-Friday World Oct 25,2026
आजकल सोशल मीडिया और कुछ चैनलों पर एक नैरेटिव तेजी से फैलाया जा रहा है कि यमन के अंसारुल्लाह (हूती) ने मक्का पर हमला किया, मदीना पर हमला किया। लेकिन हकीकत की तह में जाएंगे तो पता चलता है कि ये जंगी प्रोपेगेंडा के सिवा कुछ नहीं है, और इसी प्रोपेगेंडा की आड़ में एक 100 साल पुरानी सच्चाई को दबा दिया जाता है।
क्या वाकई #अंसारुल्लाह ने #मक्का-मदीना पर हमला किया?
पिछले 9 साल में #अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, ये सच है। लेकिन उनका टारगेट कभी भी हरमैन शरीफैन नहीं रहा। उनके आधिकारिक बयानों में हमेशा कहा गया है - "मक्का और मदीना हमारे लिए भी मुकद्दस हैं, हमारा निशाना सऊदी के मिलिट्री एयरबेस, रियाद का किंग खालिद एयरपोर्ट, जेद्दा एयरपोर्ट और अरामको के तेल ठिकाने हैं।"
तो फिर #"मक्का पर हमला" की खबर कैसे आती है? हकीकत ये है कि ताइफ, जेद्दा और रियाद के पास मौजूद सऊदी फौजी अड्डों पर दागी गई मिसाइलों को जब सऊदी एयर डिफेंस मक्का प्रांत के ऊपर रोकता है, तो उसका मलबा वहीं गिरता है। उसी मलबे की तस्वीर दिखाकर सऊदी मीडिया इसे "मक्का पर हमला" बता देती है, ताकि पूरी मुस्लिम दुनिया के जज़्बात को अंसारुल्लाह के खिलाफ भड़काया जा सके। आज तक काबा शरीफ या गुम्बद-ए-ख़ज़रा पर किसी हमले का एक भी सबूत, एक भी वीडियो पूरी दुनिया में मौजूद नहीं है।
वो सच्चाई जिसे गोदी मीडिया कभी नहीं दिखाती - #जन्नतुल बक़ी का विध्वंस
अब सवाल उठता है कि अगर हरम की हिफाजत का इतना ही ख्याल है, तो सऊदी अरब की मौजूदा हुकूमत के बाप-दादाओं ने खुद क्या किया था?
#तारीख गवाह है, 8 शव्वाल 1345 हिजरी, यानी 21 अप्रैल 1926 को, #सऊदी शासक अब्दुल अजीज इब्ने सऊद की फौज ने मदीना के सबसे मुकद्दस कब्रिस्तान जन्नतुल बक़ी पर हमला किया और वहां बने तमाम मजारों को जमीन में मिला दिया।
किन हस्तियों के #मजार शहीद किए गए?
- #जनाबे फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा - #पैगंबर-ए-इस्लाम की लाडली बेटी, जिनकी एक रिवायत के मुताबिक मजार बक़ी में है।
- #इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम - पैगंबर के नवासे और जन्नत के सरदार।
- #इमाम ज़ैनुल आबेदीन, #इमाम मोहम्मद बाकिर, #इमाम जाफर सादिक अलैहिमुस्सलाम - इन चारों इमामों का एक ही बड़ा गुम्बद था, जिसे तोड़ दिया गया।
- इसके अलावा हजरत #इब्राहिम, हजरत #अब्बास और रसूल की कई #अज़वाज की मजारें भी थीं।
- मक्का के #जन्नतुल मुअल्ला में हजरत खदीजा (स.अ) और हजरत अबू तालिब (अ.स) के मजार भी उसी सोच के तहत ढहाए गए।
उनका तर्क था कि कब्रों पर इमारत बनाना शिर्क है, लेकिन पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए ये अहले बैत की खुली बेअदबी थी। इस दिन को आज भी "यौम-ए-इन्हेदाम-ए-बक़ी" (बक़ी के विध्वंस का दिन) के रूप में याद किया जाता है।
#असली हक क्या है?
हक ये है कि झूठी खबरें फैलाकर मुसलमानों को आपस में लड़ाना आसान है, लेकिन हकीकत छुपती नहीं है। अंसारुल्लाह का सऊदी मिलिट्री से जंग अपनी जगह है, लेकिन उसे मक्का-मदीना का दुश्मन बताना फेक न्यूज है। और इसी तरह, सऊदी हुकूमत का जन्नतुल बक़ी में अहले बैत की मजारों को तोड़ना एक ऐतिहासिक सच है, जिसे डॉलर और रियाल की चमक में दबाया नहीं जा सकता।
सच्चाई के साथ रहना ही सबसे बड़ी ताकत है। हरमैन की हिफाजत भी हक है और अहले बैत की मोहब्बत और उनके मजारों का एहतराम भी हक है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 25,2026
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