती है।

15 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, “हम इलिनॉय के ऑरोरा इलाके में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की कथित साजिश की रिपोर्टों से गहराई से चिंतित हैं। इस कथित साजिश का कथित हिंदू विरोधी और नस्लवादी चरित्र, जिसमें भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का जिक्र है, विशेष रूप से परेशान करने वाला है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह घटना अमेरिका में नस्लीय शत्रुता और भारत विरोधी नफरत को लेकर बढ़ती चिंताओं को और बढ़ाती है। जायसवाल ने जोर दिया कि नफरत से प्रेरित हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता होनी चाहिए तथा भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। भारत ने अमेरिकी अधिकारियों से मामले की गहन जांच, दोषियों को सजा और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की उम्मीद जताई।

क्या थी साजिश?

पुलिस के अनुसार, 19 वर्षीय एलेक्सांड्रोस पापोराकिस (Alexandros Paporakis) नामक युवक, जो पैलेटाइन का रहने वाला था, पर यह आरोप है कि उसने ऑरोरा के श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। यह मंदिर क्षेत्र का बड़ा और प्रमुख हिंदू पूजा स्थल है। अक्टूबर 2026 में नवरात्रि के पहले दिन यह साजिश सामने आई।

पापोराकिस ने एक आठ पन्नों का मेनिफेस्टो लिखा था, जिसमें वह खुद को “सोशियोपैथिक व्हाइट सुप्रीमेसिस्ट नियो-नाजी” बताता है। उसमें भारतीय मूल के लोगों, यहूदियों और अश्वेतों के खिलाफ घृणा भरी भाषा इस्तेमाल की गई थी। पुलिस के अनुसार, उसने भारतीय लोगों की सामूहिक हत्या की कल्पना की थी और कई महीनों से मंदिर की लोकेशन का अध्ययन कर रहा था।

11 अक्टूबर को वह मंदिर के पार्किंग में अपनी कार लेकर पहुंचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने राइफल से गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन बंदूक जाम हो गई। इसके बाद वह घर लौट गया। उसके सहकर्मी (टैको बेल में काम करने वाले) ने उसकी बातों और संदेशों से सतर्क होकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उसी दिन उसे गिरफ्तार कर लिया।

उसके घर से एआर-स्टाइल राइफल (बिना सीरियल नंबर वाली), सैकड़ों राउंड गोला-बारूद, टैक्टिकल वेस्ट, बॉडी आर्मर, गैस कैन और नाजी प्रतीक चिह्न वाली वस्तुएं बरामद हुईं। पुलिस का कहना है कि वह अकेला काम कर रहा था। उस पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। वह जेल में है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय है।

भारतीय मूल के सांसद भी मौजूद थे

इलिनॉय के भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने बताया कि उस दिन वे अपने परिवार सहित उसी मंदिर में पूजा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं भयभीत हूं कि एक व्हाइट सुप्रीमेसिस्ट ने भारतीय अमेरिकियों की हत्या की कोशिश की। नफरत के इस जहर को गंभीरता से लेना होगा।” उन्होंने सहकर्मियों और पुलिस की तारीफ की जिन्होंने त्रासदी को टाला।

भारत के अमेरिका में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस घटना को “गहरी चिंताजनक” बताया और कहा कि नस्लवादी हिंसा, हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नफरत का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है। अमेरिकी असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने भी सिविल राइट्स डिवीजन द्वारा जांच की बात कही।

मंदिर में बढ़ाई गई सुरक्षा

घटना के बाद श्री वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अतिरिक्त सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। ऑरोरा के मेयर और अंतरधार्मिक समूहों ने नफरत के खिलाफ आवाज उठाई। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि घृणा का इलिनॉय में कोई स्थान नहीं है।

यह घटना अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है। हाल के वर्षों में हिंदू मंदिरों और भारतीय समुदाय के खिलाफ कई घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन नफरत वास्तविक दुनिया में खतरा बन सकती है। भारतीय दूतावास और शिकागो में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने डायस्पोरा से संपर्क बनाए रखा है और घटना पर नजर रखी जा रही है।

भारत सरकार का रुख साफ है—नफरत से प्रेरित हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे न सिर्फ इस मामले की पूरी जांच करें, बल्कि भविष्य में ऐसी साजिशों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। हिंदू समुदाय और भारतीय मूल के लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आस्था का पालन कर सकें, यह सुनिश्चित करना दोनों देशों की जिम्मेदारी है।

यह घटना एक चेतावनी है। नफरत के बीज अगर समय रहते न रोके गए तो वे समाज को विभाजित कर सकते हैं। सभ्य समाज में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च—किसी भी पूजा स्थल पर हमला अस्वीकार्य है। भारत और अमेरिका दोनों को मिलकर इस प्रवृत्ति के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना होगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 16,2026 

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