-Friday World Oct 30,2026
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा का सभागार सामान्य राजनयिक चर्चा का मंच नहीं, बल्कि दो देशों के बीच सीधी टक्कर का मैदान बन गया। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र राजदूत माइक वॉल्त्ज़ और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला के बीच हुए तीखे आदान-प्रदान ने पूरी सभा को स्तब्ध कर दिया। इतना कि महासभा अध्यक्ष को कार्यवाही अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी।
यह सब अमेरिका द्वारा क्यूबा पर लगाए गए दशकों पुराने आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हुआ। क्यूबा हर साल इस प्रस्ताव को पेश करता है, जिसमें विश्व समुदाय से इन प्रतिबंधों को समाप्त करने की अपील की जाती है। प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी होता है, लेकिन प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
माइक वॉल्त्ज़ जब पोडियम पर खड़े होकर भाषण दे रहे थे, तो उन्होंने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा के नेता आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर खुद विलासिता भरी जिंदगी जी रहे हैं। वॉल्त्ज़ ने फिदेल कास्त्रो की एक पुरानी तस्वीर दिखाते हुए कहा कि कास्त्रो ने दो रोलेक्स घड़ियां पहनी थीं, जिनकी आज की कीमत लगभग 40,000 डॉलर है। उनके अनुसार यह राशि औसत क्यूबन नागरिक की 55 साल की कमाई के बराबर है। उन्होंने वर्तमान राष्ट्रपति मिगेल दियाज-कैनेल पर भी महंगी घड़ियां और विलासिता की वस्तुएं पहनने का आरोप लगाया। साथ ही कास्त्रो परिवार के निजी द्वीप, लग्जरी प्रॉपर्टी और सैन्य नियंत्रित कंपनियों के अरबों डॉलर के संपत्ति का जिक्र किया।
वॉल्त्ज़ के इन आरोपों से क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल नाराज हो गया। प्रतिनिधि मेजों पर थपथपाने लगे और पॉइंट ऑफ ऑर्डर की मांग करने लगे। विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला अपनी सीट से उठे और सीधे पोडियम की ओर बढ़ गए। उन्होंने जोर से चिल्लाते हुए वॉल्त्ज़ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। “आप झूठ बोल रहे हैं!” – रोड्रिग्ज के ये शब्द सभागार में गूंज उठे।
इस पर माइक वॉल्त्ज़ का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कड़े स्वर में कहा, “पीछे हट जाओ। यह हवाना नहीं है। तुम मुझे धमका नहीं सकते।” उन्होंने आगे कहा, “यह संयुक्त राष्ट्र है। यह तुम्हारा कम्युनिस्ट तानाशाही शासन नहीं है। तुम मुझे चुप नहीं करा सकते।” वॉल्त्ज़ ने जोर देकर कहा कि वे अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और क्यूबा के राजनीतिक कैदियों की तरह उन्हें डराने की कोशिश नहीं चलेगी।
माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि महासभा अध्यक्ष खलीलुर रहमान को बीच में पड़कर कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोनों पक्षों को अपनी जगह पर लौटने का निर्देश दिया गया। कुछ देर बाद जब स्थिति सामान्य हुई, तो वॉल्त्ज़ को अपना भाषण जारी रखने की अनुमति दी गई।
क्यूबा पक्ष का कहना है कि अमेरिका अन्य देशों पर दबाव डाल रहा है ताकि वे प्रतिबंध-विरोधी प्रस्ताव के खिलाफ वोट करें। रोड्रिग्ज ने आरोप लगाया कि ईंधन आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों से क्यूबा की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और बच्चों की मृत्यु दर बढ़ गई है। लाखों क्यूबन नागरिकों की जिंदगी खतरे में है।
वहीं अमेरिका का तर्क है कि क्यूबा की समस्याएं बाहरी प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि अपनी सरकार की भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों से पैदा हुई हैं। वॉल्त्ज़ ने जोर दिया कि सत्ताधारी वर्ग अपनी विलासिता के लिए जनता के संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा है।
यह घटना अमेरिका-क्यूबा संबंधों में लंबे समय से चली आ रही कटुता को फिर से उजागर करती है। 1960 के दशक से लागू ये प्रतिबंध आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे आर्थिक प्रतिबंधों में गिने जाते हैं। हर साल महासभा में अधिकांश देश प्रतिबंध हटाने के पक्ष में वोट देते हैं, लेकिन अमेरिका और कुछ सहयोगी देशों के विरोध के कारण प्रस्ताव लागू नहीं हो पाता।
इस बार का टकराव इसलिए भी खास था क्योंकि दोनों पक्षों ने राजनयिक शिष्टाचार की सीमाएं पार कर दीं। एक तरफ अमेरिका ने क्यूबा शासन की आंतरिक कमियों को दुनिया के सामने रखा, तो दूसरी तरफ क्यूबा ने इसे अपने देश की गरिमा पर हमला बताया। सभागार में मौजूद अन्य देशों के प्रतिनिधि इस अनोखे दृश्य को चुपचाप देखते रहे।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हुए। कई लोगों ने इसे राजनयिक इतिहास का एक यादगार पल बताया, जबकि कुछ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। अंत में महासभा ने अगले दिन प्रस्ताव पर मतदान किया, जिसमें परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में देश प्रतिबंधों के खिलाफ रहे।
यह घटना याद दिलाती है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पुरानी दुश्मनियां कभी-कभी खुलेआम सामने आ जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र जहां शांति और संवाद का प्रतीक माना जाता है, वहां भी कभी-कभी आवाजें इतनी तेज हो जाती हैं कि कार्यवाही ही रोकनी पड़ जाती है। माइक वॉल्त्ज़ और ब्रूनो रोड्रिग्ज के बीच का यह आमना-सामना आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंधों पर और असर डालेगा, यह तय है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 30,2026
#UNClash
#USCubaTensions
#MikeWaltz
#BrunoRodriguez
#CubaEmbargo
#UnitedNations
#DiplomaticDrama
#RolexGate
#UNGeneralAssembly
#WorldPolitics