-Friday World Oct 20,2026
अमेरिका में इस समय एक ही सवाल सोशल मीडिया से लेकर संसद तक गूंज रहा है - "हमारे टैक्स के पैसे से क्या हो रहा है?" दरअसल, जो तस्वीरें, वीडियो और युद्ध के मैदान की रिपोर्ट अमेरिकी लोग टीवी पर देख रहे हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं उनके द्वारा दिया गया टैक्स का पैसा लगा हुआ है, जो हर साल अनुदान के रूप में इज़राइल को दिया जाता है।
अमेरिका-इज़राइल की मदद का इतिहास
इज़राइल को अमेरिका से विदेशी सहायता मिलने का सिलसिला दूसरा विश्व युद्ध के बाद से शुरू हुआ था और 1948 में इज़राइल के गठन के बाद से अमेरिका उसका सबसे बड़ा सहयोगी बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1948 से अब तक अमेरिका इज़राइल को 300 बिलियन डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है।
साल 2016 में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था - मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU)। इसके तहत अमेरिका ने 2019 से 2028 तक 10 साल में इज़राइल को 38 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता देने का वादा किया था। इसका मतलब है हर साल करीब 3.8 बिलियन डॉलर, जिसमें से 3.3 बिलियन फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग और 500 मिलियन मिसाइल डिफेंस के लिए है।
यह पैसा आता कहाँ से है?
यह पूरा पैसा सीधे अमेरिकी टैक्सपेयर के जेब से आता है। अमेरिकी कांग्रेस हर साल बजट पास करती है और उस बजट का एक हिस्सा विदेशी सहायता के तौर पर इज़राइल को जाता है। इस पैसे से इज़राइल मुख्य रूप से अमेरिकी हथियार कंपनियों से F-35 फाइटर जेट, आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम, बम और अन्य सैन्य उपकरण खरीदता है।
अमेरिका में ही क्यों उठ रहे सवाल?
अब अमेरिका के अंदर ही इस पर दो तरह की राय है। एक वर्ग का कहना है कि इज़राइल मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे भरोसेमंद सहयोगी है और यह मदद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
वहीं दूसरा वर्ग, खासकर युवा टैक्सपेयर्स, सवाल पूछ रहे हैं कि जब अमेरिका में खुद महंगाई, हेल्थकेयर, स्टूडेंट लोन और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएं हैं, तो हर साल अरबों डॉलर बाहर क्यों भेजे जा रहे हैं? 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इज़राइल को दी गई अतिरिक्त इमरजेंसी सहायता - जो 14 बिलियन डॉलर से ज्यादा थी - के बाद यह बहस और तेज हो गई है।
साफ है, अमेरिकी जनता जो युद्ध की तस्वीरें देख रही है, वह सिर्फ खबर नहीं है, वह उनके अपने टैक्स डॉलर का हिसाब भी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 20,2026
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